Ram Mandir-Babri Masjid Case: फैसला आने से पहले राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के बारे में जानें जरूरी बातें

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Updated Nov 08, 2019 | 16:19 IST

Ram Mandir-Babri Masjid Case : गत छह दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस कर दिया। इसके बाद देश भर में कई जगहों पर तनाव फैल गया और सांप्रदायिक झड़पें हुईं।

Ayodhya Case: what is ram mandir babri masjid title case
अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला।  |  तस्वीर साभार: PTI

मुख्य बातें

  • अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है, 17 नवंबर से पहले फैसला आने की उम्मीद
  • अयोध्या केस में हैं तीन पक्षकार, निर्मोही अखाड़ा, राम लला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड
  • विवादित जमीन पर मालिकाना हक पर सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा अपना ऐतिहासिक फैसला

नई दिल्ली : अयोध्या केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला 17 नवंबर से पहले आ जाएगा। पूरा देश शीर्ष अदालत के इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद की ऐतिहासिक सुनवाई वर्षों तक कानून की चौखट पर हुई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार और प्रशासन सतर्क हैं और समाज में सद्भाव एवं शांति कायम रखने के लिए कदम उठाए गए हैं। हिंदू और मुस्लिम दोनों धार्मिक संगठनों के लोगों ने एक सुर में कहा है कि अयोध्या केस में आने वाले फैसले को वह खुले दिल से स्वीकार करेंगे। 

गत छह दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस कर दिया। इसके बाद देश भर में कई जगहों पर तनाव फैल गया और सांप्रदायिक झड़पें हुईं। 1992 से पहले अयोध्या विवाद की सुनवाई निचली अदालतें करती रही हैं। साल 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस केस की सुनवाई करते हुए विवादित 2.77 एकड़ जमीन को निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी वक्फ बोर्ड और रामलला विराजमान के बीच बराबर हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया। हाई कोर्ट के इस फैसले को 14 याचिकाओं के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। इन याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब अदालत के इस फैसले का सभी को इंतजार है। आइए कुछ प्वाइंट में समझें कि यह विवाद है क्या-

क्या है राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद?
महाकाव्य रामायण के मुताबिक मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म सरयू नदी के तट पर स्थित अयोध्या में हुआ। हिंदू समुदाय का मानना है कि भगवान राम का जिस स्थान पर जन्म हुआ उस स्थान को गौरवान्वित करने वाला एक भव्य मंदिर था। हिंदू पक्ष का मानना है कि साल 1528 में पहले मुगल शासक बाबर द्वारा इस मंदिर को गिराकर उस स्थान पर बाबरी मस्जिद का निर्माण किया गया। इस बाबरी मस्जिद को कारसेवकों ने छह दिसंबर 1992 को गिरा दिया। जिस स्थान पर राम मंदिर अथवा मस्जिद थी, उस स्थान पर मालिकाना हक किसका बनता है, यही विवाद है। सुप्रीम कोर्ट इसी 2.77 एकड़ की विवादित भूमि पर मालिकाना हक का फैसला करेगा।

विवाद में कौन-कौन हैं पक्षकार?
अयोध्या केस के टाइटिल सूट में तीन मुख्य पक्षकार निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी वक्फ बोर्ड और राम लला विराजमान हैं। निर्मोही अखाड़ा देवस्थान का प्रबंधक है और यह वर्षों से भगवान राम की पूजा करते आ रहे हैं। निर्मोही अखाड़ा राम मंदिर के प्रबंधन और संचालन के मालिकाना हक का दावा करता है। उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड राज्य की सभी वक्फ संपत्तियों का देखभाल करता है। सुन्नी वक्फ बोर्ड का दावा है कि विध्वंस से पहले बाबरी मस्जिद में नमाज अता की जाती रही है। बोर्ड का यह भी दावा है कि मस्जिद का निर्माण मंदिर को गिराकर नहीं हुआ। अयोध्या विवाद केस में राम लला विराजमान साल 1989 में पक्षकार बने। इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज देवकी नंदन अग्रवाल ने राम लला के मित्र के रूप में अदालत का रुख किया और उनकी तरफ से पक्ष रखा। राम लला विराजमान का भी दावा है कि बाबरी मस्जिद से पहले इस स्थान पर मंदिर हुआ करता था। 

विवाद का कानूनी इतिहास
साल 1822 में फैजाबाद कोर्ट के अधिकारी ने दावा किया कि मंदिर की जगह मस्जिद बनाई गई। कोर्ट ने मुकदमे को खारिज कर दिया।  दिसंबर 1949 में हिंदू कार्यकर्ताओं ने विवादित ढांचे में राम की मूर्तियां रख दीं जिसके बाद तनाव फैल गया। कुछ साल बाद हिंदू और मुस्लिम समूह ने जमीन एवं ढांचे पर अपना-अपना दावा किया। 37 साल के बाद 1986 में फैजाबाद जिले के न्यायाधीश ने बाबरी मस्जिद का गेट खोलने का आदेश दिया और हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति दी। राजीव गांदी की सरकार ने विवादित जगह पर शिलान्यास करने की अनुमति दी। विश्व हिंदू परिषद ने बाबरी मस्जिद के बगल में राम मंदिर की आधारशिला रखी। 1990-91 में लालकृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर के लिए 'रथ यात्रा' शुरू की। छह दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद गिरा दी। सितंबर 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विवादित भूमि को निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी वक्फ बोर्ड और राम लला विराजमान के बीच बराबर हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया। इसके बाद तीनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सितंबर-अक्टूबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने 40 दिनों तक अयोध्या केस की रोजाना सुनवाई की और सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

क्या कहता है भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग
हाई कोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने विवादित स्थल की खुदाई की और 2003 की अपनी रिपोर्ट में कहा कि बाबरी मस्जिद के ठीक नीचे उसे मंदिर का ढांचा और अवशेष मिले। विभाग ने कहा कि खुदाई में जो खंभे और दीवारें मिलीं वे मंदिर जैसे ढांचे के हैं।  

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