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नॉर्मल वजन, रिपोर्ट भी नॉर्मल.. फिर भी कैसे हो जाता है फैटी लिवर, डॉक्टर ने बताया कहां हो रही है गलती

How Fatty Liver Affects People With Normal Weight: क्या आपका वजन और लिवर टेस्ट रिपोर्ट नॉर्मल है, फिर भी आपका लिवर फैटी हो गया है? तो आप आप अकेले नहीं हैं। आज के समय में यह समस्या काफी लोगों में देखने को मिल रही है। लेकिन सवाल है कि आखिर इसके पीछे का कारण क्या है, आजकल लोगों में यह समस्या क्यों बढ़ रही है? चलिए डॉक्टर्स से जानते हैं इसके पीछे की बड़ी वजह...

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फैटी लिवर के पीछे की असली वजह क्या है
Authored by: Vineet
Updated Feb 14, 2026, 13:54 IST

How Fatty Liver Affects People With Normal Weight: अक्सर हम सोचते हैं कि फैटी लिवर सिर्फ उन्हीं लोगों को होता है जिनका वजन ज्यादा हो या जिनकी रिपोर्ट्स में शुगर-कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ आए। लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। आजकल डॉक्टर कुछ और ही कहानी बता रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो आजकल ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जिनका वजन बिल्कुल नॉर्मल है, ब्लड टेस्ट भी सामान्य हैं, फिर भी अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर निकल आता है। यही वजह है कि डॉक्टर इसे साइलेंट प्रॉब्लम भी कहते हैं। लेकिन मुद्दे की बात यह है कि आखिर इसके पीछे की वजह क्या है। आजकल लोगों में ऐसा क्यों देखने को मिल रहा है।

इस समस्या की वजह को गहराई से समझने के लिए हमने बात की यशोदा अस्पताल के हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. डी. चंद्र शेखर रेड्डी और फोर्टिस अस्पताल ओखला के लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरक्षिथ टीके से। दोनों ही एक्सपर्ट का मानना है कि फैटी लिवर अब सिर्फ मोटापे की बीमारी नहीं रही। बल्कि लाइफस्टाइल और मेटाबॉलिक बदलाव इसके पीछे बड़ी वजह बन रहे हैं। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

नॉर्मल वजन के बावजूद फैटी लिवर क्यों हो रहा है

डॉ. रेड्डी बताते हैं कि कई लोगों में बाहर से शरीर पतला दिखता है, लेकिन अंदरूनी चर्बी यानी विसरल फैट ज्यादा होती है। यही चर्बी लिवर के आसपास जमा होकर उसे प्रभावित करती है। सिर्फ वजन कम होना इस बात की गारंटी नहीं कि शरीर में फैट प्रतिशत भी कम हो। खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी लिवर में फैट जमा होने की शुरुआत कर सकती है।

रिपोर्ट नॉर्मल फिर भी कैसे हो रही बीमारी

डॉ. सुरक्षिथ टीके के मुताबिक, फैटी लिवर की शुरुआती स्टेज में ब्लड टेस्ट बिल्कुल सामान्य आ सकते हैं। साथ ही लिवर एंजाइम भी कई बार बढ़े हुए नहीं मिलते। यही वजह है कि सिर्फ रूटीन ब्लड रिपोर्ट देखकर निश्चिंत हो जाना ठीक नहीं। अल्ट्रासाउंड जैसी जांच में ही असली स्थिति पता चलती है। इसलिए समय-समय पर जांच बहुत जरूरी है।

ज्यादा शुगर और प्रोसेस्ड फूड डाल रहे बड़ा असर

आजकल हम सभी देखते हैं कि मीठे ड्रिंक्स, पैकेज्ड स्नैक्स और रिफाइंड कार्ब्स ज्यादातल लोगों की डाइट का हिस्सा बन चुके हैं। भले ही इनसे वजन तुरंत न बढ़े, लेकिन इनका लिवर पर असर जरूर पड़ता है।

डॉक्टरों के अनुसार ज्यादा फ्रक्टोज और शुगर लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर देते हैं। ऐसे में धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ती जाती है और पता भी नहीं चलता।

बैठे रहने वाली लाइफस्टाइल

फैटी लिवर होने के पीछे का एक बड़ा कारण शारीरिक रूप से कम एक्टिव रहना भी है। घंटों ऑफिस में बैठना, घर आकर आराम करना और एक्सरसाइज की कमी से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि रोजाना कम से कम 30-40 मिनट की हल्की एक्सरसाइज भी लिवर को हेल्दी रखने में मदद करती है। सिर्फ सामान्य सी वॉक, साइकिलिंग और रनिंग आदि भी पर्याप्त हैं।

फैटी लिवर के साइलेंट लक्षण

फैटी लिवर के साइलेंट लक्षण

फैटी लिवर इन लक्षणों हल्के में न लें

फैटी लिवर की शुरुआत में लक्षण बहुत मामूली हो सकते हैं, लेकिन इन्हें भूलकर भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए:
  • बार-बार थकान महसूस होना
  • पेट के ऊपरी हिस्से में हल्का भारीपन
  • कमजोरी या सुस्ती
  • कोई स्पष्ट लक्षण न होना

अगर परिवार में लिवर डिजीज का इतिहास है या अक्सर थकान रहती है, तो जांच जरूर करानी चाहिए।

फैट लिवर से बचाव के आसान टिप्स

फैट लिवर से बचाव के आसान टिप्स

फैट लिवर से बचाव के लिए क्या करें

जैसा कि डॉक्टर्स बताते हैं कि फैटी लिवर के पीछे हमारा खराब लाइफस्टाइल बहुत अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में लिवर को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान लेकिन जरूरी कदम अपनाने चाहिए:

  • नियमित हेल्थ चेकअप कराएं
  • शुगर और प्रोसेस्ड फूड कम करें
  • रोजाना व्यायाम को आदत बनाएं
  • संतुलित और ताजा भोजन लें
  • लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें

डॉक्टर साफ कहते हैं कि लिवर की सेहत सिर्फ वजन पर निर्भर नहीं करती। सही लाइफस्टाइल ही असली सुरक्षा है।

हमेश यह याद रखें कि हमारा लिवर चुपचाप काम करता है और जब तक समस्या बढ़ न जाए, तब तक ज्यादा संकेत नहीं देता है। इसलिए अगर अक्सर थकान, पेट में असहजता महसूस होती है या आप निष्क्रिय जीवनशैली फॉलो करते हैं, तो ऐसे में लिवर रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना समझदारी है।

Expert Views By: डॉ. डी. चंद्र शेखर रेड्डी, यशोदा अस्पताल हैदराबाद में सीनियर कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट और थेरेप्यूटिक एंडोस्कोपिस्ट हैं। वहीं, डॉ. सुरक्षिथ टीके, फोर्टिस अस्पताल ओखला में सीनियर कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी एक्सपर्ट हैं। दोनों ही डॉक्टर्स को लगभग 20 साल का अनुभव है।

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