Hindi Diwas 2019: हिंदी बढ़ेगी तभी, जब चाहेंगे सभी

देश
Updated Sep 14, 2019 | 21:51 IST | संजय कुमार पांडे

भारत में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस (Hindi Diwas) मनाया जाता है और इस अवसर पर सरकारी दफ्तरों, स्कूलों और कालेजों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

Hindi Diwas
हिंदी दिवस 

मुख्य बातें

  • 26 जनवरी 1950 से हिन्दी को राजभाषा के रूप में  लागू  किया गया
  • आज के समय में हिंदी का विरोध कहीं दिखता, तो उसका कारण मात्र गलत राजनीति है
  • 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया था

नई दिल्ली: सरकार की राजभाषा नीति स्वतंत्र राष्ट्र की अस्मिता और अमिट पहचान को जीवंत बनाए रखने की दिशा में एक सशक्त प्रयास है। आजादी के उपरांत, संविधान सभा द्वारा 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया और इसी उपलक्ष्य में केंद्रीय सरकार के कार्यालयों में 14 सितंबर को हिंदी दिवस (Hindi Diwas 2019) हर वर्ष मनाया जाता है।

संविधान के प्रभावी होने के साथ ही दिनांक 26 जनवरी 1950 से हिन्दी को राजभाषा के रूप में  लागू  किया गया। राजभाषा हिंदी को सन 1950  से 1965 तक सह राजभाषा के रूप में और इस 15 वर्ष के दौरान अंग्रेजी को मुख्य राजभाषा के रूप में लागू किया गया। इस 15 वर्ष के पश्चात , 26 जनवरी 1965  से हिंदी को मुख्य राजभाषा और अंग्रेजी को सह राजभाषा के रूप में  लागू किया जा रहा है।

 सरकार की यह राजभाषा नीति बहुत ही विपरीत स्थिति में और बहुत ही सोच समझ के बनाई गई, जिसमें हिन्दीतर भाषी विद्वानों की राय को माना गया और हिन्दीतर भाषियों ने अपनी उदारता का परिचय दिया। आज के समय में हिंदी का विरोध कहीं दिखता, तो उसका कारण मात्र गलत राजनीति है। अधिकांश हिन्दीतर भाषियों ने हिंदी को सीखकर अपने हिंदी प्रेम और सरकार की नीति के अपना सहयोग दिया है।

हम हिंदी भाषियों को इस बात को  स्वीकार करना ही होगा।  हिंदी की गति में तीव्रता तभी आएगी, जब हम सभी भारतीय हिन्दीतर भाषियों के इस योगदान को समझकर हिन्दीतर भाषी कर्मचारियों का उत्साहवर्धन करेंगे और स्वयं भी अधिक से अधिक हिंदी में दैनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाएंगे, इसीलिए  हमें  कहना होगा -हिंदी बढ़ेगी तभी, जब चाहेंगे सभी ।

[डिस्क्लेमर : लेखक एचएएल बेंगलुरु में वरिष्ठ प्रबंधक (राजभाषा) हैं और ये इनके निजी विचार हैं। टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।]

 

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