एक फैसला जिसका सबको है इंतजार, जानें बाबर और मीर बाकी के बीच कौन था दूसरा मीर बाकी

देश
Updated Nov 04, 2019 | 11:29 IST

ayodhya title suit case: अयोध्या की सरजमीं पर करीब पांच सौ साल पहले एक ऐसे विवाद की नींव पड़ी जो अभी तक अनसुलझी है। आस्था और दावे की लड़ाई में अब अदालती फैसले का इंतजार है।

ayodhya title case
अयोध्या मामले में सुनवाई के बाद अब फैसले का इंतजार 

मुख्य बातें

  • अयोध्या टाइटल सूट केस में 40 दिन तक हुई सुनवाई
  • सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जस्टिस की है संवैधानिक पीठ
  • मध्यस्थता नाकाम रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई थी सुनवाई

नई दिल्ली। अयोध्या टाइटल सूट केस में फैसले की तारीख अब करीब आ रही है। इससे पहले हिंदू और मुस्लिम पक्षों से जुड़े सभी संगठनों ने शांति की अपील की है। आरएसएस का कहना है कि फैसले को फैसले की तरह देखने की जरूरत है ना तो उसमें किसी की हार होगी या ना किसी की जीत। सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों की तरफ से जो दलीलें पेश की गईं उसमें मुस्लिम पक्ष ने माना कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम के अस्तित्व को वो मानते हैं। ऐसे में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद से जुड़े तीन ऐसे किरदार हैं जिनके बारे में जानना जरूरी है। इस केस में दो नाम सामने आते हैं जिसमें मुगल बादशाह बाबर और उसका सेनापति मीर बाकी था। इसके साथ ही एक और नाम था जिसे मीर बाकी कहते हैं हालांकि वो बाबर का सेनापति नहीं था बल्कि एक ठेकेदार था। यहां पर इन तीनों किरदारों के बारे में जानना जरूरी है। 
बाबर
मुगल बादशाह बाबर का पूरा नाम जहीरूद्दीन मुहम्मद बाबर था। बाबर के समय में ही अयोध्या में मस्जिद अस्तित्व में आई। 1483 में बाबर का जन्म हुआ था और 12 वर्ष की उम्र में वो अपने पिता का वारिस बना। 21 अप्रैल 1526 को पानीपत की पहली लड़ाई में उसने लोदी सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराया और सल्तनत को खत्म कर नए साम्राज्य की नींव रखी। बाबर की खासियत ये थी कि हिंदुस्तान की सरजमीं पर जब उसने कदम रखा तो हर एक घटना को उसने लिखना शुरू किया था जो कई शताब्दियों तक गुम रहने के बाद बाबरनामा के रूप में सामने आई। लेकिन बाबरनामा में 18 वर्ष का रिकॉर्ड गायब है और बाबरनामा में मस्जिद का जिक्र नहीं है। बाबरनामा में वो 25 मई 1529 के एक वाकये का वो कुछ इस तरह जिक्र करता है। बाबर लिखता है कि एक रात जब पांच घड़ियां बीत चुकी थी और वो लिखने में मशगूल था। उस वक्त तेज आंधी आई, वो अपनी चीजें संभाल पाता कि तंबू धसक गई जिसमें उसके सिर में चोट आई। डायरी के पन्ने इधर उधर बिखर गए। बड़ी मुश्किल से वो अपनी डायरी संभाल पाया। बता दें कि बाबरनामा तुर्की भाषा में लिखी गई थी जिसका अकबर ने फारसी में अनुवाद कराया था। 
मीर बाकी
यह वो शख्स है जिसे मंदिर का विध्वंसक कहा जाता है। मीर बाकी, बाबर का सेनापति था और शिया समुदाय से ताल्लुक रखता था। इस संबंध में यूपी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी कहते हैं कि इसमें दो मत नहीं कि मीर बाकी ने विवाद के बीज बोए थे। मीर बाकी उजबेकिस्तान के ताशकंद का रहने वाला था और बाबर ने उसे अवध का गवर्नर बनाया था। बाबरनामा में मीर बाकी का जिक्र बाकी ताशकंदी के तौर पर किया गया है। बताया जाता है कि मीर बाकी ने 1528-29 के दौरान राम मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनवाया था। लेकिन बिबन और बयाजिद के खिलाफ लड़ाई में लखनऊ का किला गंवाने की वजह से बाबर उससे नाराज हो गया था। 1529 में जून के महीने में बाबर ने उसे शाही फौज यानि मुगल सेना से निकाल दिया। 
मीर बाकी
बाबर के सेनापति मीर बाकी के अलावा एक और शख्स था जिसे मीर बाकी कहते हैं और वो ठेकेदार था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और अयोध्या से जुड़े प्रंसगों तक गहराई तक जाने वाले किशोर कुणाल अपनी किताब अयोध्या एब्यूज्ड बियांड एडवांस में इस ठेकेदार का जिक्र करते हैं। वो बताते हैं कि 1934 में सांप्रदायिक दंगे में मस्जिद को नुकसान पहुंचाया गया और बाद में उसका पुनर्निमाण कराया गया इस काम को जिस ठेकेदार ने अंजाम दिया उसका भी नाम मीर बाकी था। बताया जाता है कि ऐसा हो सकता है कि पुनर्निमाण के बाद उसने अपने नाम की पट्टिका लगा ली हो और जनसामान्य में यह धारणा बलवती हुई कि बाबर के सेनापति मीर बाकी ने मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई थी। 

डिस्क्लेमर: इस प्रस्तुत लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं और टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।

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