आसाराम और नारायण साईं को मिली क्लीन चिट, 2 स्कूली बच्चों की मौत मामलें में आयोग ने पेश की रिपोर्ट

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Updated Jul 27, 2019 | 00:59 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

रिटायर न्यायाधीश डी के त्रिवेदी के नेतृत्व में एक आयोग का गठन किया गया था जो साबरमती नदी के किनारे मिले दो बच्चों के शव के मामले की जांच कर रहा था। ये दोनों बच्चे आसाराम के गुरुकुल में पढ़ते थे।

Asaram Bapu
आसाराम बापू (फाइल फोटो)  |  तस्वीर साभार: PTI

नई दिल्ली: आसाराम और उसके बेटे नारायण साई को उनकी ओर से चलाए जाने वाले गुरुकुल (आवासीय स्कूल) में पढ़ने वाले दो बच्चों की मौत के मामले में क्लीन चिट दे दी गई है। न्यायमूर्ति डी के त्रिवेदी के आयोग की ओर साल 2008 में हुई घटना के मामले की जांच की जा रही थी और अब पिता और बेटे को राहत मिली है। शुक्रवार को गुजरात विधानसभा में इस मामले को लेकर रिपोर्ट पेश की गई और इस रिपोर्ट को साल 2013 में राज्य सरकार को भी सौंपा गया था। 

मामले में आसाराम और नारायण साईं को तो क्लीन चिट मिल गई है लेकिन आयोग का यह भी कहना है कि बच्चों की मौत की घटना से प्रबंधन की लापरवाही झलकती है और इसे किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। बता दें कि आसाराम के गुरुकुल में पढ़ने वाले दो भाईयों दीपेश वाघेला (10 साल) और अभिषेक वाघेला (11 साल) के शव साल 2008 में साबरमती नदी के तट पर मिले थे। आवासीय स्कूल नदी के किनारे ही स्थित है और शव मिलने के दो दिन पहले दोनों भाई लापता हो गए थे। 

आसाराम और नारायण साईं पर आश्रम में तांत्रिक गतिविधियों को अंजाम देने के आरोप लगे थे हालांकि आयोग को इस बात के सबूत नहीं मिले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि गुरुकुल के प्रबंधन के अलावा बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्राधिकारियों पर भी है। साथ ही यह भी कहा गया है कि सबूत के हेर फेर को देखते हुए लगता है कि स्कूली प्रबंधन की ओर से लापरवाही बरतने के कारण घटना हुई।

बच्चों के परिजनों के आरोप के अनुसार आसाराम और नारायण साईं ने बच्चों पर काला जादू किया और इसी वजह से उनकी मौत हुई। आयोग का कहना है कि मेडिकल सबूत मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि बच्चों की मौत डूबने से हुई। ऐसी अटकलें लगाई गई थीं कि बच्चों के अंगों को निकाला गया था लेकिन शव से कोई भी अंग लापता नहीं पाया गया है। आसाराम के खिलाफ उग्र प्रदर्शनों के बाद साल 2008 के जुलाई महीने में रिटायर न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी के त्रिवेदी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। आसाराम अपने ऊपर लगे आरोपों को बदनाम करने की साजिश बताता रहा है।

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