महाराष्ट्र में दिखेगा कर्नाटक पार्ट-2!, फिलहाल सियासत की बिसात पर भाजपा ने मारी बाजी

देश
Updated Nov 24, 2019 | 17:50 IST

Maharashtra : गठबंधन सरकार के गठन में कांग्रेस के लुंजपुंज रवैये को पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी के बयान से समझा जा सकता है। सिंघवी ने कहा कि पार्टी ने बैठकों में अपना बहुत सारा समय गंवा दिया।

Maharashtra : BJP's masterstroke leaves Shiv Sena NCP and Congress in a fix महाराष्ट्र में कर्नाटक पार्ट-2!, सियासत की बिसात पर भाजपा ने मारी बाजी
Maharashtra : देवेंद्र फड़णवीस ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ।  |  तस्वीर साभार: ANI

मुख्य बातें

  • शनिवार सुबह देवेंद्र फड़णवीस ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, अजीत पवार बने डिप्टी सीएम
  • अजीत पवार के कदम से शिवसेना के सरकार बनाने के प्रयासों को लगा बड़ा झटका
  • सुप्रीम कोर्ट में परुंचा है मामला, अब शीर्ष अदालत के फैसले पर टिकी है सबकी नजर

शुक्रवार की शाम राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार का बयान सुनने के बाद लगा कि महाराष्ट्र में सरकार का गठन हो जाएगा और शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार अगले दो एक दिनों में सरकार बनाने का दावा पेश कर देगी लेकिन अगली सुबह महाराष्ट्र से खबर आई उसने सभी को चौंका दिया। सुबह आठ बजे तक देवेंद्र फड़णवीस मुख्यमंत्री और अजीत पवार उप-मुख्यमंत्री पद का शपथ ले चुके थे। राष्ट्रपति शासन तड़के हट चुका था। राकांपा से बगावत कर अजीत पवार भाजपा के साथ खड़े हो जाएंगे इसकी किसी ने परिकल्पना नहीं की थी। खुद शरद पवार अपने भतीजे के दांव से हैरान हैं। भाजपा इतना बड़ा उलटफेर कर देगी शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी तीनों पार्टियां इससे बेखबर रहीं। किसी को उम्मीद नहीं थी कि सरकार बनाने के लिए अपने पैर पीछे खीच चुकी भाजपा 'प्लान बी' पर काम कर रही थी।  

सरकार बनाने से भाजपा के इंकार के बाद शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस को कहीं न कहीं ऐसा लगा कि चूंकि भाजपा मैदान से बाहर हो गई है इसलिए गठबंधन सरकार पर फैसला या 'डील' इत्मीनान से की जाए। उन्होंने गठबंधन सरकार के लिए कोई जल्दबाजी और तत्परता नहीं दिखाई। गठबंधन सरकार में सत्ता का 'अध्यधिक फायदा' लेने की एनसीपी और कांग्रेस की ज्यादा प्रबल मंशा की वजह से तीनों दल जल्द किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए। अगर ऐसा नहीं होता और तीनों दल सरकार गठन पर गंभीर रहते तो इस पर बात बहुत पहले बन जानी थीं लेकिन इस बारे में बैठकें ही होती रहीं, सरकार गठन के लिए कोई पहल नजर नहीं आई। 

गठबंधन सरकार के गठन में कांग्रेस के लुंजपुंज रवैये को पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी के बयान से समझा जा सकता है। सिंघवी ने कहा कि पार्टी ने बैठकों में अपना बहुत सारा समय गंवा दिया। जो काम तीन दिन में हो जाना चाहिए था वह तेरह दिनों तक चलता रहा। भाजपा मौके की तलाश में थी और उसे मौका मिल गया। बात इतनी भर नहीं है शिवसेना की तरफ से संजय राउत एनसीपी प्रमुख से कई दफे मिले लेकिन एनसीपी प्रमुख पवार ने शिवसेना को कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। पवार के बार-बार के बदलते बयान ने सियासी समीकरण पर असमंजस की स्थिति बनाए रखी और जब उन्होंने शुक्रवार शाम एक ठोस बयान दिया तो बहुत देर हो चुकी थी। भाजपा सियासत की बिसात पर अपना मोहरा चल चुकी थी और अजीत पवार अपने दल-बल के साथ भगवा पार्टी का दामन थामने का मन चुका थे। 

महाराष्ट्र में इस बड़े उलटफेर के केंद्र में अगर कोई है तो वह हैं अजीत पवार। ऐसी क्या बात है कि अजीत को अपने चाचा शरद पवार को अधर में छोड़ने की जरूरत पड़ी। जबकि गठबंधन सरकार में एनसीपी की भूमिका अहम रहने वाली थी। शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस के बीच इस बात पर सहमति बनी थी कि मुख्यमंत्री पद शिवसेना को जाएगा और दो उप मुख्यमंत्री एनसीपी और कांग्रेस से होंगे। अजीत पवार के इस फैसले के पीछे उनकी खुद की महात्वाकांक्षा हो सकती है। शरद पवार एनसीपी की बागडोर अपनी बेटी सुप्रिया सुले को सौंपना चाहते हैं जबकि अजीत महाराष्ट्र की राजनीति में ज्यादा सक्रिय रहे हैं और राज्य की राजनीति अपना रसूख और पकड़ कमजोर होता नहीं देखना चाहते। राजनीति की बारीकियां उन्होंने अपने चाचा से ही सीखी हैं। कब और कैसे राजनीतिक दांव खेलना है यह बात उन्हें किसी और से सीखनी नहीं है। अजीत पवार के इस कदम के पीछे उनका अपना राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करने का मकसद हो सकता है। 

कुल लोग दबी जुबान में यह भी चर्चा कर रहे हैं कि अजीत पवार इतना बड़ा कदम नहीं उठा सकते हैं। कहीं न कहीं शरद पवार की हामी जरूर रही होगी। तो क्या यह समझा जाए कि संसद में पीएम मोदी ने एनसीपी की जो प्रशंसा की और शरद पवार के साथ उनकी मुलाकात का इस राजनीतिक उलटफेर से संबंध है? क्या एनसीपी की शिवसेना-कांग्रेस के समानांतर भाजपा से भी बातचीत चल रही थी? इस बात पर कोई संशय नहीं है कि शरद पवार राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं। संजय राउत ने भी कहा है कि शरद पवार को समझना आसान काम नहीं है। बहरहाल, महाराष्ट्र का राजनीतिक संकट सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पहुंच चुका है। महाराष्ट्र में कर्नाटक जैसी तस्वीर उभरती दिख रही है। फड़णवीस सरकार का भविष्य अब शीर्ष अदालत के फैसले पर टिका है।

डिस्क्लेमर: इस प्रस्तुत लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं और टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।

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