सेकेंडरी बांझपन
Secondary Infertility Explained In Hindi: आजकल हम देखते हैं कि शादी के बाद कपल्स पहला बच्चा तो आसानी से प्लान कर लेते हैं, उन्हें इस दौरान कुछ खास परेशानी नहीं होती है और आसानी से कंसीव हो जाता है। मगर उन्हें दूसरे बच्चे में बहुत दिक्कत आती है। शुरू में उन्हें लगता है कि शायद तनाव या थकान की वजह से ऐसा हो रहा है, लेकिन जब कोशिश में एक-एक साल निकल जाता है, तो उन्हें समझ आता है कि कुछ तो गड़बड़ है। ऐसे में जब वे डॉक्टर के पास जाते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि उनके साथ भी सेकेंडरी बांझपन या इंफर्टिलिटी (Secondary Infertility) की समस्या है। कपल्स के बीच में यह समस्या अब आम हो गई है।
स्त्रीरोग विशेषज्ञ और आइवीएफ एक्सपर्ट डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा बताते हैं कि आज के समय में सेकेंडरी बांझपन मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पहले जहां यह समस्या बहुत कम सुनने में आती थी, वहीं अब हर तीसरे-चौथे दंपत्ति में सेकेंडरी बांझपन देखने को मिल रहा है। यह अब सिर्फ बड़ी उम्र की महिलाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि जीवनशैली, खानपान, तनाव और देर से बच्चा प्लान करने की आदतों ने इसे आम बना दिया है। इस लेख में हम समझेंगे कि आखिर सेकेंडरी बांझपन होता क्यों है, इसके लक्षण क्या हैं, और इससे बचने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
सरल शब्दों में कहें तो जब किसी दंपत्ति को पहला बच्चा आसानी से हो जाए, लेकिन दूसरी बार गर्भ ठहरने में परेशानी आने लगे, तो उसे सेकेंडरी बांझपन कहा जाता है। यह स्थिति प्राइमरी बांझपन से अलग होती है। प्राइमरी बांझपन में महिला को पहली बार ही गर्भ नहीं ठहरता, जबकि सेकेंडरी में शरीर पहले एक बार गर्भधारण कर चुका होता है।
डॉ. पुनीत की मानें तो आज के समय में बांझपन के लगभग 30 से 40 प्रतिशत मामले सेकेंडरी प्रकार के हैं, जिनका संबंध उम्र, हार्मोन, तनाव और खानपान से है।
आज के समय में बढ़ती इस बीमारी के पीछे की वजह सिर्फ शारीरिक कारणों में ही नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन के तौर-तरीकों से भी जुड़ी है। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी समस्याएं, लाइफस्टाइल और खानपान की आदतें भी इसे बढ़ाने में योगदान दे रही हैं जैसे,
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो कई बार महिलाएं या पुरुष इस समस्या को देर से पहचानते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि पहले बच्चा तो आसानी से हो गया था, अब भी हो जाएगा। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए,
डॉ. पुनीत ऐसे में सलाह देते हैं कि समय पर जांच करवाना बहुत जरूरी है, क्योंकि जितनी जल्दी कारण पता चलेगा, इलाज उतना सरल रहेगा। ऐसे में आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए,
आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि सेकेंडरी बांझपन की समस्या सिर्फ महिलाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पुरुषों में भी देखने को मिलती है। ऐसे में दोनों के ही मेडिकल कारण भी अलग-अलग हो सकते हैं।
डॉ. पुनीत सेकेंडरी बांझपन के इलाज को लेकर कहते हैं कि इसके लिए सही समय पर जांच कराना सबसे जरूरी है। आपके डॉक्टर कुछ साधारण टेस्ट की मदद से स्थिति का समय रहते और बेहतर ढंग से पता लगा सकते है। आमतौर पर डॉक्टर ये जांच करवाने की सलाह देते हैं
स्थिति का निदान होने के बाद आपको डॉक्टर इलाज के लिए के लिए कई तरह से सुझाव दे सकते हैं जिनमें शामिल है,
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इलाज की सफलता सिर्फ दवाओं पर नहीं, बल्कि जीवनशैली और मानसिक संतुलन पर भी निर्भर करती है।
थोड़े-बहुत बदलाव से यह समस्या काफी हद तक टाली जा सकती है। यहां कुछ आसान उपाय हैं –
डॉक्टर सुझाव देते हैं कि आपको हमेशा उम्मीद रखनी चाहिए। सेकेंडरी बांझपन कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसका हल न हो। यह पूरी तरह ठीक हो सकती है, बस जरूरी है समय पर पहचान और सही कदम उठाना। बस कुछ महीनों के इलाज और जीवनशैली में बदलाव के बाद वे दोबारा माता-पिता बन सकते हैं।
सेकेंडरी बांझपन आज के दौर में आम होता जा रहा है, लेकिन यह पूरी तरह उपचार योग्य है। समय पर जांच, संतुलित जीवनशैली और सकारात्मक सोच से हर जोड़ा दोबारा माता-पिता बन सकता है। अगर आप या आपका कोई परिचित इस स्थिति से गुजर रहा है, तो चुप न रहें बल्कि तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।