देश

रोपवे से होगी मां कामाख्या मंदिर की यात्रा, 20 मिनट का सफर सिर्फ 6 मिनट में

असम की आध्यात्मिक पहचान मां कामाख्या मंदिर तक श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने ₹213.24 करोड़ की लागत से कामाख्या रोपवे परियोजना को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, 1.43 किमी लंबा यह अत्याधुनिक रोपवे कामाख्या रेलवे स्टेशन को सीधे मंदिर से जोड़ेगा, जिससे यात्रा समय 20 मिनट से घटकर 6 मिनट रह जाएगा।

kamakhya temple rope way

कामाख्या मंदिर तक बनेगा रोपवे (फोटो- PTI)

असम की आध्यात्मिक पहचान मां कामाख्या मंदिर तक श्रद्धालुओं की यात्रा अब पहले से कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक होने जा रही है।केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ₹213.24 करोड़ की लागत से बनने वाले कामाख्या रोपवे प्रोजेक्ट की जानकारी साझा की है, जो कामाख्या रेलवे स्टेशन को सीधे मां कामाख्या मंदिर से जोड़ेगा।

कितना लंबा होगा रोपवे

1.43 किलोमीटर लंबा यह अत्याधुनिक रोपवे न केवल यात्रा को सरल बनाएगा, बल्कि आस्था और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का सुंदर संगम भी पेश करेगा। इस रोपवे के शुरू होने से मंदिर तक पहुंचने में लगने वाला समय 20 मिनट से घटकर सिर्फ 6 मिनट रह जाएगा।

विकास भी, विरासत भी

यह परियोजना सरकार के “विकास भी, विरासत भी” विजन को साकार करती है। आधुनिक गोंडोलाओं के जरिए रोजाना 16,500 से अधिक यात्री सफर कर सकेंगे, जिससे सड़क पर भीड़ कम होगी और पर्यावरण के अनुकूल यातायात को बढ़ावा मिलेगा।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

रोपवे परियोजना से न सिर्फ श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय रोजगार, पर्यटन और व्यापार को भी नई गति मिलेगी। यह असम को धार्मिक पर्यटन के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करेगा। कामाख्या रोपवे परियोजना आस्था, सुविधा और विकास तीनों को एक साथ जोड़ने की एक बड़ी पहल मानी जा रही है।

मां कामाख्या मंदिर

मां कामाख्या मंदिर भारत के सबसे प्राचीन और शक्तिशाली शक्ति पीठों में से एक है। यह मंदिर असम की राजधानी गुवाहाटी के पास नीलाचल पर्वत पर स्थित है और तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मां कामाख्या को कामना पूर्ण करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। गर्भगृह में एक प्राकृतिक शिला है, जहां से जलस्रोत बहता है—इसे देवी की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। हर साल अंबुबाची मेला यहां का सबसे बड़ा उत्सव होता है। मान्यता है कि इस दौरान देवी रजस्वला होती हैं, इसलिए मंदिर कुछ दिनों के लिए बंद रहता है और फिर विशेष अनुष्ठानों के साथ खोला जाता है। इस समय देश-विदेश से साधु, तांत्रिक और श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।

भावना किशोर
भावना किशोर author

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यू... और देखें

End of Article