अनुच्छेद 35A के नाम पर दुकान चला रही हैं महबूबा मुफ्ती?

देश
Updated Jul 29, 2019 | 01:07 IST | रामानुज सिंह

अनुच्छेद 35A, अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर में सैनिकों की तैनाती को लेकर महबूबा मुफ्ती के रूख का वहां के नेता और एक्टिविस्ट ने जोरदार विरोध किया है।

Mehbooba Mufti
Mehbooba Mufti  |  तस्वीर साभार: ANI
मुख्य बातें
  • मुफ्ती ने कहा, 'उनकी पार्टी अनुच्छेद 35A और अनुच्छेद 370 को बचाने के लिए लड़ती रहेगी
  • नेशनल पैंथर्स पार्टी भीम सिंह ने कहा, अनुच्छेद 35A के खत्म करने का विरोध कर रहे हैं, वे सत्ता के लालची हैं
  • महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त बलों को तैनात करने से लोगों में संदेह और डर मनोविकृति पैदा कर दी है
  • कश्मीर के एक एक्टिविस्ट ने कहा कि घाटी के आम लोगों को भारतीय सैनिकों की मौजूदगी से कोई परेशानी नहीं है, वे खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती के अनुच्छेद 35A पर उनके रुख पर नाराजगी जताते हुए नेशनल पैंथर्स पार्टी (एनपीपी) के संस्थापक भीम सिंह ने रविवार को कहा कि महबूबा दुकान चला रही हैं, सत्ता की लालची हैं और राज्य के लोगों की परवाह नहीं है। उन्होंने कहा कि मुफ्ती और सभी नेता जो अनुच्छेद 35A के खत्म करने का विरोध कर रहे हैं, वास्तव में सत्ता के लालची हैं। वे लोगों का शोषण करना चाहते हैं और सत्ता के खेल में बने रहते हैं। जम्मू और कश्मीर के लोगों की चिंता नहीं है। वे दुकानें चला रहे हैं।' सिंह ने कहा, 'मैं भी जम्मू-कश्मीर का नागरिक हूं और अनुच्छेद 35A मेरे मानवाधिकारों पर एक हमला है।' उन्होंने कहा, अनुच्छेद 35A को 1953 में अध्यादेश के माध्यम से पेश किया गया था। यह छह महीने में खत्म हो जाना चाहिए था लेकिन 64 साल तक चला।'

मुफ्ती ने रविवार को कहा था कि उनकी पार्टी की प्राथमिकता कश्मीर की पहचान और संविधान के अनुच्छेद 35 ए और अनुच्छेद 370 की वैधता का बचाव करना है। उन्होंने पहले जोर देकर कहा था कि जम्मू और कश्मीर एक राजनीतिक मुद्दा है। इस मुद्दे का कोई सैन्य समाधान नहीं है। इसे तब तक हल नहीं किया जा सकता है जब तक आप पाकिस्तान और यहां के लोगों से बात नहीं करते। आप सैनिकों का इस्तेमाल करके लेकिन अस्थायी शांति ला सकते हैं लेकिन स्थायी शांति के लिए वार्ता के माध्यम से कश्मीर समस्या का हल निकालने की जरूरत है।

गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की अतिरिक्त 100 कंपनियों की तैनाती का आदेश दिया है ताकि जम्मू और कश्मीर में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सीआई ग्रिड को मजबूत किया जा सके। इस पर महबूबा ने शनिवार को कहा था कि जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त बलों को तैनात करने के केंद्र के कदम ने लोगों में संदेह और डर मनोविकृति पैदा कर दी है। कश्मीर के एक्टिविस्ट ललित अंबरडार ने रविवार को जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त बलों की तैनाती पर पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की आपत्ति पर सवाल उठाया और कहा कि घाटी के आम लोग ग्राउंड पर अधिक सैनिक होने से सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे समझ में नहीं आता, महबूबा मुफ्ती कश्मीर घाटी में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती पर आपत्ति क्यों जता रही हैं। सैनिकों को केवल देश के एक कोने से दूसरे कोने में तैनात किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि घाटी के आम लोगों को भारतीय सैनिकों की मौजूदगी से कोई समस्या नहीं है। वास्तव में वे सुरक्षित महसूस करते हैं। अंबरडार ने कहा कि सैनिक अमरनाथ यात्रा के श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कश्मीर में तैनात किया गया है। यह दुनिया में सबसे अधिक चपेट में आने वाला तीर्थयात्रा है। अंबरडार ने कहा कि अगर अगर कश्मीर में स्थिति को नियंत्रित नहीं किया जाता है, तो यह देश के हर कोने में फैल जाएगा। इस मुद्दे को हल करने के लिए,  हमें अनुच्छेद 35 ए और अनुच्छेद 370, और एक अलग केंद्र शासित राज्य लद्दाख को खत्म करने की आवश्यकता है। 

अनुच्छेद 35A जम्मू और कश्मीर के लोगों के अधिकारों, राज्य सरकार द्वारा रोजगार, संपत्ति और सहायता के संबंध में रक्षा करता है जबकि अनुच्छेद 370 राज्य की संप्रभुता को विशेष दर्जा प्रदान करता है और शासन के लिए कानून बनाने की एक अलग व्यवस्था की शक्ति देता है। 

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