हैप्पी, हैप्पी सब हैप्पी है, हैप्पीनेस क्लास में मेलानिया ट्रंप

देश
ललित राय
Updated Feb 25, 2020 | 16:26 IST

डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी मेलानिया ने दिल्ली के हैप्पीनेस स्कूल का दौरा किया। वो सिर्फ खुश नजर नहीं आईं बल्कि अपनी खुशी का इजहार किया।

हैप्पीनेस स्कूल देखकर हैप्पी हुईं मेलानिया ट्रंप, काश सभी स्कूल वैसे ही होते
हैप्पीनेस स्कूल का मेलानिया ट्रंप ने किया दौरा 

मुख्य बातें

  • दिल्ली में हैप्पीनेस स्कूल का फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप ने दौरा किया
  • पारंपरिक तौर तरीकों से इतर पढ़ाई पर दिया जाता है खास ध्यान
  • दिल्ली के सीएम को आमंत्रित न किए जाने पर आप ने किया था ऐतराज

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स डोनाल्ड ट्रंप ने पत्नी मेलानिया संग ताज का दीदार किया और विजिटर बुक में लिखा कि यह भारतीय कला, संस्कृति, प्रेम और विविधता की अनोखी कृति है। आगरा से ट्रंप दंपति का कारवां दिल्ली में दाखिल हुआ। पहले दिन तो ट्रंप दंपति ने भारत के कलाकौशल का दीदार किया तो दिल्ली में मेलानिया हैप्पीनेस क्लास में पहुंची जहां वो शिक्षक की भूमिका में थीं। मेलानिया को क्लास की खूबसूरती पसंद आई तो वाह वाह कर बैठीं। हैप्पीनेस क्लास के हर एक कोने को अपनी खास निगाह से देखा, क्लास पर मेलानियां फिदां थी तो बच्चे मेलानियां पर फिदा थे। शिक्षकाएं उन कामयाबियों को एक एक कर बता रही थीं जिसकी वो खुद गवाह थीं। लेकिन जनाब एक विवाद भी था।

विवाद कुछ यूं था कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को भो फर्स्ट लेडी मेलानिया के साथ दौरा करना था। लेकिन समय कुछ यूं बदला या बदल दिया गया कि जिस लिस्ट में पहले इन दोनों बड़े नाम शामिल थे वो गायब हो चुके थे। बात किसी और पार्टी की होती तो शायद बयान आता या नहीं आता । लेकिन बात आम आदमी पार्टी की थी तो ऐसा कैसे हो सकता था कि साजिश वाला बयान न आए।


साजिश वाला बयान आप के किसी आम शख्स की जुबां से नहीं निकली बल्कि डिप्टी सीएम खुद मैदान में उतरे और अपने चिर परिचित अंदाज में मोदी सरकार को कोसा जैसा कि वो पहले भी करते रहे हैं। भारत सरकार की तरफ से बयान आया कि किसी का नाम काटा नहीं गया। लेकिन वजन के तराजू पर केंद्र सरकार का बयान हल्का निकला। 


अब तो सिर्फ इंतजार इस बात का था कि कोई अमेरिकन ही यह बात कहे कि क्यों दिल्ली के सीएम और डिप्टी सीएम  को मेलानिया के साथ हैप्पीनेस क्लास में शामिल होने की इजाजत नहीं दी जा रही है। वो दिन और समय आया जब अमेरिकन एंबैसी की तरफ से लिखित बयान में कहा गया कि मेलानिया व्यक्तिगत हैसियत से स्कूल को देखना और समझना चाहती थीं, लिहाजा किसी राजनीतिक शख्स के जाने का औचित्य नहीं है।

अब देखिए मोदी सरकार जिन दृष्टातों का हवाला दे रही है वो केजरीवाल एंड कंपनी के तराजू पर खरी नहीं उतरी। लेकिन बात अमेरिका की थी जिसे लेकर लोगों के विरोध के सुर जरूरत के हिसाब से बदलते रहते हैं तो दिल्ली के सीएम और डिप्टी सीएम साहब का बदला जो पहले मोदी सरकार की साजिश नजर आ रही थी अप फर्स्ट लेडी के लिए बनाई गई औपचारिकताओं को पूरा करने का प्रोटोकॉल था। 

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