शहीद भगत सिंह की जयंती पर सिर्फ श्रद्धांजलि काफी नहीं, जीवन में उतारें उनके ये विचार

देश
Updated Sep 28, 2019 | 12:37 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

जीवन में उतारें शहीद क्रांतिकारी के विचार क्योंकि खुद संघर्ष से कतराकर पड़ोस में भगत सिंह पैदा होने की सोच के जरिए कल्याणकारी बदलाव नहीं लाए जा सकते।

Bhagat Singh
भगत सिंह (फाइल फोटो)  |  तस्वीर साभार: BCCL

नई दिल्ली : आज देश शहीद भगत सिंह को देश याद कर रहा है। देश आजादी की लड़ाई लड़ने वाले वीर सपूत की जयंती मना रहा है। साल 1907 में 28 सितंबर के दिन ही भगत सिंह का जन्म हुआ था और आज उनके जन्म को 112 साल पूरे हो गए हैं। जयंती पर पर देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है और आजादी के आंदोलन में उनके योगदान को याद कर रहा है। लेकिन क्या भगत सिंह के जन्मदिवस पर उन्हें याद करके प्रतिमा पर फूलमाला चढ़ाना ही काफी होगा?

शायद नहीं क्योंकि वास्तव में अगर हम उनके व्यक्तित्व और विचारों को याद रखे बिना भगत सिंह को याद करते हैं तो उन्हें दी गई श्रद्धांजलि महज एक औपचारिकता होगी। यहां हम आज आपको भगत सिंह के कुछ ऐसे विचार बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप भगत सिंह की जयंती पर देश के वीर सपूत को सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। 

  • आज से 87 साल पहले दुनिया छोड़कर जा चुके भगत सिंह के विचार, उनका व्यक्तित्व आज भी अमर है। वास्तव में उन्होंने अपनी ही कही एक बात को चरितार्थ किया कि 'मौत इंसान की होती है, विचारों की नहीं।' ये उनके विचार ही हैं जिन्होंने उन्हें लोगों के दिलोदिमाग में आज भी जिन्दा रखा है। उन्होंने अंग्रेजों के बारे में भी कहा था कि 'वह मेरे सिर को कुचल सकते हैं, विचारों को नहीं। मेरे शरीर को कुचल सकते हैं, मेरे जज्बे को नहीं'।
  • भगत सिंह ने अंग्रेजी संसद में बम गिराने के बारे में बात करते हुए कहा  कि 'बहरों से अपनी बात कहने के लिए आवाज बुलंद होनी चाहिए।' उनका कहना था  हम किसी को मारने के बजाय बम गिराकर अंग्रेजी हुकूमत को जगा रहे थे कि अब उनके भारत छोड़ने का समय आ गया है। उन्होंने अपना बलिदान देकर भी यही बात साबित की। आजादी की जिस आवाज के सुर अंग्रेजों के सामने धीमे थे, देश के भगत सिंह की मौत से आहत होने के बाद वह आवाज मुखर हो उठी और अंग्रेजों को कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। 
  • भगत सिंह हमेशा से बदलाव के हिमायती रहे। उन्होंने इस बात का जिक्र करते हुए कहा था, 'लोग हालात के अनुसार जीने की आदत डाल लेते हैं। बदलाव के नाम से डरने लगते हैं। ऐसी सोच को क्रांतिकारी विचारों से बदलने की जरूरत है।
  • भगत सिंह अपने दम पर जिंदगी जीने के हिमायती थे। उनका कहना था 'जिंदगी अपने दम पर जी जाती है। दूसरों के कन्धों पर तो जनाजे उठते हैं।' अपनी इस बात से भगत सिंह देश के युवाओं के स्वाभिमान को आज भी ललकारते नजर आते हैं।
  •  आजादी के मतवाले सरदार भगत सिंह मुखर होकर अपनी बात कहने के हिमायती थे। उनका कहना था 'जो शख्स विकास का समर्थन करता है, उसे हर रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी और चुनौती देकर अपनी बात को जताना भी होगा।'

देश की आजादी के लिए भगत सिंह के जुनून के कई किस्से सुनने को मिलते हैं। कहते हैं कि जलियावाला बाग में हुए नरसंहार से वह इतने आहत हो गए थे कि घर से कई मील दूर पैदल चलकर घटना स्थल तक पहुंच गए थे। आज इस बात पर विचार किए जाने करने की जरूरत है कि सामाजिक हित और एक- दूसरे के कल्याण के लिए ऐसे जुनून की मौजूदगी और गुंजाइश आज लोगों के बीच है या नहीं। क्योंकि खुद संघर्ष से कतराकर पड़ोस में भगत सिंह के पैदा होने की सोच के जरिए कल्याणकारी बदलाव नहीं लाए जा सकते।

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