Mob lynching: पीएम मोदी को लेटर लिखने वाले 49 सेलिब्रिटीज पर से हटाया गया राजद्रोह का मामला

देश
Updated Oct 10, 2019 | 00:43 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Sedition case: सरकार ने 49 प्रशंसित कलाकारों और बुद्धिजीवियों के खिलाफ दर्ज राजद्रोह का मुकदमा बंद करने का आदेश दिया, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में पीएम मोदी को एक पत्र लिखा था।

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50 सेलिब्रेटीज पर अब राजद्रोह केस नहीं चलेगा 

मुख्य बातें

  • ‘मॉब लिंचिंग’ की बढ़ती घटनाओं में हस्तक्षेप करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र पर इन हस्तियों ने हस्ताक्षर किये थे
  • मुजफ्फरपुर पुलिस ने कहा कि मामला बंद करने के लिये सदर पुलिस थाना को निर्देश जारी किया गया है
  • इस घटनाक्रम को लेकर राष्ट्रव्यापी रोष प्रकट किया गया था और राहुल गांधी जैसे विपक्ष के शीर्ष नेता ने भी आलोचना की थी

मुजफ्फरपुर: पीएम नरेंद्र मोदी को लेटर लिखकर देश में मॉब लिंचिंग के बढ़ते मामलों का मुद्दा उठाने वाले 49 प्रतिष्ठित लोगों के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा नहीं चलेगा। फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल, मणि रत्नम, अनुराग कश्यप और इतिहासकार रामचंद्र गुहा सहित करीब 49 जानी-मानी हस्तियों के खिलाफ यहां दर्ज राजद्रोह का मामला (sedition case) बंद करने का आदेश दिया गया है।

‘मॉब लिंचिंग’ (Mob lynching) की बढ़ती घटनाओं में हस्तक्षेप करने के लिए साल की शुरूआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र पर इन हस्तियों ने हस्ताक्षर किये थे। मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार सिन्हा ने बुधवार को कहा कि मामला बंद करने के लिये सदर पुलिस थाना को निर्देश जारी किया गया है, जहां पिछले हफ्ते प्राथमिकी दर्ज की गई थी। स्थानीय अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया गया था।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूर्य कांत तिवारी ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 156 (3) के तहत दायर याचिका अगस्त में स्वीकार कर ली थी और इस बाबत तीन अक्टूबर को निर्देश मिलने पर पुलिस ने राजद्रोह समेत अन्य धाराओं में एक प्राथमिकी दर्ज की थी।

सिन्हा ने कहा, 'राजद्रोह मामला बंद करने का आदेश दिया गया है। मामला बंद करने का अनुरोध (क्लोजर रिपोर्ट) प्रक्रिया के तहत अदालत को सौंपा जाएगा।' हालांकि, एसएसपी ने और अधिक जानकारी नहीं दी। वहीं, पुलिस सूत्रों ने दावा किया कि अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप शरारतपूर्ण हैं और उनमें कोई ठोस आधार नहीं है।

प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखने की खबरें आने के बाद ओझा ने यहां की एक अदालत में जुलाई में एक याचिका दायर की थी। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में फिल्म कलाकार सौमित्र चटर्जी, अर्पणा सेन और रेवती और शास्त्रीय गायिका शुभा मुदगल भी थीं।दिलचस्प है कि याचिकाकर्ता ने गवाह के रूप में बॉलीवुड कलाकार कंगना रनौत, मधुर भंडारकर और विवेक अग्निहोत्री का भी जिक्र किया था। साथ ही यह आरोप लगाया था कि आरोपियों ने देश की छवि को नुकसान पहुंचाया है और प्रधानमंत्री की छवि धूमिल करने की कोशिश की।

इस घटनाक्रम को लेकर राष्ट्रव्यापी रोष प्रकट किया गया था और यहां तक कि राहुल गांधी जैसे विपक्ष के शीर्ष नेता ने भी आलोचना की थी।वहीं, इतिहासकार रोमिला थापर और अभिनेता नसीरूद्दीन शाह सहित 200 सेलिब्रिटी ने एक अन्य खुला पत्र लिख कर पूछा था कि प्रधानमंत्री को की गई अपील राजद्रोह कैसे हो सकती है।

पिछले हफ्ते बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके पूर्व सहयोगी एवं वर्तमान में राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने इस विषय में हस्तक्षेप करने तथा मामला रद्द करने का अनुरोध किया था। इस बीच, आज बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी (भाजपा) या संघ परिवार का राजद्रोह के इस मामले से कोई लेना देना नहीं है।

 

 

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