Maharashtra Assembly polls: एनसीपी और कांग्रेस के बीच सीटों पर हुआ समझौता, 125-125 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव

देश
Updated Sep 16, 2019 | 18:25 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Maharashtra assembly polls के लिए एनसीपी और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर समझौता हो गया है। दोनों दलों ने 125-125 सीटों पर लड़ने का फैसला किया है जबकि 38 सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ दी है।

sharad pawar
एनसीपी के अध्यक्ष हैं शरद पवार 

मुख्य बातें

  • महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस के बीच सीटों पर समझौता
  • एनसीपी और कांग्रेस दोनों 125-125 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव, 38 सीटें सहयोगी दलों को
  • महाराष्ट्र विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 288 है।

नई दिल्ली। महाराष्ट्र विधानसभा (Maharashtra assembly polls) के लिए चुनावी तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस(congress) और एनसीपी( NCP) में सीटों (Seat Sharing) का बंटवारा हो गया है। दोनों दल 125-125 सीटों पर किस्मत आजमाएंगे जबकि 28 सीटें सहयोगी दलों को छोड़ा है। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। 

सीटों के संबंध में एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार ने घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य में बीजेपी और शिवसेना को सत्ता से बेदखल करने के लिए कांग्रेस और समान विचार वाले छोटे सहयोगी दलों के साथ चुनाव लड़ने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि इस दफा एनसीपी नए चेहरों पर दांव लगाएगी। इसके साथ ये भी कहा कि सीटों को लेकर कांग्रेस के साथ अदला बदली होगी क्योंकि दोनों दलों को मकसद फासिस्ट शक्तियों को सत्ता से दूर करना है। 


पिछले हफ्ते इस संबंध में शरद पवार की सोनिया गांधी से मुलाकात हुई थी। बताया जा रहा है कि दोनों दल ज्यादातर सीटों पर एक बार फिर पुराने चेहरों को मौका देंगे। जबकि कुछ सीटों पर नए चेहरे उतारे जाएंगे। 2014 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 122 सीटों पर जीत हासिल हुई थी जबकि 62 सीटों पर शिवसेना को कामयाबी मिली थी। कांग्रेस और एनसीपी के खाते में 42 और 41 सीटें गई थीं।

एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि मौजूदा समय में केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की नीतियों से हर कोई परेशान है। महाराष्ट्र में आम लोग परिवर्तन का इंतजार कर रहे हैं। राज्य में हर एक तबका बीजेपी और शिवसेना की नीतियों से परेशान है। पिछले पांच वर्षों में दोनों दलों ने जो वादे किये थे वो वादे पूरे नहीं हुए। अति राष्ट्रवाद के नाम पर आम लोगों के मुद्दे से यह सरकार अपना मुंह मोड़ चुकी है और निश्चित तौर पर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे केंद्र और राज्य की फडणवीस सरकार को जवाब देंगे। 

 

 

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