क्या अखिलेश पर भारी पड़ गईं प्रियंका, गिरफ्तार होने पर मिल रहा सपोर्ट

देश
Updated Jul 25, 2019 | 18:42 IST | मनोज यादव

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र नरसंहार मामले में प्रियंका गांधी राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी से आगे निकल गई हैं। चर्चा तो यह होने लगी है कि वो अखिलेश यादव पर भारी पड़ गई हैं।

Priyanaka Gandhi
प्रियंका गांधी 

मुख्य बातें

  • 17 जुलाई को सोनभद्र जिले की घोरावल तहसील में 10 लोगों की की गई थी हत्या
  • इस सामूहिक हत्याकांड ने राजनीतिक रंग ले लिया
  • प्रियंका गांधी ने शुक्रवार को जब सोनभद्र का रूख किया तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया
लखनऊः उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में दस आदिवासियों की हत्या का मामला अब काफी तूल पकड़ता जा रहा है। पहले तो यह लगा कि सरकार लीपापोती करके इस मामले को दबा देगी। अगर सरकार को ज्यादा घेरने की कोशिश की गई तो मानसून सत्र में सरकार की तरफ से सफाई देकर काम चल जाएगा। लेकिन अब यह मामला राजनीतिक रंग ले लिया है।  मुख्य विपक्षी पार्टी जहां इस मामले में अब पीछे हो गई है, तो सदी के सबसे बड़े नरसंहार पर सरकार को घेरने में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी सबसे आगे निकल गई हैं।
 
जमीन पर कब्जा करने के लिए पूरी तैयारी से आया प्रधान
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में कानून व्यवस्था इस कदर चरमरा गई है कि अपराधियों पर न तो कोई अंकुश है और न ही किसी बात का डर है। जब चाह रहे हैं तब वो किसी न किसी की हत्या कर दे रहे हैं। 17 जुलाई को सोनभद्र जिले की घोरावल तहसील के उंभा गांव में मौत का जो खूनी खेल खेला गया। वह सबकी रूह कंपा देने वाली हैं। अपने गांव से 32 ट्रैक्टरों में भरकर लोगों का लाने वाले प्रधान ने पहले से ही इसकी योजना बनाई होगी कि जो जमीन सदियों से स्थानीय ग्रामीणों के कब्जे में है। उस पर कब्जा जमाने में कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। लिहाजा अपने गुर्गों को उसने गोली चलाने का आदेश दे दिया। गोली लगने से जब लोगों की मौतें होने लगी, तो उसके बाद उनको लाठी डंडों से भी पीटा गया। जिसमें दर्जनों लोग घायल हो गए, जिसमें मासूम बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। मृतकों में भी तीन महिलाएं हैं, जिन्हें गोलियों से भून दिया गया था।
 
आनन-फानन में सरकार की तरफ से आरोपियों पर कार्रवाई करने का आदेश जारी किया गया और मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा कर दी गई। सरकार की तरफ से मामले पर दस दिनों के अंदर अधिकारियों को रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया। सरकार की तरफ से जल्दी-जल्दी इतनी कार्रवाई इसलिए की जाने लगी कि मामला कोई छोटा नहीं बल्कि बहुत बड़ा है। इस पर सरकार पूरी तरह से घिर सकती है। हुआ भी वही कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी ने सोनभद्र जाकर पीड़ितो के परिवार वालों से मिलकर उनका हालचाल जानने के लिए वाराणसी पहुंची और ट्रामा सेंटर पहुंचकर घायलों का हाल जाना। उसके बाद वो मिर्जापुर के रास्ते सोनभद्र के लिए रवाना हुईं, तो उनको बीच रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें चुनार के गेस्ट हाउस में ले जाकर नजर बंद कर दिया गया।
 
पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात करने पर अड़ीं प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी इस बात पर अड़ गईं कि वो बिना पीड़ितो से मिले वापस जाने वाली नहीं हैं। प्रियंका गांधी वहीं पर धरने पर बैठ गईं। सरकार की तरफ से गेस्ट हाउस का बिजली - पानी बंद कर दिया गया। अधिकारियों ने प्रियंका गांधी से यहां तक कहा कि यहां पर एसी नहीं है। आप बनारस चली जाइए। लेकिन प्रियंका गांधी ने कहा कि वो एसी में रहने के लिए नहीं आई हैं, बल्कि वो नरसंहार में मारे गए परिवारों के सदस्यों से मिलने के लिए आई हैं और वे बिना उनसे मिले यहां से जाने वाली नहीं। अधिकारियों ने कहा कि वहां पर धारा 144 लगी है, जिसकी वजह से चार से ज्यादा लोंगो के एक साथ जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। प्रियंका गांधी ने कहा कि वो इसके लिए भी तैयार हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से प्रियंका गांधी की बातों को खारिज कर दिया गया और कहा गया कि उन्हें ऊपर से आदेश है कि उन्हें घोरावल नहीं जाने दिया जाए।
 
विधानसभा में सपा विधायकों का जोरदार हंगामा
सोनभद्र नरसंहार मामले पर समाजवादी पार्टी के विधायकों की तरफ से विधानसभा में जोरदार हंगामा किया गया। लेकिन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष इस बार भी चूक गए। जो काम सड़क पर होना चाहिए था। उसको विधानसभा में करवा रहे थे। लेकिन प्रियंका गांधी ने सड़क पर उतरकर लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचने में सफल हो गईं। अब प्रियंका गांधी सुर्खियां बटोर रही हैं और सपा नेता कुछ नहीं कर पा रहे हैं। प्रियंका गांधी के इस कदम की चारों तरफ चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि प्रियंका गांधी अखिलेश यादव पर भारी पड़ गई हैं।
 
लखनऊ हवाई अड्डे पर इलाहाबाद जाने से अखिलेश को रोका
पिछले साल जब अखिलेश यादव इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के कार्यक्रम में जाने के लिए लखनऊ के हवाई अड्डे पर पहुंचे तो उनको रोकने के लिए प्रशासनिक अमला पहले से ही मौजूद था और उन्हें वहीं पर रोक दिया गया। अखिलेश यादव चुपचाप वापस चले आए। इलाहाबाद में इस बात लेकर छात्र आंदोलित हो गए। उस समय सांसद रहे धर्मेंद्र यादव पर भी पुलिस ने लाठियां भांजी और उनका सिर फट गया। लेकिन अखिलेश यादव शांत रहे। उन्होंने कुछ भी नहीं किया। अगर सपाध्यक्ष चाहते तो जहां पर उन्हें रोका गया वहीं धरने पर बैठ जाते, जो एक बड़ा आंदोलन बन सकता था, जिसका चुनावों में अखिलेश को फायदा मिलता। लेकिन सपाध्यक्ष हमेंशा ही ऐसे मामलों में चूक कर जाते हैं। इस बार की चूक की कीमत सपाध्यक्ष को प्रियंका गांधी के बाजी मारने के तौर पर देखी जा रही है।

(डिस्क्लेमर : मनोज यादव अतिथि लेखक हैं और ये इनके निजी विचार हैं। टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।)

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