Abdul Kalam: मिसाइल मैन, जिन्‍होंने सपनों को दी नई उड़ान और FAIL शब्‍द की गढ़ी नई परिभाषा

देश
Updated Oct 15, 2019 | 09:09 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Missile Man APJ Abdul Kalam: देश के पूर्व राष्‍ट्रपति एपीजे अब्‍दुल कलाम का जीवन आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जिन्‍होंने बताया कि समस्‍याओं को कभी अपने सपनों की राह में बाधा न बनने दें।

APJ Abdul Kalam
एपीजे अब्‍दुल कलाम (फाइल फोटो)  |  तस्वीर साभार: BCCL

मुख्य बातें

  • एपीजे अब्‍दुल कलाम 2002-2007 तक देश के 11वें राष्‍ट्रपति रहे
  • भारत के मिसाइल प्रोगाम में उनका अतुलनीय योगदान रहा है
  • इसकी वजह से उन्‍हें 'मिसाइल मैन' के नाम से भी जाना जाता है

नई दिल्‍ली : मिसाइल मैन के नाम से मशहूर देश के पूर्व राष्‍ट्रपति एपीजे अब्‍दुल कलाम की आज (मंगलवार, 15 अक्‍टूबर) 88वीं जयंती है। भारत में रक्षा विज्ञान, खासकर मिसाइल कार्यक्रम को ऊंचाई तक ले जाने में उनका योगदान अतुलनीय है। विक्रम साराभाई के नेतृत्‍व में उन्‍होंने विज्ञान की बारीकियां सीखी, जो ताउम्र उनके जीवन का हिस्‍सा रहा। उनका जीवन आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

तमिलनाडु के रामेश्‍वरम में 15 अक्‍टूबर, 1931 को पैदा हुए कलाम ने कई चुनौतियों को पार करते हुए जिस ऊंचाई को छुआ, वह अपने आप में मिसाल है। जीवनभर जो हौसला और आगे बढ़ने का सपना उन्‍होंने दिखाया, वह आज भी अनुकरणीय है। गरीबी में कभी रेलवे स्‍टेशनों पर अखबार बेचने वाले कलाम ने अपने हालातों को कभी अपने सपनों की राह में बाधा नहीं बनने दिया और यही वजह है कि वह आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।

कलाम का पूरा जीवन देश सेवा और मानवता के लिए समर्पित रहा। उनका यह फलसफा आज भी मशहूर है और छात्रों के लिए खास तौर पर प्रेरक है कि 'सपने वे नहीं होते, जो नींद में देखे जाएं, बल्कि सपने वे होते हैं जो नींद नहीं आने दें।' उन्‍होंने फेल (FAIL) शब्‍द की एक अलग पर‍िभाषा गढ़ी और बताया कि इससे हार मानने की जरूरत नहीं है, क्‍योंकि यह वास्‍तव में 'First attempt in learning' यानी सीखने के क्रम में पहला प्रयास होता है।

उन्‍होंने बताया कि सफलता का कोई शॉर्टकर्ट नहीं होता है और अगर आप सूरज की तरह चमकना चाहते हैं तो पहले उसकी तरह तपना भी होगा। करीब चार दशकों तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और ISRO में वैज्ञानिक के तौर पर कार्यरत रहे कलाम ने बताया कि असफलता से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत ही है।

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