शिवसेना की तल्खी बरकरार, संजय राउत बोले- जनता चाहती है शिवसेना का ही हो मुख्यमंत्री

देश
किशोर जोशी
Updated Nov 01, 2019 | 10:43 IST

Maharashtra News: महाराष्ट्र में नई सरकार को लेकर अभी तक संशय की स्थिति बनी हुई है। शिवसेना ने अपने रूख में तल्खी बरकरार रखी है। संजय राउत ने कहा है कि महाराष्ट्र में शिवसेना का ही मुख्यमंत्री होगा।

Sanjay Raut
संजय राउत 

मुख्य बातें

  • महाराष्ट्र में शिवसेना के तेवर में तल्खी बरकरार, 50-50 के फॉर्मूले पर अड़ी शिवसेना
  • संजय राउत बोले- अगर ठान लिया तो शिवसेना जुटा लेगी बहुमत
  • लोग महाराष्ट्र में शिवसेना का मुख्यमंत्री चाहते हैं- संजय राउत

मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) में नई सरकार के गठन को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। 50-50 फॉर्मूले पर अड़ी शिवसेना (Shiv Sena) के रूख में अभी भी तल्खी बनी हुई है। शुक्रवार को शिवसेना सांसद और प्रवक्ता संजय राउत (Sanjay Raut) ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि महाऱाष्ट्र में अगला मुख्यमंत्री शिवसेना का ही होगा और बीजेपी के बिना भी शिवसेना बहुमत जुटा सकती है।

मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने कहा, 'अगर शिवसेना फैसला करती है, तो उसे राज्य में स्थिर सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्या बल मिल जाएगा। जनता ने 50-50 फार्मूले के आधार पर सरकार बनाने का जनादेश दिया है जो महाराष्ट्र के लोगों के सामने पहुंचा। लोग शिवसेना का मुख्यमंत्री चाहते हैं।'

 

संजय राउत ने आगे कहा, 'सरकार गठन को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है और ना ही भाजपा को कोई ‘अल्टीमेटम’ दिया है क्योंकि वे बड़े लोग हैं।' संजय राउत ने ट्वीट करते हुए भी लिखा, 'साहिब...मत पालिए, अहंकार को इतना,वक़्त के सागर में कईं, सिकन्दर डूब गए..!'

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना-बीजेपी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला है, लेकिन नतीजे जारी होने के बाद शिवसेना सत्ता के बंटवारे में 50-50 के फार्मूले के लिए अड़ गई है। वहीं बीजेपी ने भी साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री उसी का होगा। गुरुवार को ही संजय राउत ने एनसीपी मुखिया शरद पवार से मुलाकात की थी जिसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि राज्य में सत्ता के नए समीकरण बन सकते हैं।

आपको बता दें कि इस बार विधानसभा के नतीजों में भाजपा ने 105 सीटें जीतीं जबकि शिवसेना के खाते में 56 सीटें आईं। गठबंधन को भले ही स्पष्ट बहुमत मिला हो लेकिन दोनों ही दल इस स्थिति में नहीं हैं कि वो अपने बूते पर राज्य में सरकार बना सके। दोनों दलों के बीच गहराते विवाद को देखते हुए अब एनसीपी बड़ी भूमिका में आ गई है।  कुछ निर्दलीय विधायकों ने भी शिवसेना तो कुछ ने भाजपा को समर्थन देने का ऐलान किया है।

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