कर्नाटक का नतीजा सबको है पता, बस इंतजार है ऐलान का 

देश
Updated Jul 18, 2019 | 23:07 IST | ललित राय

कर्नाटक में 2018 में चुनावी नतीजों के बाद विधानसभा की जो तस्वीर उभरी थी उससे साफ था कि सियासी संकट से यह राज्य दो चार होता रहेगा।

karnataka political crisis
राजनीति के जाल में फंसा है कर्नाटक 

मुख्य बातें

  • कर्नाटक विधानसभा में कुल विधायकों की संख्या 224 है।
  • कांग्रेस , जेडीएस और निर्दलीय समेत 19 विधायकों का इस्तीफा
  • 105 विधायकों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी

नई दिल्ली। Karnataka political crisis 2018 के विधानसभा चुनाव में कर्नाटक में बीजेपी का कमल खिला। लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 113 के आंकड़ों से बीजेपी पीछे रह गई थी। पारंपरिक तौर पर सबसे बड़ी पार्टी का हवाला देते हुए बीजेपी ने सरकार बनाने का दावा पेश किया और बी एस येदियुरप्पा ने सरकार भी बना ली। ये बात अलग है कि कांग्रेस और जेडीएस के नेता कहते रहे कि संख्या बल से साफ है कि बीजेपी के पास बहुमत नहीं है। जबकि कांग्रेस और जेडीएस दोनों दल 117 विधायकों के साथ स्थिर सरकार दे सकते हैं। उस दौरान भी कुछ विधायकों को लेकर सियासत गरम थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अदालत का फैसला ये था कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत राज्यपाल, बीजेपी को सरकार बनाने के लिए न्यौता दे सकते हैं। लेकिन ये अच्छा होगा कि बी एस येदियुरप्पा सरकार शपथ लेने के एक हफ्ते के अंदर सदन में विश्नासमत हासिल करे। येदियुरप्पा सरकार विश्वासमत हासिल करने के लिए एक महीने का समय चाहती थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने समय देने से इनकार कर दिया था।

कर्नाटक में विधायकों की जो गणित थी उससे साफ था कि येदियुरप्पा सरकार हारी हुई जंग लड़ रही है। येदियुरप्पा, सदन में विश्वासमत हासिल के लिए सदन में दाखिल हुए और कर्नाटक की जनता से मार्मिक अपील करते हुए सच्चाई को समझते हुए इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद ये कांग्रेस और जेडीएस की सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया। 80 विधायकों के साथ कांग्रेस ने 37 विधायकों वाली जेडीएस को समर्थन देने का फैसला किया और कर्नाटक का ताज एच डी कुमारस्वामी के सिर बंध गया। 

एच डी कुमारस्वामी, कर्नाटक के सीएम बन चुके थे। लेकिन सरकार गठन के महीने भर बाद ही उनकी पीड़ा जगजाहिर हो गई। वो समय समय और अलग अलग मंचों पर अपनी परेशानी का इजहार करते रहे। उन्होंने कहा कि वो विषपान कर सरकार चला रहे हैं। उनके निशाने पर कांग्रेस के नेता हुआ करते थे। कई मंचों पर कुमारस्वामी रोते हुए नजर आए। वो कहते थे कि कर्नाटक की जनता के लिए वो सभी तरह के अपमान को सहने के लिए तैयार हैं। लेकिन 2019 की शुरुआत में उत्तर कर्नाटक का मुद्दा गरम हो गया। बीजेपी के विधायकों के साथ साथ कांग्रेस के विधायक भी ये कहने लगे कि कुमारस्वामी सरकार उत्तर कर्नाटक की उपेक्षा कर रही है। तरह तरह के आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच कांग्रेस के 10 और जेडीएस के तीन बागी विधायकों ने इस्तीफा दे दिया और मुंबई की राह पकड़ ली। बागी विधायकों की कतार में कांग्रेस के तीन और विधायकों के साथ साथ दो निर्दलीय विधायक भी आ गए।

कांग्रेस और जेडीएस की तरफ से आरोप लगाया गया कि बीजेपी धनबल के सहारे सरकार को गिराने की कोशिश कर रही है। ये बात अलग है बीजेपी इनकार करती रही। बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ रुख किया और कहा कि स्पीकर संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सुना और बीच का फैसला दिया। उदाहरण के तौर पर स्पीकर बागी विधायकों को सदन की कार्यवाही में शामिल होने का दबाव नहीं बना सकते हैं और स्पीकर पर अदालत इस्तीफे को स्वीकार करने के संबंध में दबाव नहीं बना सकती है। 

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इन सबके बीच गुरुवार को सदन में शक्ति परीक्षण के लिए एच डी कुमारस्वामी सरकार ने प्रस्ताव पेश किया और सदन में बहस का दौर शुरू हुआ। लेकिन बागी विधायक सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए। बीजेपी की तरफ से ये कहा गया कि चर्चा के बाद गुरुवार को ही विश्वासमत पर मतदान होना चाहिए। लेकिन स्पीकर ने वोटिंग की मांग को नकार दिया और सदन की कार्यवाही शुक्रवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इसके विरोध में बीजेपी के विधायक विधानसभा में धरने पर बैठे। उनका कहना है कि विधायक विश्वासमत पर वोटिंग तक धरने पर ही बैठे रहेंगे। 

अगर कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर को देखें तो 224 सदस्यों वाली विधानसभा में 105 विधायकों के साथ बीजेपी अभी भी सबसे बड़ी पार्टी है। लेकिन कांग्रेस और जेडीएस की संख्या में कमी आ चुकी है। 19 विधायकों की गैरमौजूदगी की वजह से विधानसभा में सदस्यों की संख्या घटकर 205 हो गई है। इस आंकड़े के मुताबिक किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 103 विधायकों का समर्थन चाहिए। लेकिन विश्वास के इस जादुई आंकड़े से कांग्रेस और जेडीएस काफी दूर हैं। इसका अर्थ ये है कि यह सिर्फ समय की बात है कि कुमारस्वामी सिर्फ कितने दिन तक सीएम पद की कुर्सी पर विराजमान रहेंगे।

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