क्या मायावती सच में बिजली के नंगे तार की तरह हैं, जो छुएगा वो मर जाएगा?  

देश
Updated Aug 29, 2019 | 18:48 IST | मनोज यादव

योगी के मंत्री ने मायावती को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा, मायावती बिजली के नंगे तार की तरह हैं, जो छुएगा वो मर जाएगा।

Is Mayawati really like a bare wire of electricity, whoever touches her will die?
योगी के मंत्री ने मायावती पर दिया विवादित बयान।  |  तस्वीर साभार: PTI

मुख्य बातें

  • आगरा कैंट के विधायक गिर्राज सिंह धर्मेश को राज्य मंत्री के तौर पर शामिल किया गया है
  • आगरा में मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी सीमांए भी भूल गए राज्य मंत्री धर्मेश
  • मायावती कांग्रेस और भाजपा के साथ भी रह चुकी हैं, सपा के साथ लड़ा था लोकसभा चुनाव

आगराः उत्तर प्रदेश में हाल ही में मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया, जिसमें आगरा कैंट के विधायक गिर्राज सिंह धर्मेश को राज्य मंत्री के तौर पर शामिल किया गया है। अब गिर्राज सिंह अपनी पार्टी के प्रति कुछ ज्यादा वफादारी निभाने में जुट गए हैं। आगरा के सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए वो अपनी सीमांए भी भूल गए। मंत्री जी ने अपनी सीमाएं लांघते हुए मायावती पर विवादित बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि मायावती बिजली के नंगे तार की तरह हैं, उन्हें जो छुएगा वो खत्म हो जाएगा। 

इसके लिए उन्होंने लोकसभा चुनावों में हुए गठबंधन का उदाहरण भी दे दिया। मंत्री जी ने कहा कि मायावती ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके अपनी सीटें शून्य से बढ़ाकर दस कर लेने के बाद अखिलेश यादव से गठबंधन तोड़ लिया। इसके अलावा उन पर कई आरोप भी लगा दीं। मायावती किसी की सगी नहीं हैं। उन्होंने अखिलेश यादव को धोखा दिया। बसपा के सांसदों की संख्या दस पर पहुंच गई, लेकिन सपा के सांसद पांच ही रह गए। समाजवादी पार्टी से फायदा लेने के बाद उन्होंने गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया। 

गिर्राज सिंह धर्मेश पेशे से डॉक्टर हैं और 1994 से भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। लेकिन 2017 में वो पहली बार विधायक चुने गए। अबकी बार मंत्रिमंडल विस्तार में अनुसूचित जाति को नेतृत्व देने के लिए उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। 

मंत्री जी ने कहा कि भाजपा के विधायक ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने उनकी जान बचाई थी और भाजपा के समर्थन से वो तीन बार उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की मुख्यमंत्री बनने में कामयाब हो गई थीं। लेकिन मायावती किसी का एहसान नहीं मानती हैं। मंत्री जी ने कांशीराम को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मौत संदिग्ध थी। उसकी सीबीआई जांच करवाने के लिए सरकार से निवेदन करेंगे। 

बता दें, अभी दो दिन पहले मायावती को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। पार्टी अध्यक्ष चुने जाने के बाद मायावती ने विधानसभा उपचुनावों के लिए प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया था। यह पहली बार हो रहा है कि मायावती किसी उपचुनाव में अपने प्रत्याशी मैदान में उतार रही हैं। उत्तर प्रदेश में 13 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराए जाने हैं, जिसमें एक सीट बसपा के खाते की रही है। अब मायावती और सीटों पर कब्जा करना चाहती हैं, जिसके लिए जातिगत समीकरण के आधार पर टिकटों का बंटवारा किया है।  

गौरतलब है कि मायावती कई दलों के साथ समझौता करके चुनाव लड़ चुकी हैं। लेकिन उनका गठबंधन किसी के साथ टिकाऊ नहीं रहा है। मायावती कांग्रेस और भाजपा के साथ भी रह चुकी हैं। इसके पहले 1993 में बसपा ने सपा के साथ समझौता करके चुनाव लड़ा था, जिसमें मंदिर आंदोलन को पीछे छोड़ते हुए गठबंधन को बहुत अधिक सीटें मिली थीं। उसी को आधार मानकर इस बार अखिलेश यादव ने मायावती के साथ गठबंधन किया था, लेकिन लोकसभा चुनाव में गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा था। 

(डिस्क्लेमर : मनोज यादव अतिथि लेखक हैं और ये इनके निजी विचार हैं। टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।)

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