बच्चों में धूल और फूड से एलर्जी
Food And Dust Allergy In Children: हर साल 14 नवंबर को हम बाल दिवस बड़े प्यार से मनाते है। स्कूलों में रंग-बिरंगे फेस्ट, बच्चों की मुस्कानें और ढेर सारी खुशियां। लेकिन क्या कभी सोचा है कि आज का बचपन, जो हंसी-खुशी में बीतना चाहिए, वो अब छींक, खांसी और फूड एलर्जी के बीच सिमटता जा रहा है? आजकल के बच्चे पहले से कहीं ज्यादा एलर्जिक हो गए हैं। किसी को दूध से, किसी को धूल से तो किसी को कुछ खास खाने से परेशानी होती है। और ये सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि हर घर की हकीकत बनता जा रहा है। आज के बच्चे पहले से ज्यादा बीमारियों और एलर्जी से घिरे हुए हैं।
कई घरों में अब छींकना, खांसी, त्वचा पर दाने या खाने के बाद परेशानी जैसी बातें आम हो गई हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह सिर्फ मौसम या खाने का मामला नहीं, बल्कि हमारे बदलते माहौल, खान-पान और जरूरत से ज्यादा साफ-सुथरी जीवनशैली का नतीजा है। डॉ. पूनम सिदाना, डॉ. मेधा और डॉ. मनिंदर सिंह धालीवाल जैसे टॉप बालरोग विशेषज्ञ कहते हैं कि बच्चों की इम्युनिटी पर आज पहले से कहीं ज्यादा दबाव है। इस बाल दिवस पर सवाल यह नहीं कि हम बच्चों को क्या गिफ्ट दें, बल्कि यह है कि हम उन्हें किस तरह एक सुरक्षित और स्वस्थ बचपन दे सकते हैं। आइए, समझते हैं आखिर बच्चों में क्यों बढ़ रही हैं ये एलर्जी और पेरेंट्स क्या कर सकते हैं।
सीके बिड़ला हॉस्पिटल की बालरोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम सिदाना (डायरेक्टर - नियोनेटोलॉजी और पीडियाट्रिक्स) कहती हैं कि अगर हम कुछ साल पीछे जाएं तो बच्चे मिट्टी में खेलते दिखते थे, पालतू जानवरों को छूते थे और बाहर का खाना कम खाते थे। आज वही बच्चे एसी कमरों, मोबाइल और सैनिटाइजर की दुनिया में पल रहे हैं। बच्चों में खाने और धूल से होने वाली एलर्जी बढ़ने की बड़ी वजह हमारी लाइफस्टाइल और पर्यावरण दोनों हैं।
वो आगे कहती हैं कि जब बच्चों को बहुत ज्यादा साफ-सुथरे माहौल में रखा जाता है, तो उनकी इम्युनिटी को ट्रेनिंग नहीं मिल पाती। बच्चों के शरीर को समझना होता है कि कौन-सा जीवाणु हानिकारक है और कौन नहीं, लेकिन अगर संपर्क ही नहीं होगा, तो शरीर हर चीज पर रिएक्ट करने लगेगा।
माता-पिता हमेशा चाहते हैं कि उनका बच्चा साफ रहे, बीमार न पड़े। पर क्या आप जानते हैं जरूरत से ज्यादा साफ-सफाई भी बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकती है? डॉ. पूनम के मुताबिक इसे हाइजीन हाइपोथेसिस कहा जाता है। इसका मतलब है कि अगर बच्चे को शुरू से कीटाणुओं और नेचुरल बैक्टीरिया का थोड़ा संपर्क न मिले, तो उसका शरीर बाद में छोटी-छोटी चीजों से भी डरने लगता है।
जब बच्चा हर चीज से बचाया, मिट्टी, पालतू जानवर और हवा में धूल के संपर्क में आने से रोका जाता है, तो उसकी इम्युनिटी सीख नहीं पाती। नतीजा ये होता है कि बाद में वही बच्चा खाने या हवा में मौजूद मामूली तत्वों से भी एलर्जिक हो सकता है। इससे उनमें त्वचा, सांस और पेट से जुड़ी एलर्जी की समस्या बढ़ती है।
मधुकर रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल की पीडियाट्रिशन डॉ. मेधा की मानें तो आजकल बच्चों के खाने की थाली में घर का बना खाना कम और पैकेट वाला फूड ज्यादा है। ये बदलाव दिखने में आसान लगता है, लेकिन यह शरीर पर गहरा असर डालता है। बढ़ता शहरीकरण, प्रोसेस्ड फूड और नेचुरल फाइबर की कमी ने बच्चों की इम्युनिटी को कमजोर किया है। हमारा शरीर जो प्राकृतिक संतुलन बनाता है, वह ऐसे खाने से बिगड़ जाता है। बात सिर्फ खाने की नहीं, बल्कि उसके गुण की है जैसे,
ये सभी चीजें धीरे-धीरे शरीर को बाहरी चीजों के प्रति सेंसिटिव बना देती हैं।
अमृता हॉस्पिटल दिल्ली के पीडियाट्ररिक रेस्पिरेटरी मेडिसिन एक्सपर्ट और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनिंदर सिंह धालीवाल के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर और दूसरे बड़े शहरों में बच्चे सिर्फ पढ़ाई से नहीं, बल्कि हवा से भी जंग लड़ रहे हैं। इन शहरों में धूल, प्रदूषण और धुआं उनके फेफड़ों के लिए सबसे बड़ा दुश्मन बन गए हैं। प्रदूषित हवा बच्चे के शरीर के डिफेंस सिस्टम को हर वक्त सतर्क रखती है। जब शरीर लगातार अलर्ट रहता है, तो छोटी-सी चीज पर भी ओवर-रिएक्ट करने लगता है जैसे घर की धूल या धुएं से।
शहरों में आज ज्यादातर बच्चे 80–90% समय घर के अंदर बिताते हैं। लेकिन घर की हवा भी अब सुरक्षित नहीं,
यह सुनकर हैरानी होगी कि एलर्जी की जड़ें गर्भ में ही पड़ सकती हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक, कई रिसर्च में पाया गया है कि भ्रूण के खून में भी कुछ प्रदूषक तत्व पाए जाते हैं।
कई बार माता-पिता सोचते हैं कि यह सामान्य जुकाम है, पर ये एलर्जी का शुरुआती संकेत हो सकता है। लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना बच्चे के स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक हो सकता है। ऐसे में कुछ शुरुआती संकेतों पर आपको जरूर नजर रखनी चाहिए,
डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर बच्चे को बार-बार ऐसे लक्षण दिख रहे हैं, तो देर न करें। एलर्जी टेस्ट कराएं और डॉक्टर से सही इलाज शुरू करें।
डॉ. मनिंदर की मानें तो एलर्जी से बचाव कोई मुश्किल काम नहीं है। बस आपको जरूरत है थोड़ी समझ और छोटी आदतों को अपनाने की। ऐसे में आप इन सुझावों को रोजमर्रा की जिंदगी में अपना सकता है,
डॉक्टर की राय में बाल दिवस सिर्फ खुशियां बांटने का दिन नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने का अवसर है। इसलिए इस बाल दिवस पर गिफ्ट में सिर्फ खिलौने नहीं, उन्हें साफ हवा, नेचुरल खाना, और प्रकृति के करीब रहने की आजादी का तोहफा दें। क्योंकि बचपन का मतलब सिर्फ खेलना नहीं, बल्कि बिना डर के सांस लेना भी है।