1993 में 37 साल बाद दिल्ली को मिला था मुख्यमंत्री, 41 साल बाद हुए थे विधानसभा चुनाव

देश
लव रघुवंशी
Updated Feb 03, 2020 | 10:36 IST

Delhi election news: दिल्ली विधानसभा के लिए चुनाव 1952 के बाद 1993 में होते हैं। 1956 के बाद 1993 में जाकर दिल्ली को मुख्यमंत्री मिलता है। इसके पीछे क्या कारण हैं, यहां जानें:

Delhi Assembly
दिल्ली विधानसभा चुनाव 

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020: दिल्ली में 8 फरवरी को वोटिंग होनी है। उससे पहले हम आपको एक बार दिल्ली के राजनीतिक इतिहास में ले जाना चाहते हैं। दिल्ली में 1952 के बाद सीधे 1993 में विधानसभा चुनाव होते हैं। 1956 के बाद 1993 में जाकर 37 साल बाद दिल्ली को मुख्यमंत्री मिलता है। आखिर ऐसा क्यों था? इसके पीछे क्या कारण थे? ये ही हम आपको बताएंगे।

1952 में पहला विधानसभा चुनाव
मार्च 1952 में पहली बार दिल्ली में विधानसभा चुनाव हुए थे। तब 48 सीटों पर वोटिंग हुई थी। कांग्रेस के चौधरी ब्रह्म प्रकाश यादव मुख्यमंत्री बनते हैं। वो करीब 3 साल इस पद पर रहते हैं। इसके बाद गुरमुख निहाल सिंह इस पद पर काबिज होते हैं।

1956 में विधानसभा भंग
1956 में दिल्ली विधानसभा को भंग करके इसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित कर दिया गया। 7 मार्च, 1952 को भाग सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत दिल्ली विधानसभा का गठन किया गया था। विधानसभा में 48 सदस्य थे और दिल्ली के मुख्य आयुक्त के लिए एक सलाहकार की भूमिका में मंत्रियों की एक परिषद थी, हालांकि इसके पास कानून बनाने की भी शक्तियां थीं। पहली मंत्रिपरिषद का नेतृत्व चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने किया, जो दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री बने।

हालांकि राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत दिल्ली को भारत के राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। साथ ही दिल्ली विधान सभा और मंत्रिपरिषद को एक साथ समाप्त कर दिया गया। इसके बाद, दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 लाया गया जिससे नगर निगम का गठन हुआ। फिर सितंबर 1966 में दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत विधानसभा को दिल्ली महानगर परिषद द्वारा 56 निर्वाचित और पांच मनोनीत सदस्यों के साथ बदल दिया गया। दिल्ली के उपराज्यपाल इसके प्रमुख थे। परिषद के पास कोई विधायी शक्तियां नहीं थीं, केवल दिल्ली के शासन में एक सलाहकार की भूमिका थी। इसने 1990 तक कार्य किया।

दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र घोषित किया गया
इसके बाद 1991 में 69वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1991 और राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम, 1991 ने केंद्र शासित दिल्ली को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की पहचान दी और विधानसभा एवं मंत्री-परिषद से संबंधित संवैधानिक प्रावधान निर्धारित किए।

फिर 1993 में 41 साल बाद विधानसभा चुनाव हुए। इस बार 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुए। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 49 सीटों पर चुनाव जीतकर सत्ता हासिल की और 37 साल बाद दिल्ली को मुख्यमंत्री मिला। बीजेपी के मदन लाल खुराना मुख्यमंत्री बने।

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