नहीं रहे जाने माने पेंटर सतीश गुजराल, 94 साल की उम्र में हुआ निधन,अपनी पेंटिंग्स के लिए थे खासे मशहूर

Satish Gujral Died: प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार सतीश गुजराल का निधन हो गया है, वो जाने माने पेंटर होने के साथ मूर्तिकार, लेखक और वास्तुकार भी थे। 

Satish Gujral
प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार सतीश गुजराल का निधन हो गया (फाइल फोटो) 

नई दिल्ली: बहुमुखी प्रतिभा के धनी एक प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार, मूर्तिकार, लेखक और वास्तुकार सतीश गुजराल का 94 साल की उम्र में निधन हो गया है, वो भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के छोटे भाई थे। भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सन 1999 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया।  

सतीश को कला का राष्ट्रीय पुरस्कार तीन बार प्राप्त हो चुका है दो बार चित्रकला के लिए एवं एक बार मूर्तिकला के लिए | इनका विवाह किरण गुजराल के साथ हुआ। इनका बेटा एक प्रसिद्ध वास्तुकार है। इनकी बड़ी बेटी अल्पना ज्वैलरी डिजाइनर है एवं छोटी बेटी रसील इंटीरियर डिजाइनर है। इनके बेटे मोहित का विवाह भूतपूर्व मॉडल फिरोज के साथ हुआ।

सतीश गुजराल का जन्म 25 दिसम्बर,1925 को ब्रिटिश इंडिया के झेलम (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उन्होंने लाहौर स्थित मेयो स्कूल ऑफ आर्ट में पाँच वर्षों तक अन्य विषयों के साथ-साथ मृत्तिका शिल्प और ग्राफिक डिज़ायनिंग का अध्ययन किया।

इसके पश्चात सन 1944 में वे बॉम्बे चले गए जहाँ उन्होंने प्रसिद्ध सर जे जे स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला लिया पर बीमारी के कारण सन 1947 में उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।

खाली समय बिताने के लिए चित्र बनाने लगे। इनकी भावना प्रधान चित्र देखते ही बनती थी, इनके अक्षर एवं रेखाचित्र दोनों ही ख़ूबसूरत थी। 

उन्होंने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय अनेक पुरस्कार प्राप्त किये
जिनमें  मेक्सिको का 'लियो नार्डो द विंसी' और बेल्जियम के राजा का 'आर्डर आफ क्राउन' पुरस्कार शामिल हैं। सतीश गुजराल के चित्रों में आकृतियाँ प्रधान हैं। पशु और पक्षियों को उनकी कला में सहज स्थान मिला है। इतिहास, लोककथा, पुराण, प्राचीन भारतीय संस्कृति और विविध धर्मों के प्रसंगों को उन्होंने अपने चित्रों में संजोया है।

उन्होंने अनेक होटलों, आवासीय भवनों, विश्वविद्यालयों, उद्योग स्थलों और धार्मिक इमारतों की मोहक वास्तु परियोजनाएँ तैयार की हैं। नयी दिल्ली में बेल्जियम दूतावास के भवन की परियोजना के लिये वास्तुरचना के क्षेत्र में उन्हें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति मिली है। 

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