मोइन कुरैशी मामला: कोर्ट ने सतीश बाबू सना को ED को 5 दिन की रिमांड पर सौंपा

देश
Updated Jul 27, 2019 | 16:21 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने मोइन कुरैशी मामले में सतीश बाबू सना को ईडी को पांच दिन की रिमांड पर सौंप दिया। ईडी ने कोर्ट से सना की 14 दिन रिमांड मांगी थी।

Enforcement Directorate
प्रवर्तन निदेशालय  |  तस्वीर साभार: ANI
मुख्य बातें
  • स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सतीश बाबू सना को ईडी को रिमांड पर सौंपा
  • ईडी ने सना को मोइन कुरैशी मामले में गिरफ्तार किया था
  • सना पहले ईडी का गवाह था, जिसे अब आरोपी बनाया गया है

नई दिल्ली: स्पेशल केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कोर्ट ने मोइन कुरैशी मनी लॉन्डरिंग मामले सतीश बाबू सना को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पांच दिन रिमांड पर सौंप दिया है। ईडी ने हालांकि  कोर्ट से हैदराबाद के कारोबारी सना की 14 दिन की रिमांड मांगी थी। ईडी ने सना को शुक्रवार देर रात गिरफ्तार किया था। सना अब तक मांस निर्यातक मोइन कुरैशी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी का गवाह था, जिसे अब आरोपी बनाया गया है। सना के आरोपों से ही पिछले साल सीबीआई के शीर्ष अधिकारियों के बीच युद्ध छिड़ गया था।

पीटीआई के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि बाबू को मनी लॉन्डरिंग निवारण कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों के ईडी ने शुक्रवार देर रात गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि बाबू से कुछ घंटों तक पूछताछ की गई और जांच में 'सहयोग ना करने' पर उसे हिरासत में ले लिया गया। एजेंसी कुछ वित्तीय लेन-देन समेत कुरैशी के साथ उसके संपर्क को संदिग्ध मान रही है और इसलिए वह उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है। सूत्रों ने आरोप लगाया कि वह रिश्वत के एक मामले में शामिल है और उसने कुरैशी को अवैध रूप से धन दिया है। 

सीबीआई ने एजेंसी में नंबर एक की हैसियत रखने वाले तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और नंबर दो माने जाने वाले राकेश अस्थाना के बीच तनातनी के दौरान सना की ही शिकायत पर अपने पूर्व विशेष निदेशक अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर आपराधिक एफआईआर दर्ज की थी। सना ने एक मजिस्ट्रेट के समक्ष आपराधिक दंड संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया था जिसके बाद सीबीआई ने अस्थाना के खिलाफ एफआईआ दर्ज की। 

सीबीआई को दिए अपने बयान में बाबू ने कहा था कि उसने कुरैशी से जुड़ी जांच में किसी तरह की कार्रवाई ना करने के लिए अस्थाना को दो करोड़ रुपए की रिश्वत दी थी। यह धन राशि दिसंबर 2017 से लेकर 10 महीने की अवधि में दी गई। सना ने जब अस्थाना पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया था तब अस्थाना के नेतृत्व में सीबीआई का विशेष जांच दल (एसआईटी) उससे पूछताछ कर रहा था।

सना की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सीबीआई ने अस्थाना और एजेंसी के कुछ अधिकारियों समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में अस्थाना ने तत्कालीन सीबीआई निदेशक वर्मा पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था और बाबू को बचाने और एसआईटी को उसके खिलाफ कार्रवाई ना करने देने के आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई।

 

 

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