पाकिस्तान के पास नहीं है अपने बच्चों को चीन से निकालने की हैसियत, क्या भारत को मदद के लिए बढ़ाना चाहिए हाथ?

देश
Updated Feb 02, 2020 | 01:33 IST

पाकिस्तान के लिए इस समय हालात 'आगे कुआं और पीछे खाई' जैसे हैं। करीब दोस्त चीन से वह मदद मांग नहीं सकता है और अपने वहां कोरोना वायरस का टेस्ट तक नहीं कर सकता है।

Coronavirus Pakistan doesn't have the ability to rescue its children from Wuhan China
चीन में फंसे पाक छात्रों के लिए क्या भारत को करनी चाहिए मदद?  |  तस्वीर साभार: AP

मुख्य बातें

  • कोरोना वायरस के केंद्र चीन के वुहान शहर में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित अपने देश में कर रहे हैं एयरलिफ्ट
  • पाकिस्तान के छात्र लगातार सोशल मीडिया के जरिए इमरान खान से कर रहे हैं सुरक्षित निकालने की मिन्नतें
  • पाकिस्तानी स्वास्थ्य मंत्री का दावा चीन के लिए एकजुटता दिखाना जरूरी, लेकिन हकीकत कुछ और

नई दिल्ली: चीन में इस समय कोरोना वायरस का कहर जारी है। विश्व के तमाम देश कोरोना वायरस के केंद्र चीन के वुहान शहर में फंसे अपने नागरिकों को निकाल रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसने चीन के वुहान में फंसे अपने सैंकड़ों छात्रों को उनके ही हाल पर छोड़ दिया है। ये छात्र लगातार इमरान खान और वहां की फौज से अपील कर रहे हैं कि उन्हें वहां से निकाला जाए। लेकिन इमरान सरकार है चीन के एकजुटता दिखाने की बात कहकर छात्रों को वहां से निकालने के लिए तैयार नहीं हैं। सोशल मीडिया पर इन छात्रों के तमाम वीडियो सामने आए हैं जहां से सरकार से अपील कर रहे हैं कि भारत ने जिस तरह अपने छात्रों को सुरक्षित निकाला वैसे ही हमें भी यहां से निकालें।

क्या कहती है इमरान सरकार
पाकिस्तान की इमरान सरकार ने साफ कर दिया है कि वह वुहान से अपने छात्रों को वापस नहीं बुलाएगी। शनिवार को पाकिस्तान के स्वास्थ्य राज्य मंत्री डॉ. ज़फ़र मिर्ज़ा ने कहा कि पाकिस्तान ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रस्ताव को देखते हुए अपने लोगों को वहां से वापस नहीं लाने का फ़ैसला किया है। उन्होंने कहा कि हम इस कठिन हालात में चीन के साथ खडे़ हैं। मीडिया से बात करते हुए मिर्जा ने कहा कि हमें अपने बच्चों की चिंता है लेकिन हमें अपने लिए सही उपाय करने होंगे और दूसरे देशों का अनुसरण नहीं करना होगा।

हकीकत कुछ और
पाकिस्तान भले ही यह कहे कि वह चीन के साथ एकजुटता दिखाने के लिए यह कर रहा है लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है। पाकिस्तान के पास इस तरह की चिकित्सा सेवाएं ही नहीं हैं कि वो कोरोना वायरस को रोक सके। पाकिस्तान को डर है कि यदि कोरोना का एक भी मरीज यदि पाकिस्तान में पाया जाता है तो यह वायरस बुरी तरह पाकिस्तान में महामारी की तरह फैल सकता है। इसकी तसदीक खुद इमरान के स्वास्थ्य मंत्री ने की। उन्होंने कहा कि देश को जल्द ही ऐसी स्वास्थ्य किट मिलेंगी जिससे देश में वायरस का पता चल सकेगा। यानि पाकिस्तान के पास अभी तक इस वायरस से निपटना तो दूर इसका टेस्ट करने तक की सुविधा नहीं है।

क्या भारत कर सकता है मदद
ऐसे समय में जब पाकिस्तान बेबस है और चीन में उसके छात्र फंसे हुए लाचार हैं और लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं, तो क्या भारत को मदद करनी चाहिए। आपको याद दिला दें कि रेस्क्यू के मामले में भारत का रिकॉर्ड बेहद उम्दा रहा है। अप्रैल 2015 की बात है जब संघर्ष प्रभावित यमन से भारत ने अपने देश के नागरिकों को निकालने के अलावा 40 देशों के सैकड़ों नागरिकों को बाहर सुरक्षित निकाला था। हालांकि यहां मामला थोड़ा दूसरा है लेकिन मानवता के आधार पर अगर भारत चाहे तो मदद का हाथ बढ़ा सकता है।

पाकिस्तान के सामने 'आगे कुआँ पीछे खाई' जैसे हालात

 हालांकि जिस दौर में दोनों देशों के रिश्ते गुजर रहे हैं उसमें से यह कहीं भी संभव नहीं दिखता है। लेकिन कहते हैं ना कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म होता है। पाकिस्तान के लिए इस समय हालात 'आगे कुआं और पीछे खाई' जैसे हैं। पाकिस्तान का सबसे करीबी दोस्त चीन में यह महामारी फैली जिससे वह मदद भी नहीं मांग सकता बल्कि वहां फंसे उसके छात्र मदद मांग रहे हैं और दूसरी तरफ उसके पास ऐसी चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं कि वो अपने नागरिकों को वहां से पाकिस्तान ला सके। क्योंकि अगर एक भी मामला पॉजिटिव पाया गया था यह पूरे देश में फैल सकता है।

ऐसे में सामने एक ही ऑप्शन है और वो है भारत, जिसके साथ उसने अपने संबंध बेहद खराब कर लिए हैं। गौर करने वाली बात ये है कि पाकिस्तान के कई मरीज आज भी भारत में अपना इलाज कराने आते हैं। अब ऐसे में यह देखना होगा कि क्या बच्चों जान के लिए भारत ही पाकिस्तान की तरफ कोई मदद का हाथ बढ़ाता है या नहीं।

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