What is Ayodhya case: 1813 में पहली बार उठा था राम मंदिर का मुद्दा, जानें पूरी टाइम लाइन

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Updated Nov 08, 2019 | 23:53 IST

Ayodhya case timeline: राम जन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद सदियों पुराना है, जो समय-समय पर धार्मिक और राजनीतिक संघर्ष की वजह बनता रहा है। जानें इस मामले में कब क्‍या हुआ

Ayodhya case timeline:
Ayodhya case timeline 

नई दिल्ली : अयोध्या में राम जन्‍म भूमि और बाबरी मस्जिद का विवाद करीब 500 वर्ष पुराना है, जिसकी शुरुआत 1528 से ही मानी जाती है, जब भारत में मुगलों का शासन था। आरोप है कि बाबर के शासनकाल में यहां राम मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण कराया गया, जो आगे चलकर बाबरी मस्जिद के नाम से मशहूर हुआ। देश में मुगल शासनकाल को देखते हुए लगभग तीन सदी तक यहां इसके खिलाफ उठने वाली आवाजें बहुत असरदार नहीं रहीं। लेकिन अंग्रेजों के भारत आगमन और यहां के कारोबार व सत्‍ता प्रतिष्‍ठानों में उनके प्रभावी दखल के बीच धीरे-धीरे मुगलों का प्रभाव कमजोर होता गया और फिर शुरू हुआ जमीन के मालिकाना हक का विवाद।

इसकी शुरुआत 1813 से ही मानी जाती है, जब हिन्‍दू और मुस्लिम, दोनों पक्ष के लोगों ने अयोध्‍या की इस जमीन के टुकड़े को लेकर अपने-अपने हक के लिए आवाज उठाई। हिन्‍दुओं और मुसलमानों के बीच इस विवाद का समाधान अंग्रेज भी नहीं कर पाए और धीरे-धीरे यह धार्मिक व राजनीतिक संघर्ष की वजह बनता गया, जिसने खासकर 1990 के दशक के बाद देश के सामाजिक ताने-बाने को भी गहरे प्रभावित किया, जब वर्ष 6 दिसंबर, 1992 में कारसेवकों ने अयोध्‍या में मस्जिद ढाह दी थी। यह मामला धार्मिक रूप से संवेदनशील रहा तो देश की राजनीतिक दिशा भी इसने काफी हद तक तय की। जानें इस जटिल विवाद में कब कहां क्‍या मोड़ आया:

1528 : मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया, जो मुगल शासक बाबर का कमांडर था।

1885: महंत रघुबीर दास ने फैजाबाद की अदालत में याचिका दायर कर विवादित राम-जन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद ढांचे के बाहर मंदिर की शक्‍ल शक्‍ल में मंडप बनाने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

1949: मस्जिद की मुख्‍य गुंबद के नीचे राम लला की मूर्ति रखी मिली।

1950: राम लला की पूजा की अनुमति के लिए गोपाल सिमला विशारद ने फैजाबाद की अदालत में याचिका दायर की।

1950: परमहंस रामचंद्र दास ने भीतर राम लला की मूर्ति रखे रहने और इसकी पूजा जारी रखने की अनुमति की मांग को लेकर याचिका दायर की।

1959: निर्मोही अखाड़ा ने इस जगह पर नियंत्रण के लिए याचिका दी।

1981: उत्‍तर प्रदेश सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड ने इस जगह को अपने नियंत्रण में लेने के लिए याचिका दी।

1984: बाबरी मस्जिद तक हिन्‍दुओं की पहुंच सुनिश्‍चित करने के लिए विश्‍व हिन्‍दू परिषद ने जनसमर्थन अभियान शुरू किया।

1986: फैजाबाद की अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह विवादित स्‍थल को हिन्‍दुओं की पूजा-अर्चना के लिए खोल दे। मामले के निपटारे के लिए उसी साल बाबरी मस्जिद एक्‍शन कमेटी का गठन हुआ।

1989: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित ढांचे पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। उसी साल विहिप को विवादित स्‍थल के करीब भूमि पूजन की अनुमति दी गई। तब केंद्र में राजीव गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस की सरकार थी।

1990 : बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता लालकृष्‍ण आडवाणी ने रथ यात्रा निकाली, जब अयोध्‍या की ओर जाते समय बिहार के समस्‍तीपुर में उन्‍हें रोककर हिरासत में ले लिया गया। तब बिहार में लालू प्रसाद मुख्‍यमंत्री थे।

1992: कार सेवकों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद को ढाह दिया और वहां एक अस्‍थाई मंदिर का निर्माण किया। मस्जिद ढहाए जाने की घटना के बाद देशभर में सांप्रदायिक दंगे हुए, जिसमें लगभग 2,000 लोगों की जान गई। तब प्रधानमंत्री पी. वी. नरसिम्‍हा राव की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने मामले के निपटारे के लिए जस्टिस एम एस लिब्रहान की अध्‍यक्षता में आयोग का गठन किया।

1993: विवादित भूमि के केंद्र द्वारा अधिग्रहण के लिए एक प्रस्‍ताव पारित किया गया, जिसे Acquisition of Certain Area at Ayodhya Act नाम दिया गया। इसे चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गईं, जिसमें इस्‍माइल फारूकी द्वारा दायर याचिका भी शामिल है। इसमें अधिनियम के कई पहलुओं को चुनौती दी गई।

1994: ऐतिहासिक इस्‍माइल फारूकी केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मस्जिद इस्‍लाम का अभिन्‍न हिस्‍सा नहीं है।

2002: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसकी सुनवाई शुरू की कि जमीन पर मालिकाना हक किसका है।

2003: एक केस की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिगृहित भूमि पर किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती।

2010 : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2-1 के बहुमत से दिए फैसले में विवादित स्‍थल को तीन भागों में बांटने का आदेश दिया। कोर्ट ने जमीन का एक हिस्‍सा सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड, दूसरा हिस्‍सा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा हिस्‍सा राम लला विराजमान, जिसका प्रतिनिधित्‍व हिन्‍दू महासभा ने किया, को देने का निर्देश दिया।

2011: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। कोर्ट का यह फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती पर आया।

2016: सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर विवादित भूमि पर राम मंदिर बनाने की अनुमति मांगी।

2017: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जे एस खेहर ने सभी पक्षकारों से आपसी बातचीत के जरिये और सौहार्दपूर्ण तरीके से मामले का निपटारे करने को कहा। उसी साल कोर्ट ने तीन सदस्‍यीय बेंच का गठन किया। इस बीच यूपी शिया सेंट्रल बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अयोध्‍या में मंदिर का निर्माण किया जा सकता है, जबकि मस्जिद का निर्माण लखनऊ में किया जा सकता है।

2018: सुप्रीम कोर्ट ने सिव‍िल अपीलों पर सुनवाई शुरू की।

2019: सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता में 5 जजों की संविधान पीठ का गठन किया, जिसमें जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एस ए बोबडे और जस्टिस एनवी रमन्ना को शामिल किया गया।

  • हालांकि मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन द्वारा सवाल उठाए जाने पर जस्टिस यूयू ललित ने खुद को इससे अलग कर लिया। राजीव धवन ने इस पर आपत्ति जताई थी कि 1994 में इसी केस में जस्टिस यूयू ललित ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की कोर्ट में पैरवी की थी।
  • जस्टिस के सुनवाई से अलग होने के बाद नई टीम का गठन किया गया, जिसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावे जस्टिस एस ए बोबडे, डी वाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस ए नजीर को शामिल किया गया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने मध्‍यस्‍थता के जरिये मामले के निपटारे पर जोर दिया, पर इसकी संभावना नहीं देखते हुए अगस्‍त 2019 में कहा कि मध्यस्थता के जरिए इस केस को नहीं सुलझाया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने 6 अगस्त से रोजाना इस मामले की सुनवाई तय की।
  • 16 अक्‍टूबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी हो गई।
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