क्या अपने फायदे के लिए कायदा बिगाड़ रहे हैं सपा के राज्यसभा सांसद? 

देश
Updated Aug 14, 2019 | 21:23 IST | मनोज यादव

 जो लोग सपा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो रहे हैं, उन्हें अब यह लग रहा है कि सपा के साथ रहने से कोई फायदा नहीं है। 

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ऐसी संभावना जताई जा रही है कि अभी और लोग राज्यसभा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो सकते हैं 

मुख्य बातें

  • अभी तक तीन राज्यसभा सांसद सपा का साथ छोड़कर भाजपा मे शामिल हो चुके हैं
  • पू्र्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर ने पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की
  • अभी और लोग राज्यसभा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो सकते हैं ऐसी संभावना जताई जा रही है

समाजवादी पार्टी के सांसदों की संख्या राज्यसभा में लगातार घटती जा रही है। अभी तक एक-एक करके तीन राज्यसभा सांसद सपा का दामन छोड़कर भारतीय जनता पार्टी के साथ चले गए हैं, जिसमें से एक को समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का प्रत्याशी भी घोषित कर दिया है। जो लोग सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं, वो अखिलेश यादव के बहुत करीबी थे।

सबसे पहले पू्र्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर ने पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। उसके बाद सपा के कोषाध्यक्ष संजय सेठ और सुरेंद्र नागर ने पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि अभी और लोग राज्यसभा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। 

सूत्रों के हवाले से काफी पहले ही यह खबर लीक हो गई थी कि समाजवादी पार्टी के चार राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। दरअसल, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के पास केवल 47 विधायक हैं, जिनके बल पर समाजवादी पार्टी केवल एक राज्यसभा सांसद की सीट पर जीत दर्ज कर सकती है।

इसलिए समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसदों को यह लग रहा है कि इस पार्टी में रहते हुए वो दोबारा राज्यसभा में नहीं पहुंच सकते हैं। इसलिए उस पार्टी में जा रहे हैं जिसको राज्यसभा में बहुमत की दरकार है और उत्तर प्रदेश में भरपूर विधायक हैं, जिनके बल वो फिर से चुनकर राज्यसभा में पहुंच सकते हैं। 

भारतीय जनता पार्टी के पास लोकसभा में अकेले दम पर पूर्ण बहुमत है। अब राज्यसभा में भी वो अकेले दम पर पूर्ण बहुमत में आना चाहती है। जिसके लिए यह सारी कवायदें की जा रही हैं। राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल जब तक रहता और वो दूसरी पार्टी में रहते तो यह कत्तई संभव नहीं था कि राज्यसभा में भाजपा पूर्ण बहुमत आ पाती।

ऐसे में भाजपा की तरफ से यह कदम उठाए जा रहे हैं कि विपक्षी दलों के सांसदों को अपनी तरफ करके उन्हें बचे हुए कार्यकाल के लिए राज्यसभा में भेज दिया जाएगा, जिससे राज्यसभा में पार्टी के पास पूर्ण बहुमत भी आ जाएगा और विपक्षी कमजोर भी होंगे। अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि समाजवादी पार्टी के दो राज्यसभा सांसद भारतीय जनता पार्टी के आलाकमान के संपर्क में हैं, जिनमें दो नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आ रहे हैं। पहला नाम है विशंभर प्रसाद निषाद का और दूसरा नाम है हरिमोहन सिंह यादव के बेटे सुखराम सिंह यादव का।

दोनों ही उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं। यह भी संभव है कि दोनों ही लोग राज्यसभा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो जाएं या इनमें से कोई एक भाजपा की सदस्यता ग्रहण करे। दोनों ही अपनी-अपनी बिरादरी के दिग्गज नेता माने जाते हैं। इनके भाजपा में आने से दोनों ही बिरादरी के वोट में सेंध लगना तय माना जा रहा है। जिससे अखिलेश यादव की पार्टी कमजोर होगी।

लेकिन सपा का दामन छोड़कर भाजपा के साथ जाने से यह सवाल उठने लगा है कि आखिरकार लोग सपा का साथ छोड़कर भाजपा में ही क्यों जा रहे हैं? क्या लोग सपा के साथ इसलिए जुड़े थे कि इसका भविष्य उज्जवल है और ज्यादा समय तक मलाई काटी जा सकती है या लोगों को सपा का नेतृत्व नहीं रास आ रहा है? यह दोनों ही बातें संभव हो सकती हैं, क्योंकि समाजवादी पार्टी में जितने भी बड़े नेता हैं, वो सभी लोग अखिलेश यादव से बहुत सीनियर हैं।

इसमें परिवार के लोगों की बात नहीं की जा रही है। जब तक सपा की उत्तर प्रदेश में सरकार थी, तब तक लोगों को अपना स्वार्थ दिखाई दे रहा था जिसकी पूर्ति सरकार के जरिए हो रही थी, लेकिन सरकार जाने के बाद लोगों को मलाई मिलनी बंद हो गई। अब लोगों को यह लग रहा है कि नेतृत्व पर उंगली उठाकर धीरे से सरकार के साथ जाने में ही मजा है। उधर, भाजपा को भी दोहरा लाभ मिल रहा है। पहला तो यह कि उत्तर प्रदेश में सपा जितनी ही कमजोर होगी, उसका भाजपा को उतना ही फायदा मिलेगा। दूसरा यह कि राज्यसभा में उसको बहुमत मिल जाएगा।

फिलहाल उत्तर प्रदेश में सपा के पास जो ताकत है उसके बल पर सपा राज्यसभा में केवल एक सांसद ही भेज पाएगी और राज्यसभा में पहुंचने वालों की कतार काफी लंबी है। इसलिए अखिलेश यादव के सामने एक बड़ी चुनौती है कि वो सबको कैसे खुश रख पाएंगे।

इसके अलावा उनके चाचा जिनको वो सबसे अधिक प्यार और सम्मान करते हैं, उनको भी राज्यसभा में भेजना जरूरी है। अगर उनको नहीं भेजते हैं, तो उनके चचेरे भाई धर्मेंद्र हैं और उनकी पत्नी डिंपल हैं। इन सबके बीच पार्टी के जो लोग साथ छोड़कर जा रहे हैं। उन्हें यह लगने लगा था कि सपा के साथ रहना अब फायदे का सौदा नहीं है।  

 

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