चन्द्रयान -2 मिशन के लिए दुर्भाग्य बन गए मोदी, अपना प्रचार करने आए थे इसरो: कुमारस्वामी

देश
किशोर जोशी
Updated Sep 12, 2019 | 20:54 IST

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि उनका इसरो सेंटर में आना वैज्ञानिकों के लिए दुर्भाग्य बन गया।

HD Kumaraswamy
एचडी कुमारस्वामी  |  तस्वीर साभार: ANI

मुख्य बातें

  • कुमारस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसरो सेंटर में अपना प्रचार करने आए थे
  • कुमारस्वामी ने कहा कि ऐसा लग रहा था कि पीएम मोदी खुद चंद्रयान 2 लॉन्च कर रहे हैं
  • इसरो केंद्र में कदम रखना चंद्रयान मिशन-2 के लिए दुर्भाग्य साबित हुआ: कुमारस्वामी

बेंगलुरु: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कर्नाटक के मैसूर में मीडिया से बात करते हुए कुमारस्वामी ने कहा, 'पीएम बेंगलुरु आए थे ताकि यह संदेश दिया जा सके कि वह खुद चंद्रयान -2 को लॉन्च कर रहे हैं।  वैज्ञानिकों ने 10-12 साल तक कड़ी मेहनत की, वह सिर्फ प्रचार करने के लिए आए थे। एक बार जब उन्होंने इसरो केंद्र में कदम रखा, तो मुझे लगा कि यह वैज्ञानिकों के लिए दुर्भाग्य  बन गया।' 

 

 

कुमारस्वामी यहीं नहीं रूके उन्होंने कहा,  'कैबिनेट द्वारा 2009 में इसके (चंद्रयान-2 मिशन) लिए स्वीकृति दी गई और प्रचार करने तथा इसका श्रेय लेने के लिए पीएम मोदी इसरो आए। मुझे यह भी जानकारी मिली कि जो मुख्यमंत्री और अन्य नेता जो इसरो केंद्र आए थे वो चले गए। उन्हें पीएम मोदी ने उंगली दिखाते हुए यह कहकर भेज दिया था कि उनकी वहां कोई जरूरत नहीं है।'

यह पहला मौका नहीं है जब किसी नेता ने पीएम मोदी के इसरो केंद्र में आने को लेकर टिप्पणी की हो। कुछ ऐसी ही टिप्पणी छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री मरजीत भगत ने भी की थी। भगत ने चंद्रयान 2 मिशन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि वह अब तक दूसरे के कामों की वाहवाही लूटते थे, लेकिन पहली बार चंद्रयान 2 का प्रक्षेपण करने गए और वह भी असफल हो गया। भाजपा ने भगत की इस टिप्पणी को मुद्दा बनाते हुए खूब विरोध किया जिसके बाद मंत्री महोदय को स्पष्टीकरण देना पड़ा।

आपको बता दें कि चंद्रयान-2 के ‘लैंडर’ विक्रम के चंद्रमा की सतह पर 7 सितंबर तड़के ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने के दौरान अंतिम क्षणों में इसरो के जमीनी स्टेशनों से संपर्क टूट गया था। उस वक्त विक्रम पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह (चंद्रमा) से महज 2.1 किमी ऊपर था। बाद में इसरो ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा था कि चंद्रयान-2 आर्बिटर में लगे कैमरों के जरिए लैंडर (विक्रम) का चंद्रमा की सतह पर पता लगा लिया गया है और आर्बिटर अपनी निर्धारित कक्षा में चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है।  इसरो के मुताबिक चंद्रयान-2 अभियान के 90 से 95 फीसदी उद्देश्यों को हासिल कर लिया है।

 

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