Year ender 2019: मोदी 2.0 के आगाज के साथ इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए कुछ खास फैसले

देश
ललित राय
Updated Dec 30, 2019 | 17:21 IST

2019 अपने साथ तमाम यादों को समेटते हुए अंतिम सफर पर है, देश और दुनिया को 2020 के आगाज का इंतजार है। लेकिन इसके बीच कुछ ऐसी घटनाओं ने दस्तक दी जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुकी है।

Year ender 2019: मोदी 2.0 के आगाज के साथ इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए कुछ खास फैसले
2019 में लिए गए कुछ महत्वपूर्ण फैसले जो इतिहास में हो गये दर्ज 

नई दिल्ली: 2020 का आगाज होने में अब कुछ दिन ही बचे हैं, हर एक साल अपने पीछे खट्टी मीठी यादें छोड़ जाता है। यादों की पोटली में वो तमाम सारी घटनाएं कैद हो जाती हैं जो समय समय पर याद आती रहती है। 2019 का जब आगाज हुआ तो भारत को एक बड़े चुनाव का गवाह बनना था। सवाल यही था कि क्या जिस तरह से यूपीए सरकार ने अपने दो कार्यकाल को पूरा किया था, ठीक उसी ट्रेंड को जारी रखते हुए मोदी सरकार दोबारा सरकार में आएगी या कोई आर दिल्ली की सत्ता पर काबिज होगा। यहां पर हम भारत में घटित उन सभी घटनाओं का जिक्र करेंगे जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुकीं हैं। 

मोदी 2.0
नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार चुनावी मैदान में थी। उसके ठीक पहले बालाकोट एयर स्ट्राइक के जरिए भारतीय फौज ने पाकिस्तान को बता दिया कि अब खैर नहीं। मोदी सरकार की इस कार्रवाई पर घरेलू और बाहरी दोनों मोर्चों पर जबरदस्त हो हल्ला मचा था। सवाल दागे जा रहे थे कि मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने महज चुनाव जीतने के लिए कुपवाड़ा में आतंकी हमले की जमीन तैयार की और बालाकोट के जरिए श्रेय लेने की कोशिश की। ये बात अलग है कि नरेंद्र मोदी ये कहते रहे कि राजनीति के चश्मे से कुछ लोग सभी घटनाओं को देखते हैं और उसका जवाब जनता देगी। इस तरह के माहौल के बीच सरकार और विपक्ष दोनों की किस्मत ईवीएम में कैद हो चुकी थी। ईवीएम की पेटी जब खुली तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। एनडीए, 350 के आंकड़े के पार कर चुकी थी और बीजेपी अपने दम पर 303 सीट पर कब्जा जमाने में कामयाब हो गई और इस तरह से मोदी 2.0 का आगाज हुआ।

तीन तलाक
मोदी सरकार शपथ ग्रहण के बाद अपने इरादे साफ कर चुकी थी। एनडीए सरकार में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने साफ कर दिया कि अब सरकार उस दिशा में आगे बढ़ेगी जिसका इंतजार मुस्लिम समाज की महिलाओं को दशकों से था। इशारा बिल्कुल स्पष्ट था कि तीन तलाक पर फैसला आर पार का होगा। दरअसल एनडीए पार्ट वन में भी तीन तलाक का बिल लोकसभा से पारित हो चुका था। लेकिन राज्यसभा में संख्या बल की चुनौती थी क्योंकि मोदी सरकार उच्च सदन में अल्पमत में थी। मोदी 2.0 में असली परीक्षा राज्यसभा में ही थी। राज्यसभा में राजनीतिक दलों की तरफ से गरमागरम बहस की गई। सबकी नजर इस बात पर टिकी थी कि क्या बिल पारित हो पाएगा। लेकिन जेडीयू के रणनीतिक कदम से बीजेपी की राह आसान हो गई और तीन तलात बिल पारित होने के बाद कानून की शक्ल में आ गया।

अनुच्छेद 370
पांच अगस्त से पहले जम्मू-कश्मीर भारत का एक राज्य हुआ करता था जिसे अनुच्छेद 370 के जरिए विशेष दर्जा हासिल था। पांच अगस्त से पहले जब घाटी में सुरक्षा बलों की संख्या में इजाफा हुआ तो हर किसी के जेहन में ये बात आने लगी कि मोदी सरकार कुछ बड़ा फैसला करने वाली है। पांच अगस्त को लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री मे कहा कि अनुच्छेद 370 की निम्नलिखित धाराओं को समाप्त किया जाता है तो ये साफ हो गया कि जम्मू-कश्मीर भी अब देश के दूसरे हिस्सों की तरह होगा। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश घोषित कर दिया गया। इस विषय पर भी यही सवाल था कि राज्यसभा में क्या सरकार अपने इस एजेंडे को पारित करा पाने में कामयाब होगी। लेकिन सरकार ने आसानी से इस बिल को पारित करा लिया। दोनों सदनों से बिल के पारित होने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो उपबंध कश्मीर और भारत के बीच दीवार थी उसे गिरा दिया गया है। 

करतारपुर गलियारा
करतापुर गलियारे को भारतीय श्रद्धालुओं को नवंबर के पहले हफ्ते में पाकिस्तान की तरफ से खोल दिया गया। इस विषय पर पाकिस्तान की तरफ से तमाम अड़चनें लगाई गईं। लेकिन अंत में इमरान खान सरकार ने साफ किया इस गलियारे से दोनों देशों के रिश्तों में सुधार आएगा। ये बात अलग है कि इस गलियारे को लेकर पाकिस्तान की नीयत पर सवाल भी उठे। पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने साफ किया कि हमें पाकिस्तान के बीते इतिहास को ध्यान में रखते हुए सतर्कता बरतने की जरूरत है। 

राम मंदिर
9 नवंबर के ऐतिहासिक दिन को कोई कैसे भूल सकता है। देश की सर्वोच्च न्यायालय को इस ऐतिहासिक विवाद का निपटारा करना था जिसे लेकर समाज के हर वर्ग के साथ दुनिया को भी इंतजार था। पांच जजों की पीठ ने आम सहमति से कहा कि विवादित 2.77 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक राम लला का ही है और इसके साथ ही अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए उचित जगह पर पांच एकड़ जमीन देने का फैसला भी सुनाया। इस फैसले की खास बात ये थी कि देश के सभी तबकों से खुले दिल से अदालती निर्णय को स्वीकारा और सद्भाव का परिचय दिया। पीएम नरेंद्र मोदी ने फैसले पर कहा कि यह समाज के किसी भी वर्ग की ना तो जीत है और ना ही हार है। यह न्यायिक जीत है जिसे सभी देशवासियों ने संजीदगी के साथ स्वीकार किया। 

दरअसल ये तमाम बड़े फैसले या घटनाक्रम सिर्फ भारत की राजनीति को ही प्रभावित करने वाले नहीं थे। दुनिया के मुल्कों को भी अहसास हो गया कि 21वीं सदी का भारत अब अलग है, वो बड़े से बड़े फैसले कर सकता है। इन तमाम घटनाक्रमों से जुड़ी खट्टी मीठी यादें है जो बरबस याद आती है। लेकिन एक बात तो साफ हो गई कि भारतीय जनमानस बड़े से बड़े फैसलों पर न सिर्फ अपनी मुहर लगाता है, बल्कि नजीर भी लिखता है। 

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