Delhi : राजधानी के सरकारी स्कूल में डेस्क तक नहीं, दरी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं 4,000 बच्चे

देश
Updated Oct 03, 2019 | 10:20 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

Delhi News: उत्तर पूर्व दिल्ली के एक सरकारी स्कूल की हालत ऐसी है कि यहां पर बड़ी संख्या में छात्रों को दरी पर बैठकर पढ़ाई करनी होती है। इस मामले में किसी ने अभी तक सुध नहीं है।

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दिल्ली सरकारी स्कूल  |  तस्वीर साभार: BCCL

मुख्य बातें

  • राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूल का है इतना बुरा हाल
  • 4000 बच्चे दरी पर बैठकर पढ़ने को हैं मजबूर
  • नए बिल्डिंग में शिफ्ट होने पर नहीं मिली डेस्क चेयर की सुविधा
  • बार-बार ध्यान दिलाने पर भी शासन प्रशासन है मौन

नई दिल्ली : देश में भले ही हर तरफ विकास के दावे किए जा रहे हों लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ और ही बयां करती है। बच्चे जिन्हें देश का भविष्य कहा जाता है उनकी बड़े पैमाने पर उपेक्षा सरकार के विकास के दावों की पोल खोलता हुआ नजर आता है। ताजा मामला राजधानी दिल्ली का है।

उत्तर पूर्व दिल्ली के एक सरकारी स्कूल के 4,000 बच्चे जिन्हें स्कूल की एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाना है उन्हें इन दिनों भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। नए बिल्डिंग में शिफ्ट होने पर उनके पास ना डेस्क और ना ही चेयर की सुविधा है। यहां तक कि ये बच्चे परीक्षा देने के लिए दरियों पर बैठने को मजबूर हैं। 

दिल्ली कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (डीसीपीसीआर) ने इस संबंध में गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल (जीजीएसएसएस) को नोटिस जार कर जवाब मांगा है। यह स्कूल दो शिफ्ट में चलाया जा रहा है सुबह की शिफ्ट में लड़कियां जबकि शाम की शिफ्ट में लड़कों को पढ़ाया जाता है। 

नई बिल्डिंग के उद्घाटन से पहले स्कूल चार शिफ्ट में चलाया जा रहा था क्योंकि बड़ी संख्या में बच्चों ने इसमें दाखिला ले लिया था। कादीपुर में स्थित यह एकमात्र सरकारी स्कूल है जिसमें पड़ोसी इलाकों इब्राहिमपुर, कादीपुर, कुशाक और नागलीपुर के बच्चे पढ़ने आते हैं। इस स्कूल में इतनी सारी असुविधा अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गई है। 

रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को कमीशन की डीसीपीसीआर टीम ने स्कूल का दौरा किया और अभिभावकों की शिकायतें सुनी। एक अभिभावक ने बताया कि दरी पर बैठकर परीक्षा देना बेहद मुश्किल है। हमारे बच्चे शिकायत करते हैं कि ये काफी असुविधाजनक होता है। नई बिल्डिंग होने का क्या मतलब हुआ जब यहां पर डेस्क और चेयर ही नहीं है। कई इस बात का जवाब देने के लिए तैयार नहीं है कि ये सब समस्याएं कब दूर होंगी। 

एक छात्र ने बताया कि कक्षा के दौरान हम किसी प्रकार से एडजस्ट कर लेते हैं लेकिन परीक्षा के समय 3-4 घंटे दरी पर बैठना बेहद मुश्किल हो जाता है। गर्ल सेक्शन की प्रिंसिपल उषा रानी गिलानी ने बताया कि उसने तीन महीने पहले ही डेस्क और चेयर के लिए आवेदन दिया है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।  

मैंने पीडब्ल्यूडी में भी कई बार रिमाइंडर डाला यहां तक कि स्थानीय विधायक को भी इस बारे में अवगत कराया लेकिन किसी ने कोई सुध नहीं की। कई अभिभावकों का तो ये भी कहना है कि नए चेयर डेस्क लेने से अच्छा होगा कि वे पुराने फर्नीचर को ही दुरुस्त करवा के इस्तेमाल में ले आएं। इधर शिक्षा निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने इस मामले को संज्ञान में लिया है और इस पर जल्द कार्रवाई करेंगे।    

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