भारत की पहली महिला विधायक मुत्थुलक्ष्मी रेड्डी का 133वां जन्मदिन, गूगल ने बनाया डूडल

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Updated Jul 30, 2019 | 11:16 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

सर्च इंजन भारत की पहली महिला विधायक और सर्जन मुत्थुलक्ष्मी रेड्डी की 133वीं जन्मदिन मना रहा है। इस मौके पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें सम्मानित किया है।

google doodle
गूगल डूडल 
मुख्य बातें
  • गूगल ने बनाया मुत्थुलक्ष्मी रेड्डी का 133वां जन्मदिन
  • भारत की पहली महिला विधायक और सर्जन हैं
  • 1956 में पद्म भूषण से हो चुकी हैं सम्मानित

नई दिल्ली : भारत की पहली महिला विधायक मुत्थुलक्ष्मी रेड्डी का आज 133वां जन्मदिन है। इस उपलक्ष्य में सर्च इंजन गूगल ने डूडल बनाकर उनका सम्मान किया है। रेड्डी ने पब्लिक हेल्थ और लिंगानुपात के क्षेत्र में काफी सराहनीय काम किए थे। देश के कल्याण में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 1956 में पद्म भूषण अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया था।

गूगल भारत की पहली नेता विधायक, डॉक्टर, समाज सुधारक मुत्थुलक्ष्मी रेड्डी का जन्मदिन मना रहा है। बेंगलुरु की गेस्ट आर्टिस्ट अर्चना श्रीनिवासन ने इस डूडल को बनाया है। रेड्डी ने समाज के लोगों की दशा खास कर युवा लड़कियों के जीवन को सुधारने की दिशा में काफी सराहनीय काम किया था। 

30 जुलाई 1883 को तमिलनाडु में रेड्डी का जन्म हुआ था। किसी सरकारी अस्पताल में सर्जन के तौर पर काम करने वाली वे भारत की पहली महिला थीं। इसके साथ ही वे ब्रिटिश इंडिया के इतिहास में पहली विधायक रही हैं। काफी कम उम्र में रेड्डी ने अपने माता-पिता और परिवार से बगावत कर लिया था।

उनके माता-पिता कम उम्र में ही उनका शादी करवाना चाहते थे। उन्होंने किसी तरह अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए अपने माता-पिता को मना लिया। वे केवल लडकों वाले महाराजा कॉलेज में दाखिला लेने वाली पहली महिला स्टूडेंट बनीं। 

वहां पर उन्हें कई छात्रों ने कॉलेज से निकालने की धमकी दी उनके खिलाफ षड़यंत्र रचे लेकिन रेड्डी ने अपनी मेहनत के बलपर स्कॉलरशिप प्राप्त किया और ऑनर्स में ग्रेजुएट हुईं। वे मद्रास मेडिकल कॉलेज की भी पहली महिला स्टूडेंट रहीं। मेडिकल के क्षेत्र में काम करने के बाद उन्होंने मद्रास विधानसभा आईं और यहां से उन्होंने गर्ल एजुकेशन के क्षेत्र में काम किया। 

लिंगभेद के खिलाफ भी उन्होंने काफी समाज सुधार के काम किए। उन्होंने 1914 में डॉक्टर सुंदर रेड्डी से शादी की। उस दौरान आजादी की लड़ाई लड़ रहे गांधी के विचाराधाराओं से वे काफी प्रेरित हुईं इसके बाद ही उन्होंने लिंगभेद के खिलाफ और महिला उत्थान के प्रति अपनी लड़ाई और तेज कर दी।

अपनी बहन की कैंसर से मौत होने के बाद रेड्डी ने 1954 में अदायार कैंसर इंस्टीट्यूट की स्थापना की। वर्तमान में ये संस्थान दुनिया के बेहतरीन कैंसर संस्थानों में से एक है जहां हर साल करीब 80,000 मरीजों का इलाज किया जाता है।  

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