क्या कर्नाटक में अब टूट जाएगा जेडीएस और कांग्रेस गठबंधन?

देश
Updated Jul 30, 2019 | 17:00 IST | मनोज यादव

तीन हफ्ते तक चले कर्नाटक के सियासी नाटक का गठबंधने के लिए दुखद अंत हुआ। अब गठबंधन भी टूटने के आसार नजर आने लगे हैं।

Kumarswamy, Siddharamaih
Kumarswamy, Siddharamaih  |  तस्वीर साभार: PTI
मुख्य बातें
  • कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस गठबंधन की सरकार जैसे तैसे तरह से चल रही थी
  • गठबंधन केवल इसलिए हुआ था कि किसी तरह से भाजपा को राज्य की सत्ता से बाहर रखा जाए
  • स्वार्थ पर आधारित मायावती और अखिलेश के गठबंधन की तरह जेडीएस और कांग्रेस का भी टूट सकता है

बेंगलुरुः जुलाई माह के पहले हफ्ते में कर्नाटक में सियासी नाटक शुरू हुआ था और तीसरे हफ्ते में गठबंधन के लिए दुखद अंत के साथ उसका पटाक्षेप हुआ। अब कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। येदियुरप्पा का कहना है कि वो जनता से किए गए वादों को पहले पूरा करेंगे। येदियुरप्पा जनता से किए गए अपने वादे पूरे करने में लगेंगे, वहीं कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन में अब धीरे-धीरे दरार पैदा होने की खबरें आने लगी हैं। 

पिछले 14 माह से कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस गठबंधन की सरकार किसी तरह से चल रही थी। यह सरकार इसलिए चल रही थी, क्योंकि भाजपा को सत्ता से दूर रखना था। लेकिन इस समय जोड़-तोड़ करके सरकार बनाने से भाजपा बहुत ज्यादा दिनों तक सत्ता से दूर नहीं रह सकती है, क्योंकि जोड़-तोड़ में माहिर सियासतदा इस समय भाजपा के पास ज्यादा अन्य पार्टियों के पास कम ही रह गए हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद जब बीएस येदियुरप्पा सदन के पटल पर बहुमत साबित करने में नाकाम रहे थे, तो बड़े भारी मन से उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करना रहा होता और बहुमत साबित करने के लिए उसी समय थोड़ा वक्त मिल गया होता तो आज कर्नाटक में इस तरह का नाटक ही नहीं देखने को मिलता। येदियुरप्पा की सरकार चुनाव नतीजे आने के बाद से ही धड़ल्ले से चल रही होती। 

लेकिन जिस समय येदियुरप्पा इस्तीफा देकर बाहर निकले थे, उसी समय से ही उनकी नजरें फिर से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए लगी हुई थी। वैसे तो कोई यह बात स्वीकार करने में आना-कानी कर रहा है। लेकिन कर्नाटक में जो कुछ भी हुआ उसको ऑपरेशन लोटस ही कहा जाना चाहिए। जिस तरह से कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों को तोड़ा गया। वह कोई साधारण घटना नहीं कही जा सकती है। ऊपरी तौर पर तो कांग्रेस और जेडीएस एक साथ थे, लेकिन उनके अंदर कहीं न कहीं मनमुटाव जरूर था। उसका कारण यह था कि जेडीएस के विधायकों की संख्या कांग्रेस के संख्या बल की आधी थी। एक तरह से यह गठबंधन बेमेल था। 

कर्नाटक में गठबंधन केवल इसलिए हुआ था कि किसी तरह से भाजपा को एक राज्य की सत्ता से बाहर रखा जाए। हालांकि, जनता ने अपना भरोसा भाजपा में ही जताया था और भाजपा राज्य की सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी। कांग्रेस और जेडीएस का गठबंधन स्वार्थ का था और गठबंधन के समय से ही तय हो गया था कि यह ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाला है। अब सरकार जाने के बाद ऐसी चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन जल्द ही टूट सकता है। गठबंधन टूटने की वजह भी स्वार्थ ही बनेगा। जिन सीटों के विधायकों को अयोग्य ठहराया गया है। वहां पर उपचुनाव कराए जाएंगे। इसलिए सभी दलों की यह कोशिश होगी कि उसके ज्यादा से ज्यादा विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा में दस्तक दें। इसलिए सभी दल अलग-अलग चुनाव लड़ने के बारे में सोच सकते हैं। 

हालांकि, अभी इस पर कोई अधिकारिक बयान अभी तक नहीं आए हैं, लेकिन इस बात की चर्चा अब तेज हो गई है कि यूपी में जिस तरह से मायावती और अखिलेश का गठबंधन टूट गया। उसी तरह से कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस का गठबंधन भी टूट जाएगा। 
 

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