Ayodhya: असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ भोपाल के थाने में शिकायत दर्ज, दिया था अयोध्या फैसले पर बयान

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Updated Nov 11, 2019 | 17:41 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी नराजगी जताते हुए बयान दिया था कि सर्वोच्च अदालत से भी गलती हो सकती है।

Asaduddin Owaisi
Asaduddin Owaisi  |  तस्वीर साभार: PTI

भोपाल : अयोध्या रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने के बाद आयोध्या मामले पर भड़काऊ बयान देने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध जाने पर एआईएमआईएम के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ भोपाल के  जहांगीराबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में ओवैसी के खिलाफ राजद्रोह और धर्म विशेष के लोगों को भड़काने पर FIR दर्ज करने की मांग की है। वकील पवन कुमार यादव ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई है।

गौर हो कि ओवैसी ने राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर शनिवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को तथ्यों पर आस्था की जीत करार देते हुए मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन दिए जाने के प्रस्ताव को खारिज करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि हमें दान के तौर पर 5 एकड़ भूमि की आवश्यकता नहीं है। उच्चतम न्यायालय के फैसले से असंतुष्ट ओवैसी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय वस्तुत: सर्वोच्च है और अंतिम हैं, लेकिन उससे भी गलती हो सकती है। 

हैदराबाद में शनिवार रात एक जनसभा को संबोधित करते हुए एआईएमआईएम चीफ ने कहा था कि अगर बाबरी मस्जिद तब वैध थी तो इसकी जमीन उन्हें क्यों दी गई जिन्होंने इसे ढहाया। अगर यह अवैध थी तो इस पर मामला क्यों चल रहा है और आडवाणी के खिलाफ मामला वापस लिया जाए। अगर यह वैध है तो इसे मुझे दे दीजिए।

शनिवार ओवैसी ने कहा, यह एक मूलभूत सवाल है, हम लोग इस फैसले से खुश नहीं हैं। बाबरी मस्जिद मेरा कानूनी हक है। मैं मस्जिद के लिए लड़ाई लड़ रहा हूं, जमीन के लिए नहीं। रविवार को ओवैसी ने ट्वीट किया कि फिर आज एक मुस्लिम क्या देखता है? वहां कई साल से एक मस्जिद थी, जिसे ढहा दिया गया। अदालत ने उस कथित निष्कर्ष पर कि जमीन रामलला से संबंधित है, उस जगह पर निर्माण की इजाजत दी है।

उन्होंने एक और ट्वीट किया, जमीन (वैकल्पिक) देकर हमें अपमानित किया जा रहा है। हमारे साथ भिखारियों जैसा बर्ताव नहीं करें। हम लोग भारत के सम्मानित नागरिक हैं। यह लड़ाई कानूनी हक के लिए है। ओवैसी ने कहा हमने न्याय मांगा था, दान नहीं। अगर आपके घर को ढहा दिया जाए और आप न्याय मांगने जाएं तो आपको घर दिया जाएगा या नहीं। क्या इसे घर ढहाने वालों को दे दिया जाएगा? उन्होंने कहा कि उन्हें (मुस्लिमों को) मस्जिद के लिए लड़ाई लड़नी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि आज भी बीजेपी और आरएसएस के पास कई मस्जिदों की सूची है जिसे वे बदलना चाहते हैं।

ओवैसी ने कहा  कि संघ परिवार और बीजेपी देश को हिंदू राष्ट्र की ओर ले जा रहा है। जिन लोगों ने 1992 में बाबरी मस्जिद गिराई थी, उन्हीं लोगों को न्यास का गठन करने और राम मंदिर निर्माण शुरू कराने के लिए कहा गया है। उन्होंने आरोप लगाया, मोदी का दूसरा कार्यकाल भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए है और इस दृष्टिकोण की शुरूआत अयोध्या से हो गई है। बीजेपी और संघ इस फैसले का इस्तेमाल अब राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी), नागरिक संशोधन विधेयक जैसे अपने जहरीले एजेंडे को पूरा करने के लिए करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा, अदालत ने सहमति जताई है कि भारतीय पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में (विवादित स्थल पर) मंदिर होने का कहीं जिक्र नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि हम मस्जिद में नमाज अदा करते थे। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 142 में सुप्रीम कोर्ट को प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल अदालत द्वारा करने का औचित्य मुझे समझ में नहीं आता है। यह असामान्य है। हमलोग इससे संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि विवादित ढ़ांचा संघ परिवार और कांग्रेस की साजिश की भेंट चढ़ गया।

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