आंध्र प्रदेश में राजनीतिक खींचतान में गई विधान परिषद! अब गेंद संसद के पाले में 

Legislative Council of Andhra Pradesh : आंध्र प्रदेश विधानसभा ने सोमवार को विधानसभा खत्म करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी जबकि तेदेपा ने सदन से बहिष्कार किया। जगन मोहन राज्य में 3 राजधानियां बनाने चाहते हैं।

Political tussle of YS Jaganmohan Reddy Chandrababu Naidu abolished Legislative Council of Andhra, आंध्र प्रदेश में राजनीतिक खींचतान में गई विधान परिषद! अब गेंद संसद के पाले में 
आंध्र प्रदेश विधानसभा में विधान परिषद खत्म करने का प्रस्ताव पारित हुआ है।  |  तस्वीर साभार: BCCL

मुख्य बातें

  • आंध्र प्रदेश विधान परिषद खत्म करने का प्रस्ताव सोमवार को पारित हुआ
  • जगन मोहन रेड्डी-चंद्रबाबू नायडू के बीच जारी है राजनीतक खींचतान
  • गेंद अब संसद के पाले में, कानून मंत्रालय द्वारा तैयार बिल संसद में होगा पेश

नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद ताबड़तोड़ बड़े फैसले लेने वाले जगनमोहन रेड्डी ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। आंध्र प्रदेश विधानसभा ने सोमवार को राज्य की विधान परिषद खत्म करने से संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। विधानसभा ने यह प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 169 (1) के तहत पारित किया है। संविधान का यह अनुच्छेद राज्यों को शक्ति देता है कि वे विधानसभा के दो-तिहाई बुहमत से इस तरह का प्रस्ताव पारित कर सकती हैं और विधानसभाओं से पारित इस तरह के प्रस्ताव पर संसद विधान परिषद का गठन करने या उसे खत्म करने पर फैसला ले सकती है। 

विधान परिषद खत्म करने के जगनमोहन सरकार के इस प्रस्ताव पर संसद कौन सा रुख अपनाती है यह देखने वाली बात होगी। वहीं, विधानसभा के सत्र का बहिष्कार कर तेदेपा ने यह जताने की कोशिश की है कि यह प्रस्ताव उसकी गैर-मौजूदगी में पारित हुआ। आंध्र प्रदेश की 175 सीटों वाली विधानसभा में वाईएसआर कांग्रेस के 151 विधायक हैं जबकि 58 सीटों वाली विधान परिषद में उसके 9 सदस्य हैं। विधान परिषद में वाईएसआर कांग्रेस को बहुमत नहीं है।

राजधानी बनाने पर है खींच तान
दरअसल, मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी आंध्र प्रदेश में तीन राजधानियां-अमरावती, विशाखापट्टनम और कुरनूल बनाना चाहते हैं। इसके पीछे जगन मोहन का तर्क है कि इससे राज्य का तेजी से विकास होगा। जबकि तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू हैदराबाद को राजधानी बनाए रखने के पक्ष में है। तीन नई राजधानियां बनाने से संबंधित दो विधेयकों को तेदेपा ने पिछले सप्ताह विधान परिषद में पारित नहीं होने दिया। इसके बाद जगन मोहन रेड्डी ने विधान परिषद खत्म करने का फैसला किया। 

विधान परिषद के पक्ष में नहीं है जगनमोहन
वाईएसआर कांग्रेस का मानना है कि राज्य में तीन राजधानियां बनाने की सरकार की योजना की राह में तेदेपा रोड़ा अटका रही है। उसे पहले से यह अंदेशा था कि तेदेपा राज्य के विकास में उठाए जाने वाले कदमों पर तेदेपा अवरोध खड़ा कर सकती है। वाईएसआर कांग्रेस ने पिछले महीने यह संकेत दिया था कि अगर तेदेपा राज्य के विकास और सरकार के कामकाज में यदि अवरोध खड़ा करेगी तो वह विधान परिषद खत्म कर देगी। जगन मोहन रेड्डी ने कुछ दिनों पहले कहा था, 'हमें गंभीरता पूर्वक यह सोचना चाहिए कि इस तरह के सदन की जरूरत है कि नहीं। यह सदन राजनीतिक इरादों की पूर्ति का एक साधन मात्र बन कर रह गया है।'

प्रस्ताव पर अब संसद करेगी फैसला 
वाईएसआर कांग्रेस का कहना है कि लोगों ने राज्य के विकास के लिए उसे एक बड़ा जनादेश दिया है। सरकार जनता के हित में फैसले करना चाहती है लेकिन तेदेपा विकास से संबंधित अहम विधेयकों को विधान परिषद में रोक रही है और सरकार को काम करने नहीं दे रही। जगन मोहन सरकार के इस कदम के बाद गेंद अब संसद के पास है। आंध्र प्रदेश की विधानसभा के इस प्रस्ताव को संसद से मंजूरी मिलेगी ये नहीं, यह देखने वाली बात होगी। केंद्रीय कानून मंत्रालय इस प्रस्ताव पर एक विधेयक तैयार करेगा और फिर उसे संसद में पेश किया जाएगा। संसद में इस विधेयक के पेश होने में तीन से छह महीने का समय लग सकता है। हालांकि, इस दौरान विधान परिषद काम करना जारी रखेगी।

अभी छह राज्यों में है विधानसभा
देश के छह राज्यों में दो विधान प्रणाली है। आंध्र प्रदेश के अलावा पांच अन्य राज्यों बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और यूपी में विधानसभा के साथ-साथ विधान परिषद भी हैं। केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले जम्मू-कश्मीर में भी विधान परिषद थी। इनके अलावा ओडिशा ने विधानसभा परिषद के लिए एक प्रस्ताव पारित किया है जबकि राजस्थान एवं असम के लिए विधान परिषद के प्रस्ताव राज्य सभा में लंबित हैं।
 

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