Naxal Attack:छत्तीसगढ़ के कांकेर में नक्सलियों का दुस्साहस तेल टैंकर उड़ाया, तीन की मौत

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Updated Sep 24, 2019 | 16:09 IST | भाषा

Chhattisgarh Naxal Attack: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सलियों ने मंगलवार को विस्फोट कर एक तेल टैंकर को उड़ा दिया, धमाके में तीन लोगों की मौत हो गई।

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प्रतीकात्मक तस्वीर 

रायपुर: कांकेर जिला नक्सल प्रभावित है यहां के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के ताड़ोकी थाना क्षेत्र के कोसरोंडा और तुमापाल गांव के मध्य, पतकालबेड़ा गांव के करीब आज नक्सलियों ने एक तेल टैंकर को विस्फोट से उड़ा दिया। विस्फोट के कारण टैंकर चालक राकेश कोड़ोपी,चालक दुनेश्वर सिंह और हेल्पर अजय कुमार सलाम की मौत हो गई।

अधिकारियों ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस दल भेज गया तथा नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।उन्होंने बताया कि राकेश कोड़ोपी छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के अंतर्गत विश्रामपुरी थाना क्षेत्र का निवासी था। वहीं दुनेश्वर सिंह मध्यप्रदेश के मंडला जिले का तथा अजय कुमार सलाम कांकेर जिले के रावघाट थाना क्षेत्र का निवासी था।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तुमापाल और कोसरोंडा गांव के मध्य रावघाट रेलवे लाइन परियोजना का कार्य चल रहा है। यहां निर्माण कार्य में लगे वाहनों को डीजल आपूर्ति के लिए तुमापाल स्थित सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) कैंप से के.आर इंफ्रास्ट्रक्चर कंस्ट्रक्शन कंपनी का डीजल टैंकर (पिकअप) रवाना हुआ था।

मंगलवार सुबह लगभग 10 बजे जब टैंकर पतकालबेड़ा गांव के करीब पहुंचा तब नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट कर टैंकर को उड़ा दिया। अधिकारियों ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस दल भेजा गया। जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पहुंच गए। इस संबंध में अधिक जानकारी ली जा रही है।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र से लौह अयस्क की आपूर्ति और क्षेत्र के निवासियों को रेल सुविधा देने के लिए दल्लीराजहरा-रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना शुरू की गई है। इसके तहत 235 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का निर्माण होना है।

परियोजना के पहले चरण में दल्लीराजहरा से रावघाट के लिए 95 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। इस मार्ग पर दल्लीराजहरा से लगभग 42 किलोमीटर दूर केवटी गांव तक यात्री गाड़ियों का परिचालन भी शुरू हो गया है। राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि माओवादी इसलिए इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं क्योंकि इससे बस्तर क्षेत्र का तेजी से विकास होगा और माओवादियों की पकड़ ढीली हो जाएगी।

 

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