Ram Mandir Hearing : 40 दिन तक चले तर्कों के तीर, हिंदू-मुस्लिम पक्ष की ये रही दलीलें

देश
श्वेता कुमारी
Updated Nov 09, 2019 | 12:56 IST

Ram Mandir-Babri Masjid Hearing: अयोध्‍या में राम जन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 40 दिनों तक रोजाना आधार पर सुनवाई हुई। जानें हिन्‍दू व मुस्लिम पक्षकारों ने क्‍या कहा:

Ayodhya case 40 days hearing in Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्‍या केस की सुनवाई 40 दिनों तक चली 

नई दिल्ली : सदियों पुराने राम जन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में सभी को अब सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया है। इससे पहले अयोध्‍या की 2.77 एकड़ भूमि के मालिकाना हक को लेकर देश की शीर्ष अदालत में 40 दिनों तक लगातार सुनवाई हुई, जिस दौरान सभी पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्‍यीय संविधान पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

धार्मिक रूप से संवेदनशील और राजनीतिक रूप से बेहद चर्चित इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में रोजाना आधार पर सुनवाई 6 अगस्‍त से शुरू हुई, जो 16 अक्‍टूबर को पूरी हुई। इस दौरान पहले 18 दिनों ने हिन्‍दू पक्ष के वकीलों ने दलीलें पेश की, जिसके बाद मुस्लिम पक्ष की बारी आई। हिन्‍दू पक्ष की आरे से जहां के. परासरन ने दलीलें पेश कीं, वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन ने दलीलें रखीं। आइये, जानें 40 दिनों की सुनवाई में हिन्‍दू व मुस्लिम पक्ष की ओर से क्‍या महत्‍वपूर्ण बातें कही गईं:

हिंदू पक्ष की दलीलें

  • हिंदू पक्ष के वकील ने अयोध्‍या में विवादित स्‍थल पर मस्जिद बनाए जाने को ऐतिहासिक भूल करार देते हुए कहा कि इसे सुधारने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि मुसलमान किसी भी मस्जिद में नमाज पढ़ सकते हैं, लेकिन भगवान राम का जन्मस्थान नहीं बदला जा सकता।
  • हिंदू पक्ष के वकीलों ने कहा कि मस्जिद के नीचे मंदिर का ढांचा पाया गया है और पुरातात्विक सर्वेक्षण भी इसकी पुष्टि करते हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि मंदिर का जो ढांचा मिला है, उसमें कमल, परनाला और वृत्ताकार श्राइन मिले हैं, जो इसकी पुष्टि करते हैं कि वहां लोग सदियों से पूजा-अर्चना करते रहे हैं।
  • हिंदू पक्ष की ओर से स्कंद पुराण का भी जिक्र किया गया और कहा गया कि इसमें यह कहा गया है कि भगवान राम के जन्मस्थान पर जाने भर से मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए हिन्‍दुओं के लिए यह जगह खास है।
  • हिन्‍दू पक्ष की ओर से 'अयोध्या महात्म्य' जैसे शास्त्रों और कई यात्रा वृतांतों का भी उल्लेख किया गया और कहा गया कि हिंदू यहां पुराकाल से उपासना करते आ रहे हैं।
  • हिन्‍दू पक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि तीन गुंबद वाले ढांचे को मस्जिद नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इसमें मस्जिद की विशेषताएं नहीं थीं। उन्‍होंने यह भी कहा कि भगवान राम के जन्मस्थान पर पूजा करने का अधिकार लोगों से नहीं छीना जा सकता

मुस्लिम पक्ष की दलीलें

  • मुस्लिम पक्ष ने कहा कि लोगों को धर्म के नाम पर उकसाया गया, रथयात्राएं निकाली गईं और अदालतों में लंबित मामलों को लेकर दबाव बनाया गया।
  • मुस्लिम पक्षकारों ने कहा कि पहले बाहरी आंगन के राम चबूतरे पर पूजा होती थी, लेकिन 1949 में मूर्ति को बाहरी आंगन से हटाकर अंदर के आंगन पर मुख्‍य गुंबद के नीचे रख दिया गया।
  • मुस्‍लि‍म पक्ष के वकील ने कहा कि बाबरी मस्जिद के भीतर देवी-देवताओं की प्रतिमा का प्रकट होना कोई चमत्कार नहीं था, बल्कि इन्‍हें मिलीभगत कर 22 दिसंबर, 1949 की रात सुनियोजित तरीके से रखा गया।
  • मुस्लिम पक्ष ने पहले एएसआई की रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे, पर बाद में उन्‍होंने इस पर माफी मांगी। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने राम चबूतरा को जन्‍मस्‍थान कहा, पर बाद में इससे पलट गया।
  • मुस्लिम पक्ष ने हिन्‍दू पक्ष की इस दलील को खारिज किया कि 1934 के बाद विवादित ढांचे में रोजाना नमाज नहीं पढ़ी गई। उन्‍होंने कहा कि 1934 के बाद भी बाबरी मस्जिद में नमाज पढ़ी गई थी।

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