BHU Firoze Khan row: परेश रावल बोले-इस 'लॉजिक' की मानें तो मोहम्मद रफी को भजन नहीं गाना चाहिए था

देश
आलोक राव
Updated Nov 20, 2019 | 14:27 IST

Paresh Rawal on BHU Firoze Khan row : बीएचयू में सहायक प्रोफेसर पद पर फिरोज खान की नियुक्ति पर उठे विवाद पर अभिनेता एवं भाजपा सांसद परेश रावल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

BHU Firoze Khan row: Paresh Rawal Support Muslim Professor Firoze Khan परेश रावल बोले-इस 'लॉजिक' की मानें तो मोहम्मद रफी को भजन नहीं गाना चाहिए था
Firoze Khan row: परेश रावल ने बीएचयू में फिरोज खान की नियुक्ति का समर्थन किया है।   |  तस्वीर साभार: PTI

मुख्य बातें

  • बीएचयू के संस्कृत विभाग में सहायक पद पर हुई है फिरोज खान की नियुक्ति
  • फिरोज खान की नियुक्ति का संस्कृत विभाग के छात्र कर रहे हैं विरोध
  • खान ने संस्कृत में पीएचडी और नेट एवं जेआरएफ परीक्षा पास की है

नई दिल्ली : अभिनेता एवं भाजपा सांसद परेश रावल ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्कृत विभाग में सहायक प्रोफेसर पद पर फिरोज खान की नियुक्ति पर उठे विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। अभिनेता ने कहा है कि वह खान की नियुक्ति के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शन को देखकर हैरान हैं। उन्होंने कहा है कि 'इस तरह की बेतुकी बातें बंद होनी चाहिए क्योंकि भाषा का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।' बता दें कि गत सात नवंबर को बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान (एसवीडीवी) में खान की नियुक्ति सहायक प्रोफेसर पद पर हुई। तब से संकाय के छात्र इस नियुक्त का विरोध कर रहे हैं।
 
अभिनेता ने अपने ट्वीट में कहा, 'सहायक प्रोफेसर फिरोज खान के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शन को देखकर मैं हैरान हूं। भाषा का धर्म से क्या मतलब। विडंबना है कि फिरोज ने अपनी पीएचडी संस्कृत में की है। भगवान के लिए इस तरह की बेतुकी बातें बंद करिए!' अपने एक और ट्वीट में अभिनेता ने कहा, 'खान की नियुक्ति के खिलाफ जो तर्क दिया जा रहा है, अगर उस तर्क को मान लिया जाए तो मोहम्मद रफी को कोई भजन नहीं गाना चाहिए था और नौशाद साब को भजन नहीं लिखनी चाहिए थी।'

फिरोज की इस नियुक्त के खिलाफ संकाय के छात्र वीसी दफ्तर के सामने विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि खान की नियुक्ति वापस होने के बाद ही वे अपना प्रदर्शन समाप्त करेंगे। इस बीच, विश्वविद्यालय के वीसी मंगलवार को प्रदर्शनकारी छात्रों से मिले और उन्हें बताया कि खान की नियुक्ति यूजीसी के नियमों एवं बीएचयू एक्ट के हिसाब से हुई है।

इस पूरे विवाद पर फिरोज खान ने एक समाचार पत्र के साथ बातचीत में कहा कि अपनी नियुक्त पर उठे विवाद से वह क्षुब्ध हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने कक्षा दो से संस्कृत पढ़ाई की है और मैंने कभी यह खुद को महसूस नहीं होने दिया कि मैं एक मुसलमान हूं लेकिन आज मेरे धर्म को मुद्दा बना दिया गया है।' उन्होंने कहा, 'मैं जितना संस्कृत जानता हूं उतना कुरान भी नहीं जानता।'  

खान की नियुक्त के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने कहा, 'कोई व्यक्ति यदि हमारी संस्कृति एवं भावनाओं से नहीं जुड़ा होगा तो वह हमारे धर्म और हमें कैसे समझेगा।' छात्र संस्कृत विभाग में खान की नियुक्ति को गलत बता रहे हैं। खान मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। इनके पिता भी संस्कृत में स्नातक हैं। छात्रों के इस विरोध-प्रदर्शन के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन खान के समर्थन में खड़ा है और उनकी नियुक्ति को सही बताया है।

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