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Explained: क्या होती है सेकेंडरी इन्फर्टिलिटी, कपल्स को दूसरा बच्चा करने में क्यों हो रही परेशानी

Secondary Infertility Explained In Hindi: क्या आपका भी पहला बच्चा आसानी से हुआ, लेकिन अब कितनी भी कोशिश करें, गर्भ नहीं ठहर रहा? तो बता दें कि यह सेकेंडरी बांझपन का संकेत हो सकता है। आजकल यह समस्या तेजी से बढ़ रही है और कई दंपत्तियों के लिए भावनात्मक चुनौती बन गई है। आज के इस लेख में हम इस स्थिति के बारे में विस्तार से जानेंगे और आपको बताएंगे कि दूसरा बच्चा जल्दी कैसे होगा कंसीव।

सेकेंडरी बांझपन

सेकेंडरी बांझपन

Secondary Infertility Explained In Hindi: आजकल हम देखते हैं कि शादी के बाद कपल्स पहला बच्चा तो आसानी से प्लान कर लेते हैं, उन्हें इस दौरान कुछ खास परेशानी नहीं होती है और आसानी से कंसीव हो जाता है। मगर उन्हें दूसरे बच्चे में बहुत दिक्कत आती है। शुरू में उन्हें लगता है कि शायद तनाव या थकान की वजह से ऐसा हो रहा है, लेकिन जब कोशिश में एक-एक साल निकल जाता है, तो उन्हें समझ आता है कि कुछ तो गड़बड़ है। ऐसे में जब वे डॉक्टर के पास जाते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि उनके साथ भी सेकेंडरी बांझपन या इंफर्टिलिटी (Secondary Infertility) की समस्या है। कपल्स के बीच में यह समस्या अब आम हो गई है।

स्त्रीरोग विशेषज्ञ और आइवीएफ एक्सपर्ट डॉ. पुनीत राणा अरोड़ा बताते हैं कि आज के समय में सेकेंडरी बांझपन मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पहले जहां यह समस्या बहुत कम सुनने में आती थी, वहीं अब हर तीसरे-चौथे दंपत्ति में सेकेंडरी बांझपन देखने को मिल रहा है। यह अब सिर्फ बड़ी उम्र की महिलाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि जीवनशैली, खानपान, तनाव और देर से बच्चा प्लान करने की आदतों ने इसे आम बना दिया है। इस लेख में हम समझेंगे कि आखिर सेकेंडरी बांझपन होता क्यों है, इसके लक्षण क्या हैं, और इससे बचने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

सेकेंडरी बांझपन क्या होता है (Secondary Infertility In Hindi)

सरल शब्दों में कहें तो जब किसी दंपत्ति को पहला बच्चा आसानी से हो जाए, लेकिन दूसरी बार गर्भ ठहरने में परेशानी आने लगे, तो उसे सेकेंडरी बांझपन कहा जाता है। यह स्थिति प्राइमरी बांझपन से अलग होती है। प्राइमरी बांझपन में महिला को पहली बार ही गर्भ नहीं ठहरता, जबकि सेकेंडरी में शरीर पहले एक बार गर्भधारण कर चुका होता है।

डॉ. पुनीत की मानें तो आज के समय में बांझपन के लगभग 30 से 40 प्रतिशत मामले सेकेंडरी प्रकार के हैं, जिनका संबंध उम्र, हार्मोन, तनाव और खानपान से है।

सेकेंडरी बांझपन के पीछे वजह
सेकेंडरी बांझपन के पीछे वजह

क्यों बढ़ रही है सेकेंडरी बांझपन की समस्या (Why Secondary Infertility Increasing)

आज के समय में बढ़ती इस बीमारी के पीछे की वजह सिर्फ शारीरिक कारणों में ही नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन के तौर-तरीकों से भी जुड़ी है। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी समस्याएं, लाइफस्टाइल और खानपान की आदतें भी इसे बढ़ाने में योगदान दे रही हैं जैसे,

  • देर से दूसरा बच्चा प्लान करना: करियर, आर्थिक दबाव या पारिवारिक कारणों से बहुत से जोड़े दूसरा बच्चा देर से सोचते हैं। लेकिन 30-35 की उम्र के बाद महिलाओं की गर्भधारण क्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है।
  • हार्मोनल असंतुलन: थायरॉयड, PCOS या इन्सुलिन से जुड़ी गड़बड़ियां गर्भधारण में बड़ी दिक्कत बनती हैं।
  • मोटापा और तनाव: शरीर का वजन बढ़ना, थकान और तनाव हार्मोन को बिगाड़ देते हैं।
  • पुरुषों में कमजोरी: धूम्रपान, शराब, अनियमित दिनचर्या और नींद की कमी से शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता कम होती है।
  • पहली डिलीवरी के बाद जटिलताएं: सी-सेक्शन डिलीवरी या संक्रमण से गर्भाशय में निशान या जकड़न बन सकती है।
  • इनएक्टिव जीवनशैली: दिनभर बैठना, बाहर का खाना और शारीरिक गतिविधि की कमी भी इसका एक बड़ा कारण है।

सेकेंडरी बांझपन के लक्षण क्या होते हैं (Symptoms Of Secondary Infertility)

हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो कई बार महिलाएं या पुरुष इस समस्या को देर से पहचानते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि पहले बच्चा तो आसानी से हो गया था, अब भी हो जाएगा। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए,

  • 6 से 12 महीने की कोशिश के बाद भी गर्भ न ठहरना
  • मासिक धर्म का अनियमित होना या अधिक दर्द होना
  • इंटीमेसी के दौरान दर्द या बार-बार संक्रमण होना
  • अचानक वजन बढ़ना या घटना
  • पुरुषों में थकावट, कमजोरी या यौन इच्छा में कमी
  • बार-बार गर्भपात होना
अगर इस तरह के लक्षण कपल्स लगातार नोटिस करते हैं तो ऐसे में बिना देर किए डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

सेकेंडरी बांझपन के लक्षण
सेकेंडरी बांझपन के लक्षण

डॉक्टर से कब सलाह लें?

डॉ. पुनीत ऐसे में सलाह देते हैं कि समय पर जांच करवाना बहुत जरूरी है, क्योंकि जितनी जल्दी कारण पता चलेगा, इलाज उतना सरल रहेगा। ऐसे में आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए,

  • अगर किसी महिला की उम्र 30 वर्ष से कम है और 1 वर्ष की कोशिशों के बाद भी गर्भ नहीं ठहरता, तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है।
  • अगर महिला 35 वर्ष या उससे अधिक की हैं, तो सिर्फ 6 महीने में ही जांच करवा लें।
  • अगर पहले गर्भपात, थायरॉयड, PCOS, या सी-सेक्शन जैसी समस्या रही है, तो और जल्दी सलाह लेना जरूरी है।

सेकेंडरी बांझपन के मेडिकल कारण क्या हो सकते हैं (Medical Causes Of Secondary Infertility)

आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि सेकेंडरी बांझपन की समस्या सिर्फ महिलाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पुरुषों में भी देखने को मिलती है। ऐसे में दोनों के ही मेडिकल कारण भी अलग-अलग हो सकते हैं।

महिलाओं में सेकेंडरी बांझपन के कारण (Secondary Infertility Causes In Women)

  • फैलोपियन ट्यूब में रुकावट (Fallopian Tube Blockage): इससे अंडाणु और शुक्राणु का मिलना कठिन हो जाता है।
  • एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis): इसमें गर्भाशय की परत बाहर बढ़ने लगती है, जिससे दर्द और गर्भधारण में दिक्कत होती है।
  • पीसीओएस (PCOS) : इसमें अंडे नियमित नहीं बनते या बाहर नहीं निकल पाते हैं।
  • गर्भाशय में गांठ या निशान (Fibroids या Scarring): यह भी गर्भ ठहरने में रुकावट पैदा करते हैं।
  • ओव्यूलेशन की गड़बड़ी: हार्मोन असंतुलन की वजह से अंडा रिलीज न होना।

सेकेंडरी बांझपन के पीछे मेडिकल कारण
सेकेंडरी बांझपन के पीछे मेडिकल कारण

पुरुषों में सेकेंडरी बांझपन के कारण (Secondary Infertility Causes In Men)

  • शुक्राणुओं की कमी या कमजोरी।
  • वेरिकोसील (Varicocele) – अंडकोष की नसों में सूजन।
  • अधिक गर्मी, तंग कपड़े या मोबाइल की रेडिएशन का असर
  • तंबाकू, धूम्रपान और शराब के सेवन जैसी आदतें।
  • तनाव अधिक लेना

सेकेंडरी बांझपन का इलाज क्या है (Secondary Infertility Treatment)

डॉ. पुनीत सेकेंडरी बांझपन के इलाज को लेकर कहते हैं कि इसके लिए सही समय पर जांच कराना सबसे जरूरी है। आपके डॉक्टर कुछ साधारण टेस्ट की मदद से स्थिति का समय रहते और बेहतर ढंग से पता लगा सकते है। आमतौर पर डॉक्टर ये जांच करवाने की सलाह देते हैं

  • खून की जांच और हार्मोन की रिपोर्ट
  • अल्ट्रासाउंड या ट्यूबों की जांच
  • पुरुषों के लिए शुक्राणु परीक्षण (Semen Test)

सेकेंडरी बांझपन का इलाज कैसे किया जाता है?

स्थिति का निदान होने के बाद आपको डॉक्टर इलाज के लिए के लिए कई तरह से सुझाव दे सकते हैं जिनमें शामिल है,

  • अंडा बनाने वाली दवाइयां देना
  • IUI (बच्चेदानी में शुक्राणु डालना)
  • IVF (टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक)
  • सर्जरी अगर ट्यूब या गर्भाशय में रुकावट हो
  • काउंसलिंग और तनाव प्रबंधन

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इलाज की सफलता सिर्फ दवाओं पर नहीं, बल्कि जीवनशैली और मानसिक संतुलन पर भी निर्भर करती है।

सेकेंडरी बांझपन से बचाव कैसे करें (Secondary Infertility Prevention)

थोड़े-बहुत बदलाव से यह समस्या काफी हद तक टाली जा सकती है। यहां कुछ आसान उपाय हैं –

  • संतुलित भोजन करें: जिसमें हरी सब्जियां, मौसमी फल, दालें और बादाम, अखरोट जैसे सूखे मेवे शामिल करें।
  • नियमित व्यायाम करें: योग, प्राणायाम या हल्की सैर से शरीर सक्रिय रहता है और हार्मोन संतुलित रहते हैं।
  • स्मोकिंग व शराब छोड़ें: ये आदतें पुरुष व महिलाओं, दोनों की प्रजनन क्षमता कम करती हैं।
  • भरपूर नींद लें: नींद की कमी से शरीर में हार्मोन का बैलेंस बिगड़ जाता हैं।
  • तनाव कम करें: मेडिटेशन करें, संगीत या बातचीत से मन हल्का रखें।
  • जरूरी पोषक तत्व लें: फोलेट, जिंक, विटामिन D और बी-12 फर्टिलिटी बढ़ाते हैं।
  • पार्टनर से खुलकर बात करें: भावनात्मक सहारा इस सफर को आसान बनाता है।

डॉक्टर क्या देते हैं सलाह

डॉक्टर सुझाव देते हैं कि आपको हमेशा उम्मीद रखनी चाहिए। सेकेंडरी बांझपन कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसका हल न हो। यह पूरी तरह ठीक हो सकती है, बस जरूरी है समय पर पहचान और सही कदम उठाना। बस कुछ महीनों के इलाज और जीवनशैली में बदलाव के बाद वे दोबारा माता-पिता बन सकते हैं।

सेकेंडरी बांझपन आज के दौर में आम होता जा रहा है, लेकिन यह पूरी तरह उपचार योग्य है। समय पर जांच, संतुलित जीवनशैली और सकारात्मक सोच से हर जोड़ा दोबारा माता-पिता बन सकता है। अगर आप या आपका कोई परिचित इस स्थिति से गुजर रहा है, तो चुप न रहें बल्कि तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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