महाराष्ट्र में नहीं बिक पाएगी बाबा रामदेव की कोरोनिल, मंत्री ने बताया किस-किसके सर्टिफिकेशन की है आवश्यकता

देश
Updated Feb 23, 2021 | 19:01 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने स्पष्ट कर दिया है कि पतंजलि की कोरोनिल को महाराष्ट्र में ब्रिकी की अनुमति नहीं दी जाएगी। उसे सक्षम स्वास्थ्य संगठनों से उचित प्रमाणीकरण की जरूरत है।

coronil
कोरोनिल पर उठ रहे सवाल 

मुख्य बातें

  • डब्ल्यूएचओ से प्रमाणन की सरासर झूठी बात: IMA
  • केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की मौजदूगी में पतंजलि ने दवा लॉन्च की
  • योग गुरु ने कोरोनिल टैबलेट से जुड़े वैज्ञानिक शोध को भी मीडिया के सामने रखा

नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में पतंजलि की कोरोनिल दवा की बिक्री पर रोक लगा दी है। राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और अन्य सक्षम स्वास्थ्य संगठनों से उचित प्रमाणीकरण के बिना कोरोनिल की बिक्री महाराष्ट्र में नहीं होने दी जाएगी।

देशमुख ने ट्विटर पर लिखा, 'पतंजलि की कोरोनिल दवा की बिक्री को महाराष्ट्र में WHO, IMA और अन्य संबंधित सक्षम स्वास्थ्य संस्थानों से उचित प्रमाणीकरण के बिना अनुमति नहीं दी जाएगी। कोरोनिल के तथाकथित परीक्षण पर आईएमए ने सवाल उठाए है और डब्ल्यूएचओ ने कोविड के उपचार के लिए पतंजलि आयुर्वेद को किसी भी प्रकार कि स्वीकृति देने से इंकार किया है। ऐसे में जल्दीबाजी में किसी भी दवा को उपलब्ध करवाना और दो वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियो द्वारा सराहना उचित नहीं।'

कोरोनिल पर पतंजलि के दावे से IMS स्तब्ध 

कोरोनिल को विश्व स्वास्थ्य संगठन से प्रमाण पत्र मिलने की बात को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सोमवार को सरासर झूठ करार देते हुए आश्चर्य प्रकट किया और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन से इस बाबत स्पष्टीकरण की मांग की। पतंजलि का दावा है कि कोरोनिल दवा कोविड-19 को ठीक कर सकती है और साक्ष्यों के आधार पर इसकी पुष्टि की गई है। डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट किया है कि उसने किसी भी पारंपरिक औषधि को कोविड-19 के उपचार के तौर पर प्रमाणित नहीं किया है।

योग गुरु रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद ने 19 फरवरी को कहा था कि डब्ल्यूएचओ की प्रमाणन योजना के तहत कोरोनिल टेबलेट को आयुष मंत्रालय की ओर से कोविड-19 के उपचार में सहायक औषधि के तौर पर प्रमाण पत्र मिला है। हालांकि, पतंजलि के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण ने बाद में ट्वीट कर सफाई दी थी और कहा था, 'हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि कोरोनिल के लिए हमारा डब्ल्यूएचओ जीएममी अनुपालन वाला सीओपीपी प्रमाण पत्र डीजीसीआई, भारत सरकार की ओर से जारी किया गया। यह स्पष्ट है कि डब्ल्यूएचओ किसी दवा को मंजूरी नहीं देता। डब्ल्यूएचओ विश्व में सभी के लिए बेहतर भविष्य बनाने के वास्ते काम करता है।' 

IMA ने स्वास्थ्य मंत्री से की स्पष्टीकरण की मांग

सोमवार को आईएमए की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि देश का स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते, पूरे देश के लोगों के लिए झूठ पर आधारित अवैज्ञानिक उत्पाद को जारी करना कितना न्यायसंगत है। क्या आप इस कोरोना रोधी उत्पाद के तथाकथित क्लिनिकल ट्रायल की समयसीमा बता सकते हैं? देश मंत्री से स्पष्टीकरण चाहता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को स्वतः संज्ञान लेने के लिए भी पत्र लिखेगा। यह भारतीय चिकित्सा परिषद के नियमों का उल्लंघन है।

Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।

Times Now Navbharat
Times now
zoom Live
ET Now
Mirror Now
Live TV
अगली खबर