शिवपाल यादव की विधायकी पर खतरा, सपा ने दलबदल विरोधी कानून के तहत डाली अर्जी

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Updated Sep 12, 2019 | 23:39 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

समाजवादी पार्टी से अलग होकर अपनी नई पार्टी बनाने वाले शिवपाल यादव की विधायकी पर तलवार लटकती हुई नजर आ रही है।

Shivpal Yadav
शिवपाल सिंह यादव 

मुख्य बातें

  • समाजवादी पार्टी ने शिवपाल की विधानसभा सदस्यता समाप्‍त करने के लिए लगाई याचिका
  • प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाने वाले शिवपाल यादव अभी भी समाजवादी पार्टी से ही विधायक हैं
  • लोकसभा चुनाव में शिवपाल की पार्टी को करारी शिकस्त मिली थी

लखनऊ: विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद भी समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव के बीच कटुता खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अब सपा ने शिवपाल की विधायकी को खत्म करने के लिए याचिका लगाई है। दरअसल समाजवादी पार्टी काफी समय से शिवपाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का मन बना रही थी। 

शिवपाल ने लोकसभा चुनाव से पहले ही 'प्रगतिशील समाजवादी पार्टी' (लोहिया) नाम का नया दल बनाया था लेकिन वह अभी भी समाजवादी पार्टी से ही उत्तर प्रदेश में विधायक हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने दल बदल विरोधी कानून के आधार पर शिवपाल सिंह यादव की विधानसभा सदस्यता खत्म करने की याचिका प्रस्तुत की है।

 


विधानसभा चुनावों में सपा को मिली करारी हार का एक कारण परिवार का झगड़ा था जिसकी वजह से अखिलेश यादव, शिवपाल से काफी नाराज थे। शिवपाल ने जब नई पार्टी बनाई थी तो उन्होंने कहा कि 'अब समाजवादी पार्टी में शामिल होने या फिर उनके साथ कोई भी बात करने का सारा अध्याय बंद हो चुका है। हम और हमारी पार्टी विधानसभा उपचुनाव के साथ ही 2022 के विधानसभा चुनाव पर ध्यान दे रहे हैं।'

लोकसभा चुनाव के दौरान शिवपाल सिंह यादव ने कई सीटों पर उन्होंने अपने दल का उम्मीदवार भी उतारे थे लेकिन अधिकांश उम्मीदवारों अपनी जमानत तक नहीं बचा सके थे। शिवपाल खुद फिरोजाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे लेकिन उन्हें भी बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था।लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी को जहां 5 सीटें मिली थी वहीं बहुजन समाज पार्टी को 10 सीटें मिली थी। जबकि भारतीय जनता पार्टी को 62 सीटें मिली थी। वहीं कांग्रेस को महज एक सीट से संतुष्ट करना पड़ा था।

 

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