Nirbhaya Case: अक्षय सिंह की फांसी की सजा बरकरार, सुप्रीम कोर्ट ने दलीलों को नकारा

देश
ललित राय
Updated Dec 18, 2019 | 13:48 IST

Supreme court verdict on akshay singh review plea: निर्भया गैंगरेप केस में दोषी अक्षय सिंह की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसका अर्थ ये है कि गुनहगार फांसी के और करीब पहुंच चुके हैं।

दलील नहीं आई काम, निर्भया केस में दोषी अक्षय सिंह की पुनर्विचार अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज
सुप्रीम कोर्ट से अक्षय सिंह की पुनर्विचार अर्जी खारिज 

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने अक्षय सिंह की पुनर्विचार अर्जी को किया खारिज
  • अक्षय सिंह के वकील ए पी सिंह का बयान- कभी कभी जनभावना में लिए जाते हैं फैसले
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भया की मां बोलीं- खुश हूं

नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस में दोषी अक्षय सिंह की पुनर्विचार अर्जी को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इसके साथ ही अक्षय की फांसी का रास्ता भी साफ हो गया है। ये बात अलग है कि अक्षय के वकील ने दया याचिका के लिए 14 दिन का समय मांगा है। लेकिन सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सात दिन का समय दिया जा सकता है। इस बीच पटियाला हाउस कोर्ट में भी सुनवाई होनी है जिसमें सभी दोषियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश किया जाएगा। 

तीन सदस्यीय पीठ का फैसला
जस्टिस आर भानुमति की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस ए एस बोपन्ना शामिल हैं। अक्षय सिंह के वकील ए पी सिंह का कहना था कि दिल्ली सरकार फांसी दिए जाने पर आमादा है। मानवाधिकार भारतीय संस्कृति के खिलाफ है फांसी और किसी भी सभ्य समाज में अपराध को रोकने का यह तरीका नहीं हो सकता है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की तरफ से दलील दी गई थी कि दोषी रहम का हकदार नहीं है। कुछ अपराध इस तरह के होते हैं जिस पर मानवता भी रोती है। भगवान भी ऐसे दरिंदों के काम से शर्मसार होगा।

अक्षय सिंह के वकील की अजीबोगरीब दलील
सुप्रीम कोर्ट में दोषी अक्षय सिंह के वकील की तरफ से अजीबोगरीब दलील दी गई। उन्होंने कहा कि जियो और जीने दो के सिद्धांत का पालन होना चाहिए। यही नहीं निर्भया का दोस्त पैसे लेकर मीडिया में बयान देता था और इसकी शिकायत भी लंबित है। निर्भया ने मरने से पहले जो बयान दिया था उसमें अक्षय सिंह का नाम शामिल नहीं था। मीडिया, राजनेताओं और लोगों के दबाव में न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। यही नहीं पैसों के अभाव में गरीब अपना मुकदमा सही तरह से नहीं लड़ पाते हैं। सच तो ये है कि गरीबों को ही मृत्युदंड दिया जाता है। 

फैसले के बाद अक्षय के वकील ए पी सिंह ने कहा कि वो फैसले से निराश हैं, कभी कभी जनभावना भी अदालती फैसले को प्रभावित करते हैं। अभी भी उनके पास जो उपाय उपलब्ध होंगे उनका इस्तेमाल किया जाएगा। 

'सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हूं'
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि वो स्वागत करती हैं, समाज में इस तरह के दरिंदों के रहने का अधिकार नहीं है, निर्भया के गुनहगारों को जल्द से जल्द फांसी की सजा दिए जाने की जरूरत है ताकि समाज में इस तरह के गंभीर अपराध को अंजाम देने वालों को सबक मिल सके। 

India News in Hindi (इंडिया न्यूज़), Times now के हिंदी न्यूज़ वेबसाइट -Times Network Hindi पर। साथ ही और भी Hindi News (हिंदी समाचार) के अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें.

Times now
Mirror Now
ET Now
zoom Live
Live TV
अगली खबर