7 AM@ 22 जनवरी: तिहाड़ को भी 'फांसी' का इंतजार,दोषियों के पास अब कानूनी विकल्प नहीं

देश
ललित राय
Updated Jan 14, 2020 | 17:38 IST

Supreme court rejects curative plea: निर्भया के गुनहगार फांसी के तख्ते के और नजदीक पहुंच चुके हैं, हालांकि विनय शर्मा और मुकेश सिंह के पास दया याचिका दाखिल करने का संवैधानिक हक है।

7 AM@ 22 जनवरी: तिहाड़ को भी इंतजार है फांसी का, दोषियों के पास अब कानूनी विकल्प नहीं
तिहाड़ जेल में निर्भया के गुनहगारों को दी जानी है फांसी 

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने विनय शर्मा और मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज की।
  • विनय शर्मा और मुकेश के पास अब सिर्फ दया याचिका का रास्ता
  • पवन गुप्ता और अक्षय की तरफ से अभी तक नहीं दायर की गई है क्यूरेटिव याचिका

नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों की फांसी की सजा 22 जनवरी सुबह सात बजे मुकर्रर है। ये बात अलग है कि दोषियों की तरफ से अपने आप को बचाने की हर मुमकिन कोशिश जारी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने विनय शर्मा और मुकेश की क्यूरेटिव याचिका को खारिज कर उनके कानूनी विकल्पों पर अंतिम मुहर लगा दी। यानि कि ये दोनों दोषी अब संवैधानिक व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति के पास दया की अर्जी लगा सकते हैं। अगर राष्ट्रपति ने उन दोनों दोषियों पर रहम नहीं करते हैं तो उन्हें फांसी पर लटका दिया जाएगा। इस केस से जुड़े दो और दोषियों पवन गुप्ता और अक्षय सिंह की तरफ से क्यूरेटिव अर्जी फिलहाल नहीं लगाई गई है।
दिन और समय मुकर्रर अब कुछ दिन का इंतजार !
पटियाला हाउस कोर्ट ने जब चारों दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी किया तो निर्भया के पीड़ित माता पिता के साथ करोड़ों भारतीयों को उम्मीद जगी कि अब गुनहगारों को उनके किए की सजा मिल जाएगी। इसके लिए तिहाड़ जेल में फांसी दिए जाने के लिए कुछ डमी का टेस्ट किया गया। हालांकि भारत की न्यायिक प्रणाली में उपलब्ध धाराओं का इस्तेमाल करते हुए दो दोषी सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर पहुंचे थे। लेकिन पांच जजों की पीठ ने एक सुर में क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी। अब ऐसे में दोषियों के सामने और क्या विकल्प मौजूद हैं उस पर नजर डालते हैं।

क्यूरेटिव का विकल्प समाप्त
सुप्रीम कोर्ट से क्यूरेटिव याचिका खारिज होने के बाद अब विनय और मुकेश के सामने सिर्फ दया याचिका का विकल्प मौजूद है। लेकिन उससे पहले बात करेंगे बाकी उन दो दोषियों पवन गुप्ता और अक्षय सिंह की। इन दोनों की तरफ से क्यूरेटिव याचिका नहीं दायर की गई है। इसका अर्थ ये है कि अगर ये दोनों सुप्रीम कोर्ट का रुख नहीं करते हैं तो इसका अर्थ ये होगा कि उन्हें किसी भी स्तर पर किए फैसले से ऐतराज नहीं है। अगर वो सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं तो जिस तरह से एक ही अपराध और एक ही तरह की सुनाई गई सजा में विनय और मुकेश की दलील खारिज हो गई है ठीक वैसे ही इनकी भी अपील खारिज हो जाएगी। 

अब सिर्फ 'दया' की आस
अगर विनय और मुकेश दया याचिका की अर्जी लगाते हैं तो सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि पूरी प्रक्रिया है। दोनों दोषी जेल प्रशासन को दया की अर्जी दे सकते हैं. हालांकि यह प्रक्रिया लंबी होती है। इसके लिए डिजिटल माध्यम की मदद ली जा सकती है। इस व्यवस्था के तहत दया याचिका की अर्जी दिल्ली सरकार को भेजी जाएगी जिस पर विचार के बाद इसे एलजी को बढ़ा दिया जाता है, एलजी के विचार के बाद इसे गृहमंत्रालय को भेजा जाता है और उस पर वरिष्ठ अधिकारी विचार करने के बाद संस्तुतियों के साथ फैसले के लिए राष्ट्रपति को बढ़ा देते हैं। 
राष्ट्रपति अंतिम तौर पर फैसला करते हैं कि दया याचिका खारिज करनी है या स्वीकार करनी है। अगर वो समझते हैं कि दोषी समाज के लिए खतरा हैं तो मर्सी पिटीशन खारिज करने का आदेश होता है और पूरी प्रक्रिया उलटी दिशा में चलती है। यानि की राष्ट्रपति कार्यालय से फाइल गृहमंत्रालय, एलजी, दिल्ली सरकार और तिहाड़ जेल प्रशासन को जाती है। कुछ लोगों का मानना है कि अगर दोषियों की तरफ से दया याचिका लगाई ही नहीं गई तो क्या होगा इसके जवाब में जानकार कहते हैं कि अर्थ साफ है कि दोषियों को भी भारत की न्यायिक प्रणाली पर पूरा भरोसा है।

 

देश और दुनिया में  कोरोना वायरस पर क्या चल रहा है? पढ़ें कोरोना के लेटेस्ट समाचार. और सभी बड़ी ख़बरों के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें

अगली खबर