दागी नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट का चाबुक, दागी व्यक्ति को टिकट देने की वजह बताएं राजनीतिक दल

देश
आलोक राव
Updated Feb 13, 2020 | 11:56 IST

Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने एक अहम फैसले में सभी राजनीतिक दलों को अपने दागी नेताओं की जानकारी अपनी वेबसाइट पर 48 घंटे के अंदर देने के लिए कहा है।

All political parties must upload tianted leaders record on their website : Supreme Court
दागी नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला।  |  तस्वीर साभार: PTI

नई दिल्ली: राजनीति में दागी नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट का शिकंजा कसने लगा है। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को अपने एक बड़े फैसले में सभी राजनीतिक पार्टियों को आपराधिक रिकॉर्ड वाले अपने नेताओं के बारे में जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को 48 घंटे का समय दिया है। कोर्ट ने कहा है कि राजनीतिक दलों को यह बताना होगा कि दागी नेताओं को टिकट देने की वजह क्या थी। 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में सभी राजनीतिक पार्टियां को अपने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी अपनी वेबसाइटों एवं प्रिंट मीडिया के जरिए सार्वजनिक करने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक दलों को यह बताना होगा कि उन्होंने आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति का उम्मीदवार के रूप में चयन क्यों किया? अदालत ने कहा है कि राजनीतिक दलों को तीन दिनों के अंदर ऐसे उम्मीदवारों की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होगी और ऐसा न करने पर चुनाव आयोग राजनीतिक दलों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई शुरू कर सकता है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ऐसे समय आया है जब दिल्ली चुनावों पर अपनी रिपोर्ट में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिस रिसर्च ने कहा है कि इस चुनाव में चुनकर आने वाले आधे से ज्यादा नए विधायक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं। दरअसल, दिल्ली में आपराधिक रिकॉर्ड वाले विधायकों की संख्या करीब-करीब दोगुनी हो गई है। दिल्ली में विधानसभा की 70 सीटें हैं और 2015 में दागी विधायकों की संख्या 24 थी और यह संख्या 2020 में बढ़कर 43 हो गई। ऐसे कई विधायक हैं जिन पर रेप एवं हत्या की कोशिश सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं। 

'राजनीति में 33 प्रतिशत नेता दागी' 
भारत में अपराध और राजनीति का नेक्सस काफी मजबूत है। इसका जिक्र समय-समय जारी होने वाली रिपोर्टों में होता रहा है। राजनीति में दागी नेताओं की बढ़ती संख्या पर सुप्रीम कोर्ट पहले भी चिंता जाहिर कर चुका है। अप्रैल 2018 में राजनीतिक सुधारों के लिए काम करने वाले एडीआर ने एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में उसने बताया कि भारतीय संसद एवं राज्यों के विधायकों की कुल संख्या के करीब 33 प्रतिशत नेता दागी हैं। इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज हैं।

कमजोर हैं कानून
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राजनीति से अपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को दूर रखने के लिए कठोर कानून का अभाव है। जानकारों का मानना है कि दागी लोगों को सियासत से दूर रखने के लिए संसद को अनुच्छेद 102 एवं पीपुल्स एक्ट के प्रावधानों में संशोधन करना होगा। ये सुधार किए बिना राजनीति को स्वच्छ नहीं बनाया जा सकता। भारत में दागी लोगों के बारे में माना जाता है कि उनका अपना एक स्थानीय प्रभाव होता है जो चुनाव जीतने में उनकी मदद करता है। दागी या जेल की सजा काट चुके व्यक्ति को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए जो कानून हैं वे कमजोर हैं। भारत में दो साल से कम की सजा भुगत चुका व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है। दागी उम्मीदवारों के चुने जाने के पीछे मतदाताओं को उनके बारे में जानकारी न होना भी बताया जाता है। 

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