बिहार की राजनीति में 'भूत चैप्टर', वार और पलटवार में उलझे जेडीयू और आरजेडी

देश
ललित राय
Updated Jan 03, 2020 | 10:15 IST

क्या बिहार की राजनीति में काला जादू अभिन्न अंग है। दरअसल सीएम नीतीश कुमार ने जब इसका जिक्र किया तो आरजेडी के नेताओं ने भी पलटवार किया।

बिहार की राजनीति में 'भूत चैप्टर', वार और पलटवार में उलझे जेडीयू और आरजेडी
बिहार के सीएम हैं नीतीश कुमार 

मुख्य बातें

  • बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले जादू और टोटके का जिक्र
  • सीएम नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम में किया जिक्र, लालू यादव पर साधा निशाना
  • आरजेडी ने नीतीश कुमार पर भी लगाया काला जादू करने का आरोप

नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में भूत चैप्टर का क्या मतलब है। यह सवाल इसलिए उठ खड़ा हुआ है क्योंकि सीएम नीतीश कुमार ने 1 अणे मार्ग पर आधिकारिक निवास के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारी दी। नीतीश कुमार ने एक घटना को साझा किया जिस पर आरजेडी नेताओं की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई। लालू यादव के करीबियों में से एक शिवानंद तिवारी कहते हैं एक तरफ नीतीश कुमार अपने आपको तर्कवादी बताते हैं। लेकिन दूसरी तरफ से लालू से बदला लेने के लिए उन्होंने काले जादू का सहारा लिया था। ये बात अलग है कि बीजेपी भी इस मामले में कूद पड़ी और लालू यादव की आलोचना की। सवाल ये है कि मामला क्या है।

नव वर्ष मिलन कार्यक्रम में जादू- टोने का जिक्र
नए साल के मौके पर अनौपचारिक मिलन कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने 2005 की एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लालू यादव और राबड़ी देवी ने  एक अणे मार्ग वाले सीएम आवास में मिट्टी का टीला छोड़ने के साथ ही बंगले के कोनों में पुड़िया रखा था। सीएम नीतीश कुमार ने कथित तौर पर कहा कि मनमोहन सिंह सरकार में रेल मंत्री रहने के दौरान लालू प्रसाद यादव ने कहा था कि सीएम के आधिकारिक आवास में उन्होंने भूत छोड़ दिया है।

वार- पलटवार में जेडीयू- आरजेडी
नीतीश कुमार ने टोटके का जिक्र किया कि शिवानंद तिवारी भी पीछे नहीं रहे और कहा कि लालू यादव के मुताबिक नीतीश कुमार ने नुकसान पहुंचाने के लिए पटना स्थित दरभंगा हाउस के काली मंदिर में टोटका कराया था। जब इस बात की जानकारी मंदिर के पुरोहितों को लगी तो उन्होंने लालू यादव को जानकारी दी। टोटके की काट के लिए लालू जी की तरफ से भी कुछ अनुष्ठान कराया गया। लेकिन ये नहीं बता पाएंगे कि आखिर वो उपाय क्या था। 

जानकारों की राय
सवाल ये है कि सीएम नीतीश कुमार की तरफ से इस तरह का बयान क्यों आया। इस विषय पर जानकारों की राय बंटी हुई है। बिहार की राजनीति पर गहरी नजर रखने वाले सुकेश कुमार का कहना है कि नववर्ष के मौके पर लालू यादव पर नीतीश कुमार की टिप्पणी को हल्के अंदाज में लेना चाहिए। वो सामान्य तरह से लोगों के मनोरंजन के लिहाज से इस तरह की बात कर रहे थे। बिहार की राजनीति में इस तरह की बातें नेताओं द्वारा पहले भी की जाती रही है। लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि यह एक तरह से उन मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कवायद है जो ज्यादातर इस तरह की बातों में भरोसा करते हैं। 

आम लोगों की सोच
नीतीश कुमार के इस अंदाज पर राज्य के अलग अलग शहरों की राय भी जुदा है। पटना के रंजय कुमार कहते हैं यह सिर्फ हंसी ठिठोली है और उससे ज्यादा कुछ भी नहीं है। लेकिन भागलपुर के रहने वाले सुशांत की राय अलग है। उनका कहना है कि बिहार का समाज अभी भी पारंपरिक है, गंवई मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए इस तरह की बातें की जाती है। आम लोगों को दिलचस्पी होती है कि उनके नेताओं की निजी जिंदगी में किस तरह से उथल पुथल होता है।

 

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