देश में बढ़ा बाघों का कुनबा लेकिन टाइगर रिजर्व्स का प्रबंधन भी है चुनौती

देश
आलोक राव
Updated Aug 04, 2019 | 16:10 IST

इस बार देश में सबसे ज्यादा 526 बाघ मध्य प्रदेश में पाए गए हैं। बाघों के संरक्षण के लिए यहां का पेंच टाइगर रिजर्व सबसे अनुकूल है। बाघों के संरक्षण के लिए पेंच टाइगर रिजर्व ने जो कदम उठाए हैं वह प्रशंसनीय हैं।

Tigers in India
भारत में बाघों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।  |  तस्वीर साभार: PTI

मुख्य बातें

  • साल 2018 में भारत में बाघों की संख्या बढ़कर 2967 हुई
  • 2006 में देश में थे कुल 1411 बाघ, अब दोगुनी हुई संख्या
  • बाघों की बढ़ती संख्या के हिसाब से उनका प्रबंधन भी है जरूरी

देश में बाघों की संख्या पर 2006 में आई रिपोर्ट चिंता में डालने वाली थी। उस समय की रिपोर्ट में बताया गया कि देश में केवल 1411 बाघ बचे हैं। किसी भी लिहाज से बाघों का यह आंकड़ा संतोषजनक नहीं था। देश में बाघों के सिकड़ते इस कुनबे ने सरकार के माथे पर सिकन ला दिया और फिर बाघों की इस संख्या को बढ़ाने के लिए सरकार ने व्यवस्थित तरीके और मिशन मोड पर काम करना शुरू किया। सरकार और बाघ संरक्षण अभ्यारण्यों के संयुक्त प्रयास रंग लाए और 2018 में बाघों की संख्या बढ़कर 2967 हो गई है। यह संख्या उत्साहजनक है जिसे और आगे ले जाने की जरूरत है। गत 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर में बाघों की गणना पर रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में बताया गया कि 2018 में देश में बाघों की संख्या 2967 हो गई है। जबकि 2014 में यह संख्या 2226 थी। बाघों की संख्या में करीब 33 फीसद का इजाफा हुआ है।

इस बार देश में सबसे ज्यादा 526 बाघ मध्य प्रदेश में पाए गए हैं। बाघों के संरक्षण के लिए यहां का पेंच टाइगर रिजर्व सबसे अनुकूल है। बाघों के प्रबंधन की दिशा में पेंच टाइगर रिजर्व ने जो कदम उठाए हैं वे प्रशंसनीय हैं। सिवनी जिला स्थित इस टाइगर रिजर्व में साल दर साल बाघों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। इस रिजर्व में करीब 60 बाघों के होने की बात कही गई है। साल 2014 में यहां 43, 2010 में 23 और 2006 में 15 बाघ थे। पेंच रिजर्व का 411 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र सघन वन वाला है जबकि इसका बफर एरिया 768 वर्ग किलोमीटर का है। यह रिजर्व नौ रेंज में फैला है। बाघों के प्रबंधन एवं उनके अनुकूल वातावरण के निर्माण में यह रिजर्व देश के बाकी टाइगर रिजर्व से बहुत आगे है। यह देश के शीर्ष टाइगर रिजर्ब्स में शामिल रहा है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की 2010 की रिपोर्ट में इसे सर्वश्रेष्ठ और 2014 की रिपोर्ट में दूसरा शीर्ष टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। बाघों के लिए मशहूर कान्हा टाइगर रिजर्व भी मध्य प्रदेश में ही स्थित है। 

किस राज्य में हैं कितने बाघ
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 29 जुलाई को बाघों की संख्या पर जो रिपोर्ट आई है उसके अनुसार देश में 2967 बाघ हैं। 2014 के बाघों की संख्या से यह आंकड़ा 33 प्रतिशत ज्यादा है। भारत में कुल 50 टाइगर रिजर्व्स हैं। रिपोर्ट में भारत में कहां पर कितने बाघ हैं उनकी संख्या बताई गई है। सबसे ज्यादा बाघ मध्य प्रदेश में पाए गए हैं। यहां बाघों की संख्या 526 है। इसके बाद कर्नाटक में 524, उत्तराखंड में 442, उत्तर प्रदेश में 173, बिहार में 31, असम में 190, अरुणाचल प्रदेश में 29, झारखंड में 5, छत्तीसगढ़ में 19, ओडिशा में 28, आंध्र प्रदेश में 48, तमिलनाडु में 264, केरल में 190, तेलंगाना में 26, महाराष्ट्र में 312 और गोवा में 3 बाघ पाए गए हैं। 

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बाघों की संख्या बढ़ना अच्छी बात लेकिन प्रबंधन भी चुनौती
रिपोर्टों की अगर मानें तो हमारे यहां 25 से 35 प्रतिशत बाघ संरक्षित रिजर्व से बाहर रहते हैं। यानि वे अपनी रिहायश के उन क्षेत्रों में रहते हैं जहां से उनके मानव बस्तियों की तरफ आने का खतरा बना रहता है। बाघों का जंगल में जहां निवास है और जहां वे रहते हैं उसके चारो तरफ कॉरीडोर होना चाहिए जहां वे अपने शिकार के लिए जा सकें। उन्हें जंगल में ही शिकार मिल जाएगा तो वे मानव बस्तियों की तरफ रुख नहीं करेंगे। महाराष्ट्र में अवनि नाम की बाघिन को इसलिए मारना पड़ा क्योंकि वह आदमखोर बन गई थी। अवनि के मारे जाने पर पर काफी विवाद हुआ। महाराष्ट्र के अलावा समय-समय पर अन्य राज्यों में बाघों के अपने हैबिटेट से बाहर आने की घटनाएं सामने आई हैं जहां उनका मानव से सामना हुआ है। मनुष्य और वन्यजीव का संघर्षपूर्ण आमना-सामना होना अच्छी बात नहीं है। 

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क्षमतायुक्त रिजर्व्स में बाघों को रखा जाए
2006 में देश में 1411 बाघ थे जो बढ़कर अब करीब 3000 हो गए हैं। बाघों की यह संख्या दोगुनी हो गई है लेकिन क्या इस बढ़ोतरी के हिसाब से हम उनके प्रबंधन एवं रखरखाव की जरूरतें विकसित कर पाए हैं। अक्सर बाघों को एक रिजर्व से निकालकर दूसरे रिजर्व में रखने की बात सामने आती है और ऐसा करने में कोई बुराई नहीं है। बाघों को एक रिजर्व से दूसरे रिजर्व में स्थानांतरित करते समय उनके वातावरण की अनुकूलता का ध्यान रखा जाना चाहिए। जो रिजर्व उन्हें ज्यादा पसंद आए उन जगहों पर उन्हें रखा जा सकता है। बाघों की बढ़ती संख्या के हिसाब से टाइगर रिजर्व्स में सुविधाएं बढ़ाना एवं प्रबंधन करना समय की जरूरत है। बाघों का संरक्षण और उनके हैबिटेट्स का प्रबंधन दोनों साथ-साथ चलना चाहिए। किसी एक में भी असंतुलन होने पर समस्या पैदा होगी। सरकार को इस तरफ भी ध्यान देना चाहिए। 

(डिस्क्लेमर : लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं। टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।)
 

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