'भारत ने हमारे साथ अच्छा नहीं किया', ऐसा कहने के बाद भी यहां क्‍यों आ रहे हैं डोनाल्‍ड ट्रंप?

देश
श्वेता कुमारी
Updated Feb 21, 2020 | 18:26 IST

Donald Trump's India visit: अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भारत दौरे से पहले संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच कोई बड़ा व्‍यापारिक सौदा नहीं होने जा रहा। फिर क्‍या वजह है कि वह भारत आ रहे हैं?

Donald Trump India visit know what is reasons behind it
'भारत ने हमारे साथ अच्छा नहीं किया', ऐसा कहने के बाद भी यहां क्‍यों आ रहे हैं डोनाल्‍ड ट्रंप?  |  तस्वीर साभार: AP, File Image

नई दिल्‍ली : अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के भारत दौरे को लेकर जहां जोरशोर से तैयारियां जारी हैं, वहीं इस बहुचर्चित व बहुप्रतीक्षित दौरे से ठीक पहले अमेरिकी राष्‍ट्रपति के बयान भी खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। तीन दिन पहले ही उन्‍होंने संकेत दिए थे कि उनके इस दौरे के दौरान भारत और अमेरिका के बीच कोई बड़ा व्‍यपार समझौता नहीं होने जा रहा है। उन्‍होंने यह भी कहा कि भारत ने उनके साथ अच्‍छा नहीं किया। फिर आखिर क्‍या वजह है कि इतनी असंतुष्‍ट‍ि के बाद भी वह भारत आ रहे हैं? ट्रंप के भारत दौरे के समीकरण को इस तरीके से समझा जा सकता है: 

अमेरिका में राष्‍ट्रपति चुनाव
अमेरिका में राष्‍ट्रपति चुनाव नवंबर में होने वाले हैं, जिसके लिए ट्रंप भी मैदान में हैं। राष्‍ट्रपति चुनाव के लिए एक बार फिर उनके रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उम्‍मीदवार चुने जाने की पूरी संभावना है। अमेरिका में भारतीय समुदाय की एक बड़ी आबादी के कारण दोनों प्रमुख दल डेमोक्रेट‍िक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी के उम्‍मीदवार उन्‍हें अपने पाले में करने की कोशिश में लगे हुए हैं।

बीते साल सितंबर में अमेरिका के ह्यूस्‍टन में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्‍वागत करते हुए 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, तब भी इसके पीछे इसे एक बड़ी वजह बताया गया था। अब ट्रंप के भारत दौरे और अहमदाबाद के मोटेरा स्‍टेडियम में उसी तरह के 'नमस्‍ते ट्रंप' कार्यक्रम को भी उसी से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका में रहने वाले भारतीयों में गुजरात मूल के लोगों की संख्‍या बहुतायत में है और माना जा रहा है कि भारतीय समुदाय में प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता को ट्रंप अमेरिकी चुनाव में अपने पक्ष में भुनाने का प्रयास कर रहे हैं।

चीन से तनातनी
अमेरिका और चीन के बीच व्‍यापार‍िक रिश्‍ते किस कदर खराब चल रहे हैं, यह बात पहले से ही जगजाहिर है। एशिया में फिलहाल चीन ही है, जो व्‍यापारिक मोर्चे पर अमेरिका को सीधी टक्‍कर देने की स्थिति में है। ऐसे में अमेरिका चीन से तनातनी के बीच भारत को एक बड़े व्‍यापारिक साझीदार के तौर पर देख रहा है। उसकी कोशिश भारत को साथ लेकर एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करना और चीन को व्‍यापारिक मोर्चे पर पटखनी देना भी है। एशिया में भारत के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए अमेरिका इसे साथ लेना चाहता है।

भारत एक बड़ा बाजार
भारत चीन के बाद एशिया में दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत एक बड़ा बाजार भी है, जिस पर अमेरिका की नजर है। अमेरिकी कंपनियों को यह एक बड़ा उपभोक्‍ता बेस मिल सकता है। ऐसे में अमेरिकी नेतृत्‍व अपने देश की कंपनियों के लिए भारत में कुछ व्‍यापारिक नेतृत्‍व भी चाहेगा। भारत ने भले ही अमेरिकी उत्‍पादों पर शुल्‍क लगाए हैं, लेकिन राष्‍ट्रपति के तौर पर ट्रंप इस कोशिश में लगे हैं कि भारत के साथ उसके व्‍यापारिक रिश्‍तों में सुधार हो, जिसका फायदा उसे दीर्घकालिक व्‍यापारिक संबंधों में मिल सकता है।

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