JNU Violence: नकाबपोशों से उतरा नकाब और सियासी तीर से बीजेपी ने लेफ्ट पर साधा निशाना

देश
ललित राय
Updated Jan 10, 2020 | 21:34 IST

जेएनयू हिंसा से संबंधित दिल्ली पुलिस ने 9 लोगों की तस्वीर जारी की है जिसमें सात लेफ्ट समर्थित छात्र संगठन से है। ऐसे में बीजेपी ने वाम दलों पर जबरदस्त हमला करते हुए कहा कि अब तो झूठ का व्यापार बंद कर दो।

JNU Violence:नकाबपोशों से उतरा नकाब और सियासी तीर से बीजेपी ने लेफ्ट पर निशाना
नकाबपोशों की दिल्ली पुलिस ने जारी की तस्वीर 

मुख्य बातें

  • दिल्ली पुलिस ने जेएनयू में हिंसा के लिए जिम्मेदार नकाबपोशों की जारी की तस्वीर
  • 9 लोगों में से लेफ्ट समर्थित छात्र संगठन के सात और एबीवीपी के दो लोग
  • जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष के खिलाफ भी एफआईआर

नई दिल्ली। पांच जनवरी को सर्दी सितम ढा रही थी तो देश के मशहूर विश्वविद्यालयों में से एक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में कुछ नकाबपोश कानून को चुनौती देते हुए हिंसा का नंगा नाच खेल रहे थे। चेहरे पर नकाब और हाथ में लाठी थी जो उनके रास्ते आया बच न पाया। करीब दो घंटे तक अफरातफरी का माहौल बना रहा। दिल्ली पुलिस मौके पर मौजूद थी। लेकिन परिसर के अंदर नहीं थी। जब पुलिस कैंपस में दाखिल हुई तो उससे पहले नकाबपोश बाहर निकल चुके थे और यहीं से सियासत के उस अध्याय को लिखने की शुरुआत हुई जिसके पन्नों में नेता, छात्र जेएनयू प्रशासन और दिल्ली पुलिस के बयान अंकित हो चुके हैं।

दिल्ली पुलिस की तरफ से 9 की पहचान
दिल्ली पुलिस की तरफ से 9 लोगों की पहचान करने के बाद तस्वीर जारी की गई है, जिसमें एबीवीपी(2) और लेफ्ट(7) से जुड़े छात्र संगठन के सदस्य शामिल हैं।  खास बात है जिन 9 लोगों की तस्वीर जारी की गई है उसमें जेएनयू स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष आइशी घोष भी हैं। अब यहीं से सियासत का अलग चेहरा सामने आया। केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने कहा कि जो नकाब वाले थे अब वो बेनकाब हो चुके हैं। वाम दल जो अच्छाई का चोला ओढ़ कर देश में अशांति का माहौल बना रहे थे अब उनकी कलई खुल गई है। ये बात अलग है कि आइशी घोष ने कहा कि वो अपने ऊपर किए गए एफआईआर से न तो घबरा रही हैं और न ही परेशान हैं। मैं तो पूछना चाहती हूं कि मेरी शिकायत का क्या हुआ। 

बीजेपी के निशाने पर लेफ्ट
इससे पहले एक और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर भी कह चुके थे कि बहुत जल्द ही पता चल जाएगा कि नकाब के पीछे कौन लोग। वो कौन लोग हैं जो जेएनयू के जरिए अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले  पांच दिनों से विरोधी दल झूठ फैला रहे थे। आरोप एबीवीपी और बीजेपी पर लग रहा था । लेकिन सच कुछ और था जोकि अब सामने है। लेफ्ट संगठनों ने ही हिंसा की योजना बनाई थी। इसके साथ वो कहते हैं कि यह बात तो समझनी होगी कि विरोध किस बात पर किया जा रहा है। आप किसी भी मुद्दे पर सहमत नहीं हो सकते हैं। लेकिन जिस तरह से मुद्दों का कॉकटेल बनाया जा रहा है उस सच को जनता भी समझ रही है। 

'न जानें विचारधारा की लड़ाई कहां रुकेगी'
दिल्ली पुलिस द्वारा जारी की गई तस्वीर और हिंसा के बाज उपजे राजनीतिक हालात पर जेएनयू से पढ़े रंजय कुमार कहते हैं कि दरअसल यह विचारधारा की लड़ाई जो हिंसक रूप ले चुकी है। छात्र राजनीति में हिंसा भारत के अलग अलग विश्नविद्यालयों में होती रही है। लेकिन विरोध का हिंसक स्वरूप जेएनयू के लिए नया है। दक्षिणपंथी संगठनों को लगता है कि उस वर्चस्व को तोड़ने की जरूरत है जो कपड़े तो सादा पहनते हैं लेकिन विचारों में उलझे हुए हैं। एक तरह का पाखंड वाम दलों की तरफ से दशकों से किया जाता रहा है और उसे तोड़ने की जरूरत है। जहां तक मौजूदा सरकार की छवि का सवाल है तो एक बात साफ है कि उनके रणनीतिकार सोचते हैं कि इस तरह की घटनाओं से देश में एक वर्टिकल विभाजन होगा जो एक तरह से सही रहेगा।

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