मजदूरों से मनमाना किराया ले रहे हैं निजी बस ऑपरेटर्स, छतों पर बिठाकर जोखिम में डाली जा रही जान

लॉकडाउन के कारण दिल्‍ली-एनसीआर में बड़ी संख्‍या में मजदूर फंसे हुए हैं, जिनसे निजी बस संचालक मनमाना किराया ले रहे हैं। उन्‍हें बसों की छत पर भी बिठाकर उनकी जान जोखिम में डाली जा रही है।

मजदूरों से मनमाना किराया ये रहे हैं निजी बस ऑपरेटर्स, छतों पर बिठाकर जोखिम में डाली जा रही जान
मजदूरों से मनमाना किराया ये रहे हैं निजी बस ऑपरेटर्स, छतों पर बिठाकर जोखिम में डाली जा रही जान 

मुख्य बातें

  • लॉकडाउन के कारण दिल्‍ली-एनसीआर में बड़ी संख्‍या में मजदूर फंसे हुए हैं
  • निजी बस ऑपरेटर्स उन्‍हें गंतव्‍य तक पहुंचाने के लिए मनमाना किराया ले रहे हैं
  • बसों की छतों पर भी लोगों को बिठाया जा रहा है और इसके लिए 500 रुपये लिए जा रहे हैं

नई दिल्‍ली : लॉकडाउन के कारण फंसे मजदूरों को उनके गंतव्‍य तक पहुंचाने के लिए निजी बसों के संचालक उनसे मनमाना किराया वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं एक सीट पर 5-5 लोगों को बिठाया जा रहा है और बसों की छतों पर भी लोगों को बिठाकर उनकी जान जोखिम में डाली जा रही है। निजी बस संचालक 300-400 किलोमीटर की दूरी के लिए उनसे प्रति व्‍यक्ति 1,000 रुपये वसूल रहे हैं।

इन बसों में एक सीट पर 5-5 लोगों को बिठाकर ले जाया जा रहा है, जबकि कोरोना वायरस के मद्देनजर सरकार लोगों को लगातार एक-दूसरे से 1 मीटर की दूरी बरकरार रखने की सलाह दे रही है। यहां त‍क कि बसों की छत पर भी लोग बिठाए जा रहे हैं और इसके लिए हर व्‍यक्ति से 500-500 रुपये लिए जा रहे हैं। इस बारे में पूछे जाने पर बस ड्राइवर्स कहते हैं, 'हमसे पैसे लिए जा रहे हैं तो हम लोगों से लेंगे।'

लोगों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सरकार ने निजी बस संचालकों को भी दिल्‍ली-एनसीआर में फंसे लोगों को उनके गंतव्‍य तक पहुंचाने की अनुमति दी है, लेकिन ये बस ऑपरेटर्स उनसे मनमाना किराया वसूल कर रहे हैं। कई यात्रियों ने बताया कि टिकट के दाम यूं तो 300-400 रुपये हैं, लेकिन उनसे एक-एक हजार रुपये लिए जा रहे हैं। इतने रुपये नहीं देने की स्थिति में उन्‍हें बसों से उतर जाने को कहा जा रहा है।

एक यात्री ने बताया कि जब उसने 600 रुपये की पेशकश की तो बस ड्राइवर और कंडक्‍टर ने मना कर दिया। ऐसे कई अन्‍य यात्रियों ने भी बताया कि उनसे अधिक किराया लिया जा रहा है। यह पूछे जाने पर कि आखिर लोगों से अधिक किराये क्‍यों लिए जा रहे हैं, ड्राइवर और कंडक्‍टर ने पहले तो यह बताय कि उन्‍हें भी किसी को पैसा देना होता है और जब बार-बार यह पूछा गया कि आखिर उन्‍हें किसे पैसे देने होते हैं तो उन्‍होंने कहा कि उन्‍हें अड्डे पर पैसे देने होते हैं।

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