फिर एनडीए में शामिल होंगे जीतन राम मांझी? झारखंड में बीजेपी के साथी आजसू के साथ कर रहे हैं गठबंधन

देश
Updated Jul 28, 2019 | 20:42 IST | रामानुज सिंह

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के अध्यक्ष जीतन राम मांझी झारखंड में एनडीए सहयोगी आजसू के साथ गठबंधन कर विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। एनडीए में शामिल होने का कयास लगाया जा रहा है।

Jitan Ram Manjhi
Jitan Ram Manjhi  |  तस्वीर साभार: PTI
मुख्य बातें
  • झारखंड विधानसभा चुनाव में एनडीए सहयोगी आजसू के साथ गठबंधन कर रहे हैं जीतन राम मांझी, नहीं होंगे महागठबंधन
  • उन्होंने कहा कि आजूस अध्यक्ष सुदेश महतो के साथ मेरी व्यक्तिगत दोस्ती है इसलिए गठबंधन कर रहे हैं
  • उन्होंने कहा कि हमारे इस कदम को विश्वासघात के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि वह एनडीए में शामिल हो सकते हैं

गया: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने रविवार को खुलासा किया कि उनके हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) झारखंड में एनडीए के साझेदार के साथ गठबंधन करके विधानसभा चुनाव लड़ेगा। उनकी पार्टी बिहार में विपक्ष के महागठबंधन का हिस्सा है। मांझी ने गया में रविवार को कहा कि आजसू के साथ हमारी बातचीत फाइनल स्टेज में है। जल्द ही सीट शेयरिंग को लेकर फैसला हो जाएगा। हमें उम्मीद है इससे दोनों को फायदा होगा। वोटों का ट्रांस्फर होगा। 

उनसे जब पूछा गया कि झारखंड में आप महागठबंधन का हिस्सा बनकर चुनाव क्यों नहीं लड़ेंगे। मांझी ने कहा कि HAM झारखंड में महागठबंधन का हिस्सा कभी नहीं था। हम कांग्रेस, राजद और अन्य लोगों के साथ महागठबंधन में शामिल हैं वह बिहार के लिए ही है। बिहार के बाहर गठबंधन नहीं है। इसलिए हमारे इस कदम को विश्वासघात के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनसे पूछा गया कि क्या वह झारखंड के सीनियर एनडीए पार्टनर बीजेपी के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं? इस पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारा गठबंधन मुख्य रूप से आजसू के साथ होगा क्योंकि मेरी व्यक्तिगत दोस्ती आजूस अध्यक्ष सुदेश महतो के साथ है। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि यह प्लान बिहार एनडीए में लौटने का है।

सीएम पद से हटने के बाद जदयू छोड़ा, एनडीए में हुए थे शामिल
वर्ष 2015 में जब उनके पॉलिटिकल गुरु नीतीश कुमार ने उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए कहा तब उन्होंने जदयू छोड़कर खुद की अलग पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) बना ली थी और एनडीए में शामिल हो गए थे। ये महादलित नेता एनडीए के घटक के रूप में उस वर्ष बाद में हुए विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए चले गए थे। लेकिन उनकी पार्टी ने बहुत खराब प्रदर्शन किया था। उन्होंने खुद दो सीटों पर चुनाव लड़ा था सिर्फ एक सीट पर जीत हासिल की थी। जुलाई 2017 में नीतीश कुमार एनडीए में शामिल हो गए। उसके बाद मांझी ने अपना ट्रैक बदल लिया और कांग्रेस और आरजेडी वाले महागठबंधन में शामिल हो गए। महागठबंधन में शामिल दल आरजेडी के पास सबसे ज्यादा विधायक हैं। उनकी मदद से उनके बेटे संतोष मांझी विधान परिषद के सदस्य बन गए।

आरएलएसपी, वीआईपी के महागठबंधन में आने से HAM को कम सीटें मिलीं
लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले महागठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी और मुकेश साहनी की वीआईपी भी आ गए। मांझी को शुरू में एक फिट बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी को उन सीटों का हिस्सा दिया जाना चाहिए जो आरजेडी को छोड़कर सभी गठबंधन सहयोगियों से अधिक हैं। हालांकि वह मान गए और उन्हें केवल तीन सीटें दी गईं। कांग्रेस को नौ और आरएलएसपी को पांच सीटें दी गईं। इससे काफी कम उन्हें दी गईं। उनकी पार्टी सभी सीटें हार गईं। वे खुद अपने एक रिश्तेदार एनडीए उम्मीदवार विजय मांझी से चुनाव हार गए।

आजम खान के बचाव में आए मांझी
इससे पहले, नवादा में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के बचाव में यह कहते हुए कि उन्हें बिल्कुल इस्तीफा नहीं देना चाहिए। हालांकि उन्होंने कहा कि  लोकसभा उपाध्यक्ष रमा देवी के बारे में अपनी टिप्पणी पर माफी की मांग को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भाई और बहन, मां और बेटे मिलते हैं तो प्यार से किस करते हैं तो उस समय हावभाव सेक्सुल नहीं होता है। आजम खान के शब्दों को सही अर्थों में नहीं लिया जा रहा है। इसलिए मेरा विचार है कि उन्हें इस्तीफा नहीं देना चाहिए लेकिन चूंकिं सभी दलों को आपत्ति है इसलिए उन्हें मांफी मांगकर मामले को सुलझा लेना चाहिए।

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