JNU violence: बुजदिल लोग कैंपस में दाखिल हुए, ओवैसी बोले- दिल्ली पुलिस ने सुरक्षित रास्ता दिया

देश
Updated Jan 06, 2020 | 12:40 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

जेएनयू हिंसा मामले में अलग अलग राजनीतिक दलों की तरफ से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि मौजूदा केंद्र सरकार छात्रों और शिक्षकों के प्रति असिहष्णु है।

JNU violence पर विपक्षी दल भड़के, लोकतंत्र में विरोधी आवाज को दबाने की कोशिश
जेएनयू हिंसा पर अलग अलग दलों की प्रतिक्रिया 

मुख्य बातें

  • जेएनयू हिंसा में 25 छात्र घायल, नकाबपोशों ने कैंपस में की थी गुंडागर्दी
  • विपक्षी दलों ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर साधा निशाना, गुजरात मॉडल का किया जिक्र
  • बीएसपी मुखिया मायावती ने न्यायिक जांच की मांग की

नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। रविवार को कुछ नकाबपोश कैंपस में दाखिल हुए और जबरदस्त तांडव किया जिसमें 20 छात्र घायल हुए हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वो जल्द ही एफआईआर दर्ज करेगी। इन सबके बीच राजनीतिक दलों की तरफ से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं जिन्हें जानना और समझना जरूरी है। 

ये है राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

  • दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल का कहना है कि जेएनयू में जिस तरह से महिला छात्रों को निशाना बनाया गया वो शर्मनाक है, आयोग ने इस संबंध में दिल्ली पुलिस को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है। 
  • एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि वो हिंसा की निंदा करते हैं, इसमें संदेह नहीं है कि जो लोग सत्ता में उनकी तरफ से हरी झंडी दी गई। चेहरे को ढंक कर कायराना अंदाज में कुछ लोगों विश्वविद्यालय में दाखिल होने की इजाजत दी गई। सबसे बुरी बात तो ये है कि वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस ने उत्पातियों को सुरक्षित रास्ता मुहैया कराया।                  
  • पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि जेएनयू में जो कुछ हुआ वो शर्मनाक और निंदनीय है। बीजेपी के लोगों ने गुंडों को जेएनयू में भेज दिया। पुलिस की तरफ से किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। आखिर ये सब क्या हो रहा है। लोकतंत्र में सरकारें आएंगी और जाएंगी लेकिन शिक्षण संस्थानों के माहौल को खराब करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।                          
  • केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि वो जेएनयू में हिंसा की निंदा करते हैं, इस मामले की जांच की जरूरत है, कांग्रेस, वाम दल और आम आदमी पार्टी से जुड़े लोग इस विषय पर राजनीति करने के साथ ही देश भर के विश्वविद्यालयों के माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।                                                                                                                                            
  • केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि जेएनयू हिंसा मामले में जांच शुरू हो चुकी है, लिहाजा उनका इस विषय पर बोलना सही नहीं होगा। लेकिन विश्वविद्यालयों को राजनीति का अखाड़ा बनाने से बाज आना चाहिए। राजनीति के लिए छात्रों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
  • केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जेएनयू हिंसा के लिए वाम दलों से जुड़े छात्रों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वाम दलों से जुड़े संगठनों से विश्वविद्यालय को गुंडागर्दी का अखाड़ा बना दिया है।                                                                                   
  • कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने सवाल किया है कि आखिर कैसे नकाबपोश लोग विश्वविद्यालय कैंपस में दाखिल हो गए। वाइस चांसलर क्या कर रहे थे। पुलिस के लोग बाहर क्यों खड़े थे। गृहमंत्री क्या कर रहे थे। ये सब ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब नहीं हैं, यह षड़यंत्र है, इसमें जांच की जरूरत है।                                                                                                                      
  • बीएसपी मुखिया मायावती का कहना है कि JNU में छात्रों व शिक्षकों के साथ हुई हिंसा अति-निन्दनीय व शर्मनाक। केन्द्र सरकार को इस घटना को अति-गम्भीरता से लेना चाहिये। साथ ही इस घटना की न्यायिक जाँच हो जाये तो यह बेहतर होगा।                               
  • केरल के सीएम पी विजयन का कहना है कि जिस तरह से एबीवीपी के लोगों ने हिंसा की है उससे नाजियों की याद आती है। एक बात तो साफ है कि मौजूदा केंद्र सरकार छात्र समुदाय को लेकर असिहष्णु है। उन्होंने कहा कि यह समझ के बाहर है कि जेएनयू बार बार चर्चा के केंद्र में आ रहा है आखिर इसके पीछे वजह क्या है इसकी तलाश करने की जरूरत है। 
  • कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि यह मोदी शाह का छात्रों के लिए गुजरात मॉडल है। इसके साथ ही कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह ने क्या कुछ कहा उसे समझने की जरूरत है।                                                                                  
  • कांग्रेस की नेता प्रिया दत्त ने कहा कि छात्रों और शिक्षकों के खिलाफ हिंसा निंदनीय है। सुनियोजित अंदाज में पहले भड़काने का काम हुआ और बाद में हिंसा की गई। बीजेपी का दावा है कि उत्पात करने वाले बाहरी हैं, क्या वास्तव में ऐसा है, हकीकत ये है कि ऐसे छात्र जो एनपीआर और एनआरसी का विरोध कर रहे हैं।                                                                                                   

जेएनयू छात्रसंघ का कहना है कि जिस तरह से हिंसा हुई है उससे साफ है कि वीसी एम जगदीश कुमार भीड़तंत्र का साथ दे रहे हैं। वो पूरी हिंसा के दौरान शांत रहे और पता चलता है कि कहीं न कहीं उनकी मूक सहमति थी। वी सी गैरकानूनी तरह से बैकडोर के जरिए नियम और कानून को लागू कर रगे हैं जो विश्वविद्यालय की मान्य परंपरा के खिलाफ है। 

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