निर्भया गैंगरेप मामला: फैसले की समीक्षा याचिका पर 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

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Updated Dec 12, 2019 | 17:37 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

वर्ष 2012 के निर्भया गैंगरेप मामले के दोषियों में से एक, अक्षय कुमार सिंह की समीक्षा याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बैंच 17 दिसंबर को सुनवाई करेगी।

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निर्भया गैंगरेप मामले के दोषी अक्षय सिंह की समीक्षा याचिका पर सुनवाई होगी 

नई दिल्ली : वर्ष 2012 के निर्भया गैंगरेप मामले के दोषियों में से एक, अक्षय कुमार सिंह की समीक्षा याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बैंच 17 दिसंबर को सुनवाई करेगी। निचली अदालत ने 13 तारीख की सुबह मामले में सभी पक्ष को तलब किया है। अभियुक्त वकील स्पेशल पीपी राजीव मोहन, वृंदा ग्रोवर और निर्भया के वकील को सुबह10 बजे अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। सुरक्षा कारणों से मामले में सभी अभियुक्तों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया जाएगा।

अदालत अभियुक्तों द्वारा याचिका की स्थिति जानना चाहती है। 17 तारीख को सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका पर सुनवाई होगी। चूंकि अभियुक्त अभी तक अपने कानूनी उपाय का लाभ उठाने के लिए नहीं हैं, इसलिए मामले में सुनवाई से पहले डेथ वारंट पर हस्ताक्षर नहीं किए जा सकते।

पुनर्विचार याचिका पर निर्भाय की मां आशा देवी ने कहा कि अदालत को पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करनी चाहिए, लेकिन याचिका को पहले ही खारिज कर दिया जाना चाहिए था। हमारे पास सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

दिल्ली की एक अदालत ने  निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में सभी दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी। अक्षय कुमार सिंह ने 2017 के फैसले की समीक्षा करने के लिए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई 2018 को मामले में अन्य तीन दोषी मुकेश (30), पवन गुप्ता (23) और विनय शर्मा (24) की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया था। 

23 साल की पारा मेडिकल छात्रा निर्भया के साथ 16-17 दिसंबर 2012 की रात को दक्षिणी दिल्ली में एक चलती बस में 6 व्यक्तियों ने गैंगरेप के बाद सड़क पर फेंक दिया था। गंभीर हालत में पीड़िता को इलाज के लिए सिंगापुर भेजा गया। पीड़िता ने 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

इस मामले के एक आरोपी राम सिंह ने कथित तौर पर तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी। आरोपियों में शामिल एक नाबलिग को किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी ठहराया था। तीन साल के बाद उन्हें रिफॉर्मेशन होम से रिहा कर दिया गया। 
 

 

 

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