Aadhaar को सोशल मीडिया अकाउंट्स से जोड़ने की मांग वाली अर्जी खारिज  

देश
Updated Oct 14, 2019 | 13:36 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Supreme Court On Aadhaar : सुप्रीम कोर्ट ने आधार को सोशल मीडिया अकाउंट्स से जोड़ने की मांग वाली अर्जी सोमवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मद्रास हाई कोर्ट जाने के लिए कहा।

SC rejects plea to link Aadhaar to social media accounts
सोशल मीडिया अकाउंट्स से नहीं जुड़ेगा आधार।  |  तस्वीर साभार: BCCL

मुख्य बातें

  • आधार को सोशल मीडिया अकाउंट्स से जोड़ने की मांग वाली अर्जी सुप्रीम कोर्ट में खारिज
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर एक चीज के लिए शीर्ष अदालत में आने की जरूरत नहीं
  • शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सोशल मीडिया अकाउंट्स से आधार को जोड़ने की मांग करने वाली एक ताजा जनहित याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को इसके लिए मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा। वकील अश्विनी उपाध्याय की नई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, 'सभी चीजों के लिए सुप्रीम कोर्ट आने की जरूरत नहीं है। यह मामला पहले ही मद्रास हाई कोर्ट के समक्ष है, आप वहां जाइए।' 

बता दें कि सोशल मीडिया अकाउंट्स को आधार से जोड़ने की मांग वाली दो जनहित याचिकाओं पर मद्रास हाई कोर्ट पहले से सुनवाई कर रहा है। हाई कोर्ट ने कहा है कि आधार को सोशल मीडिया अकाउंट्स से नहीं जोड़ा जा सकता। इसी तरह की याचिकाएं बॉम्बे और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भी दायर की गई हैं।

वहीं, फेसबुक इंक ने इस मामले में विभिन्न हाई कोर्टों में दायर सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में हस्तांतरित करने की मांग की है। फेसबुक का कहना है कि मद्रास, बॉम्बे और मध्य प्रदेश के हाई कोर्ट में याचिकाएं लगाई गई हैं और सब में एक ही बात कही गई है। कंपनी शीर्ष अदालत से इन सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़कर उन पर सुनवाई करने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने फेसबुक की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए तीन सप्ताह का वक्त दिया था। शीर्ष अदालत ने सरकार से सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर जानकारी मांगी। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने नियम बनाने की प्रक्रिया में है और इसे अंतिम रूप देने में कितना समय लगेगा, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।

वहीं, अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने तमिलनाडु सरकार का पक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं भेजे जाने का विरोध किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि मामले को देखने के लिए हाई कोर्ट को एक मौका मिलना चाहिए।  

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