BSF के पूर्व जवान तेज बहादुर यादव हरियाणा में अब देंगे सीएम मनोहर लाल खट्टर को चुनौती!

देश
रवि वैश्य
Updated Sep 24, 2019 | 14:14 IST

बीएसएफ के जवान तेज बहादुर यादव ने सेना में खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाया था वही तेज बहादुर इस बार हरियाणा चुनाव में सीएम मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं।

Tej Bahadur Yadav
बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव (फाइल फोटो) 

मुख्य बातें

  • तेज बहादुर यादव ने सेना में खाने की क्वालिटी को लेकर सवाल उठाया था
  • तेज बहादुर का कहना है कि वो हरियाणा के सीएम खट्टर के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं
  • तेज बहादुर का कहना है कि चुनाव लड़ने का मकसद बीजेपी शासनकाल में किसानों और जवानों की दुर्दशा को सामने लाना है

नई दिल्ली: सेना में खाने की क्वालिटी को लेकर सवाल उठाने वाले बीएसएफ के जवान तेज बहादुर यादव (Tej Bahadur Yadav) की याद तो होगी ही उस वक्त वो सेना से जुड़े इस मुद्दे को उठाकर खासी सुर्खियों में आ गए थे वही तेज बहादुर अब फिर चर्चाओं में हैं इस बार वजह है हरियाणा चुनाव। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो तेज बहादुर यादव एक बार फिर चुनावी मैदान में ताल ठोक सकते हैं। 

कहा जा रहा है कि तेज बहादुर का कहना है कि वो हरियाणा विधानसभा (Haryana Assembly Election) के होने वाले चुनाव में  मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर करनाल (Karnal) से चुनाव लड़ेंगे, तेज बहादुर उनके खिलाफ वहीं से चुनाव लड़ सकते हैं, तेज बहादुर का कहना है कि चुनाव लड़ने का मकसद सुर्खियां बटोरना नहीं है बल्कि बीजेपी शासनकाल में किसानों और जवानों की दुर्दशा को सामने लाना है। 

गौरतलब है कि सीमा सुरक्षा बल (BSF) में रहते हुए बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव ने घटिया खाना दिए जाने को लेकर एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला था जिसके बाद यह वायरल हो गया था और वे सुर्खियों में आ गए थे। लेकिन उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप बीएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया था। 

फिर उसने लोकसभा चुनाव 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ने का फैसला किया और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया। बाद में वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे। सपा ने उन्हें पीएम के खिलाफ अपना उम्मीदवार बनाकर फिर से नामांकन करवाया था। उसके बाद चुनाव आयोग ने उनके नामांकन को कुछ जरूरी दस्तावेज नहीं होने की वजह से खारिज कर दिया था।

नामांकन खारिज होने के बाद तेज बहादुर यादव ने दुख जताते हुए कहा था, 'मैंने बीएसएफ में रहते हुए उसी बारे में आवाज बुलंद की, जिसे मैंने गलत पाया। मैंने न्याय की उस आवाज को बुलंद करने बनारस आने का फैसला किया था। अगर मेरे नामांकन में कोई समस्या थी तो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में दाखिल दास्तावेज गलत थे तो उस समय मुझे इस बारे में क्यों नहीं बताया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने मुझे चुनाव लड़ने से रोकने के लिए तानाशाही कदम का सहारा लिया। यादव ने कहा, 'मेरे दादा आजाद हिंद फौज के साथ थे, मैं एक किसान का बेटा हूं और एक जवान के रूप में सेवा की। मैं अब चुनाव भी नहीं लड़ सकता। यह तानाशाही है।'

 

 

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